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ग्रीन बेल्ट पर अवैध कब्जे की जांच पूरी, शासन को भेजे 12 आरोपी अधिकारियों के नाम

Wed, 03 Nov 2021 12:08 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 03 Nov 2021 12:08 AM IST
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Investigation of illegal occupation of green belt completed, names of 12 accused officers sent to the government
नोएडा। शासन के आदेश पर चल रही एमराल्ड कोर्ट की 7 हजार वर्गमीटर ग्रीन बेल्ट पर अवैध कब्जे की जांच पूरी हो गई है। प्राधिकरण ने शासन को 12 आरोपी अधिकारियों के नामों की सूची भेज दी है। अब शासन के आदेश पर आरोपी अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।
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सेक्टर-93ए स्थित सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट मामले में बगल की ग्रीन बेल्ट पर अवैध तरीके से सुपरटेक की ओर से कब्जे की बात सामने आई थी। इसके बाद शासन ने नोएडा प्राधिकरण को अपने स्तर पर जांच के आदेश दिए थे। इस बाबत प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि ग्रीन बेल्ट मामले में 12 अधिकारियों के नाम शासन को भेज दिए गए हैं। इनमें से सभी करीब-करीब पुराने नाम ही हैं जो एसआईटी की रिपोर्ट में सामने आए हैं। ग्रीन बेल्ट मामले में सभी नाम नियोजन विभाग से संबंधित हैं।
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जांच में यह पाया गया कि उद्यान और सिविल को उस समय नियोजन विभाग की ओर से कोई ले आउट प्लान नहीं भेजा गया, इन्हें उस समय लेआउट प्लान दिए जाते तो उनकी भी जवाबदेही होती। प्राधिकरण अधिकारी का कहना है कि रिपोर्ट में यह आधार बनाकर भेजा गया कि उस समय जो नक्शा पास हुआ था, उसके बाद नियोजन विभाग की जिम्मेदारी थी कि अगर ग्रीन बेल्ट है तो वर्क सर्किल को सूचित करना चाहिए था। फिर वर्क सर्किल वहां दीवार आदि बनाकर उद्यान विभाग को देता। इसके बाद उद्यान विभाग उस पर कोई कार्रवाई नहीं करता, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। नियोजन विभाग की ओर से कई बार यह पाया गया कि नक्शे के इतर जमीन कब्जे में है। फिर भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। यही नहीं कंप्लीशन भी दिया गया।
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एसीईओ स्तर पर की जा रही थी जांच
सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट मामले में मिली 7 हजार वर्गमीटर जमीन पर कब्जे की सूचना के बाद शासन ने जांच के आदेश दिए थे। इसमें एसीईओ स्तर पर जांच की गई। प्रारंभिक स्तर पर नियोजन, वर्क सर्किल और उद्यान विभाग को जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा गया। अलग-अलग विभागों की जांच में यह स्पष्ट तौर पर देखने को मिला कि सुपरटेक को आवंटन के समय जो नक्शा पास हुआ, उसमें ग्रीन बेल्ट नहीं दिखाई गई। ऐसे में संभावना यह जताई जा रही है कि एटीएस सोसाइटी ने निर्माण के बाद दीवार खड़ी कर दी, लेकिन सुपरटेक ने दीवार नहीं बनाई। यहां नीचे गैस पाइप लाइन भी गई हुई है। लिहाजा, यहां ग्रीन बेल्ट विकसित की गई और इसका उपयोग एमराल्ड कोर्ट के निवासी कर रहे थे।

इन आरोपियों के नाम भेजे
प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक, तत्कालीन प्रबंधक नियोजन मुकेश गोयल, तत्कालीन सहयुुक्त नगर नियोजक रितुराज व्यास, तत्कालीन नियोजन सहायक अनीता, तत्कालीन सहयुक्त नगर नियोजक विमला सिंह, सेवानिवृत्त नगर नियोजक एके मिश्रा, सेवानिवृत्त वरिष्ठ नगर नियोजक राजपाल कौशिक, सेवानिवृत्त मुख्य वास्तुविद नियोजक त्रिभुवन सिंह समेत अन्य नाम भेजे गए हैं।
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