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सस्ता स्वेटर पहनकर कड़ाके की ठंड में कैसे सुरक्षित रहेंगे मासूम
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ग्रेटर नोएडा। 600 रुपये में दो जोड़ी स्कूली यूनीफॉर्म, 200 रुपये में स्वेटर, 200 रुपये में जूते और 100 रुपये में बैग खरीदना अभिभावकों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। इनका कहना है कि लगातार बढ़ रही महंगाई में बच्चों को ठंड से बचाना मुश्किल है। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से परिषदीय स्कूलों के बच्चों के लिए कुल 1100 रुपये अभिभावकों के खाते में दिए जा रहे हैं। अब तक 35 फीसदी अभिभावकों के खातों में ही रुपये पहुंच सके हैं। जबकि, शेष खाते में रकम आने का इंतजार कर रहे हैं। जिले में एक से आठवीं कक्षा के 551 स्कूलों में करीब 85 हजार विद्यार्थी हैं।
वर्ष 2021-22 सत्र के लिए शासन की ओर से परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले सभी बच्चों के अभिभावकों के खाते में 11 सौ रुपये भेजने की योजना है। इसके लिए सभी स्कूलों के बच्चों के अभिभावकों से बैंक खाते का नंबर, कोड आदि लिया जाना है। वहीं, 11 सौ रुपये में दो जोड़ी यूनीफॉर्म, एक स्वेटर, एक जोड़ी जूते और बैग खरीदना है। सर्दियां शुरू हो गई है, लेकिन 50 फीसदी अभिभावकों के खातों में भी रकम नहीं पहुंच पाई है। शिक्षा विभाग के अनुसार, 35 फीसदी ही अभिभावकों के खातों तक पैसे पहुंचे हैं। बाकी 65 फीसदी इंतजार कर रहे हैं। वहीं, अभिभावकों का कहना है कि इतने पैसे में स्वेटर, जूते, बैग और यूनीफॉर्म लेना मुश्किल है।
पिता जी के खाते में पैसे तो आ गए हैं पर 600 रुपये में दो जोड़ी तो क्या एक जोड़ी यूनीफार्म भी आना मुश्किल है।
- सतीश पाल, छात्र, कक्षा-6
अभी पुराने स्वेटर और यूूनीफार्म से काम चला रहे हैं। 11 सौ रुपये में इतना सब कुछ लेकर ब्यौरा देना कठिन काम है।
- रजनी, छात्रा, कक्षा-8ए
इतने कम रुपये सब कुछ खरीदना मुमकिन नहीं है। मिलेगा भी तो गुणवत्ता अच्छी नहीं होगी। माता-पिता प्रयास कर रहे हैं।
- संगीता, छात्रा, कक्षा-7ए
खाते में धनराशि पहुंचने पर भी अभिभावक ड्रेस, जूते और स्वेटर नहीं ले पा रहे हैं। उनका कहना है कि कम पैसे सब कुछ खरीदकर हिसाब देना मुश्किल है।
- मेघराज भाटी, जिलाध्यक्ष, शिक्षक संघ गौतमबुद्ध नगर
35 फीसदी अभिभावकों के खातों में धनराशि पहुंच गई है। कई अभिभावकों के खातों की जानकारी अपडेट की जा रही है। एक सप्ताह में सभी के खातों में धनराशि पहुंच जाएगी।
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- धर्मेंद्र सक्सेना, बीएसए, गौतमबुद्ध नगर
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वर्ष 2021-22 सत्र के लिए शासन की ओर से परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले सभी बच्चों के अभिभावकों के खाते में 11 सौ रुपये भेजने की योजना है। इसके लिए सभी स्कूलों के बच्चों के अभिभावकों से बैंक खाते का नंबर, कोड आदि लिया जाना है। वहीं, 11 सौ रुपये में दो जोड़ी यूनीफॉर्म, एक स्वेटर, एक जोड़ी जूते और बैग खरीदना है। सर्दियां शुरू हो गई है, लेकिन 50 फीसदी अभिभावकों के खातों में भी रकम नहीं पहुंच पाई है। शिक्षा विभाग के अनुसार, 35 फीसदी ही अभिभावकों के खातों तक पैसे पहुंचे हैं। बाकी 65 फीसदी इंतजार कर रहे हैं। वहीं, अभिभावकों का कहना है कि इतने पैसे में स्वेटर, जूते, बैग और यूनीफॉर्म लेना मुश्किल है।
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पिता जी के खाते में पैसे तो आ गए हैं पर 600 रुपये में दो जोड़ी तो क्या एक जोड़ी यूनीफार्म भी आना मुश्किल है।
- सतीश पाल, छात्र, कक्षा-6
अभी पुराने स्वेटर और यूूनीफार्म से काम चला रहे हैं। 11 सौ रुपये में इतना सब कुछ लेकर ब्यौरा देना कठिन काम है।
- रजनी, छात्रा, कक्षा-8ए
इतने कम रुपये सब कुछ खरीदना मुमकिन नहीं है। मिलेगा भी तो गुणवत्ता अच्छी नहीं होगी। माता-पिता प्रयास कर रहे हैं।
- संगीता, छात्रा, कक्षा-7ए
खाते में धनराशि पहुंचने पर भी अभिभावक ड्रेस, जूते और स्वेटर नहीं ले पा रहे हैं। उनका कहना है कि कम पैसे सब कुछ खरीदकर हिसाब देना मुश्किल है।
- मेघराज भाटी, जिलाध्यक्ष, शिक्षक संघ गौतमबुद्ध नगर
35 फीसदी अभिभावकों के खातों में धनराशि पहुंच गई है। कई अभिभावकों के खातों की जानकारी अपडेट की जा रही है। एक सप्ताह में सभी के खातों में धनराशि पहुंच जाएगी।
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- धर्मेंद्र सक्सेना, बीएसए, गौतमबुद्ध नगर