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Noida News: जांच पर हुए खर्च को बीमा कंपनी नहीं देगी, आयोग ने किया वाद खारिज
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जांच पर हुए खर्च को बीमा कंपनी नहीं देगी, आयोग ने किया वाद खारिज
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। बीमित व्यक्ति बिना किसी बीमारी के केवल जांच कराने के लिए ही अस्पताल में भर्ती होता है, तो उस पर होने वाले खर्च को बीमा कंपनी नहीं देगी। ऐसे ही एक मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी के फैसले के सही ठहराया है। खर्च दिलाने के लिए दायर किए वाद को खारिज कर दिया। आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर और सदस्य अंजु शर्मा ने मामले की सुनवाई की।
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर ओमीक्रान-2 निवासी विमलेश ने अपनी हेल्थ पॉलिसी को स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी में पोर्ट कराया था। कंपनी के प्रतिनिधि के कहने पर पॉलिसी को पोर्ट कराने के बाद 11865 रुपये प्रीमियम का भुगतान किया था। विमलेश के शरीर में दर्द होने के कारण उनको यथार्थ अस्पताल ग्रेनो में चिकित्सकों ने भर्ती कर लिया। उन्होंने पॉलिसी के कैश लैस उपचार के लिए अस्पताल के माध्यम से आवेदन किया। बीमा कंपनी ने केशलेश उपचार के लिए बिना किसी कारण के 17 अगस्त को निरस्त कर दिया। उनको उपचार और दवाई का खर्च स्वयं वहन करना पड़ा। काफी प्रयास के बाद भी कंपनी ने उपचार के खर्च में आए 28 हजार रुपये का भुगतान नहीं किया। जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर करके खर्च राशि को बीमा कंपनी से दिलाने की गुहार लगाई। बीमित ने यथार्थ अस्पताल में इलाज के लिए दावा किया। उनको हायपर टेंशन की बीमारी पाई गई। पेश किए गए अभिलेखों से स्पष्ट हुआ कि उनको केवल जांच पड़ताल व आंकलन के लिए भर्ती किया गया था। जिसमें जांच रिपोर्ट नार्मल थी। आयोग ने कंपनी के क्लेम नहीं देने के फैसले को ही सही करार दिया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। बीमित व्यक्ति बिना किसी बीमारी के केवल जांच कराने के लिए ही अस्पताल में भर्ती होता है, तो उस पर होने वाले खर्च को बीमा कंपनी नहीं देगी। ऐसे ही एक मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी के फैसले के सही ठहराया है। खर्च दिलाने के लिए दायर किए वाद को खारिज कर दिया। आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर और सदस्य अंजु शर्मा ने मामले की सुनवाई की।
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर ओमीक्रान-2 निवासी विमलेश ने अपनी हेल्थ पॉलिसी को स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी में पोर्ट कराया था। कंपनी के प्रतिनिधि के कहने पर पॉलिसी को पोर्ट कराने के बाद 11865 रुपये प्रीमियम का भुगतान किया था। विमलेश के शरीर में दर्द होने के कारण उनको यथार्थ अस्पताल ग्रेनो में चिकित्सकों ने भर्ती कर लिया। उन्होंने पॉलिसी के कैश लैस उपचार के लिए अस्पताल के माध्यम से आवेदन किया। बीमा कंपनी ने केशलेश उपचार के लिए बिना किसी कारण के 17 अगस्त को निरस्त कर दिया। उनको उपचार और दवाई का खर्च स्वयं वहन करना पड़ा। काफी प्रयास के बाद भी कंपनी ने उपचार के खर्च में आए 28 हजार रुपये का भुगतान नहीं किया। जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर करके खर्च राशि को बीमा कंपनी से दिलाने की गुहार लगाई। बीमित ने यथार्थ अस्पताल में इलाज के लिए दावा किया। उनको हायपर टेंशन की बीमारी पाई गई। पेश किए गए अभिलेखों से स्पष्ट हुआ कि उनको केवल जांच पड़ताल व आंकलन के लिए भर्ती किया गया था। जिसमें जांच रिपोर्ट नार्मल थी। आयोग ने कंपनी के क्लेम नहीं देने के फैसले को ही सही करार दिया है।
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