धुंए में उड़ रहे चालान, विभाग को नहीं कोई चिंता
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जिले में सार्वजनिक स्थानों पर कोई धूम्रपान नहीं करता। यह बात हम नहीं स्वास्थ्य विभाग की टीम की ओर से सार्वजनिक स्थानों पर किए गए चालान की रिपोर्ट बता रही है। दरअसल, सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर रोक लगाने के लिए जिला तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ (डिस्ट्रिक्ट टोबैक कंट्रोल सेल) बनाया गया था।
इसका काम जिले में सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने वालों का चालान काटना था, लेकिन पिछले तीन सालों में इस प्रकोष्ठ ने एक भी चालान नहीं काटा है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने वालों का वर्ष 2014 से लेकर अब तक कोई चालान नहीं काटा गया है।
इस कार्यक्रम के प्रभारी डॉ. भारत भूषण ने बताया कि मैं इस साल का कार्यकाल संभाला रहा हूं। मेरे कार्यकाल में अभी तक एक भी चालान नहीं हुआ है। इससे पहले प्रकोष्ठ का कार्यभार संभाल रहे डॉक्टर शिरीष जैन ने बताया कि मेरे कार्यकाल में भी एक भी चालान नहीं हुआ था।
40 लाख का बजट फिर भी नहीं बना टोबैको सेसेशन सेंटर
40 लाख का बजट फिर भी नहीं बना टोबैको सेसेशन सेंटर
जो लोग तंबाकू छोड़ना चाहते हैं, उनके लिए स्वास्थ्य विभाग को टोबैको सेसेशन सेंटर बनाना था। इसके तहत डाटा ऑपरेटर, काउंसलर, डिस्ट्रिक्ट कंसलटेंट समेत चार पदों पर भर्ती निकाली गई थी।
इसके लिए पिछले वर्ष 40 लाख का बजट पास हुआ था। डिस्ट्रिक्ट कंसलटेंट को छोड़कर अन्य पदों पर नियुक्ति हो गई है, लेकिन अभी तक टोबैको सेसेशन सेंटर शुरू नहीं किया गया। डॉ. भारत भूषण ने बताया कि जहां मरीज आते हैं, वहां इस सेंटर को शुरू किया जाना था।
लेकिन जिला अस्पताल में जगह नहीं मिल पा रही है। अब बरौला के सामुदायिक केंद्र में इसे शुरू करने पर विचार किया जा रहा है। इस साल का बजट अभी नहीं आया है।
स्कूलों के बाहर खुले में बिक रहे हैं तंबाकू
नियम के मुताबिक, स्कूल और कॉलेज के बाहर 100 मीटर के दायरे में तंबाकू और उससे बने उत्पाद नहीं बिकने चाहिए, लेकिन शहर के स्कूलों के बाहर धड़ल्ले से तंबाकू बिक रहा है। बावजूद इसके जिम्मेदारों की इस पर नजर नहीं पड़ती। सेक्टर- 12-22 स्थित गांधी स्मारक स्कूल के गेट के बाहर ही तंबाकू के उत्पाद बेचे जा रहे हैं।
वर्ल्ड नो टोबैको डे पर कार्यक्रम
स्वास्थ्य विभाग हर साल 30 मई को ‘वर्ल्ड नो टोबैको डे’ पर कार्यक्रम आयोजित करता है। इस साल एक सप्ताह का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसके तहत अलग-अलग कॉलेजों में जाकर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।