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पैथोलॉजी लैब मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन पर जवाब तलब
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नई दिल्ली। पैथोलॉजिकल लैब में योग्य डॉक्टर को ही रखने और अवैध रूप से चल रहे लैब के खिलाफ कार्रवाई करने के मुद्दे पर हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में पैथोलॉजिकल लैब को लेकर जो फैसला दिया था, क्या उस का अक्षरश: पालन किया गया।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल एवं न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने सरकार से सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन करने के मुद्दे पर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने सुनवाई 15 सितंबर तय की है। पीठ ने सरकार से इस मुद्दे पर अतिरिक्त हलफनामा दाखिल कर सब कुछ स्पष्ट करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि रिपोर्ट पर पैथोलॉजी में पीजी किए हुए पंजीकृत डॉक्टर का हस्ताक्षर होना अनिवार्य है।
दिल्ली सरकार की तरफ से अधिवक्ता गौतम नारायण ने कहा कि पैथोलॉजिकल रिपोर्ट पर एमबीबीएस डॉक्टर का हस्ताक्षर होना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा लैब को तीन भाग जैसे बेसिक, मीडियम व एडवांस के श्रेणी में बांटा गया है। इस बाबत नोटिस भी जारी कर दिया गया है। इसमें स्पष्ट कर दिया गया है कि मीडियम व एडवांस श्रेणी के लेबोरेटरी में पीजी किए हुए डॉक्टर का हस्ताक्षर होना अनिवार्य है। बेसिक स्तर के लैब की रिपोर्ट पर एमबीबीएस डॉक्टर हस्ताक्षर कर सकते हैं।
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इस बयान का याचिकाकर्ता के अधिवक्ता शशांक देव सुधी ने खंडन किया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर रखा है कि किसी भी तरह के लैबोरेट्री रिपोर्ट पर पीजी करने वाले डॉक्टर का ही हस्ताक्षर होना चाहिए। किसी भी बीमार आदमी का शरीर की बीमारियों का सही ढंग से पता लगाने के लिए उसका लैबोरेट्री टेस्ट होना जरूरी है। लेकिन यह स्तरीय होना चाहिए। आम आदमी की यही उम्मीद रहती है। ऐसा नहीं होना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। इसके बाद दिल्ली सरकार ने इस पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय मांग लिया।
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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल एवं न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने सरकार से सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन करने के मुद्दे पर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने सुनवाई 15 सितंबर तय की है। पीठ ने सरकार से इस मुद्दे पर अतिरिक्त हलफनामा दाखिल कर सब कुछ स्पष्ट करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि रिपोर्ट पर पैथोलॉजी में पीजी किए हुए पंजीकृत डॉक्टर का हस्ताक्षर होना अनिवार्य है।
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दिल्ली सरकार की तरफ से अधिवक्ता गौतम नारायण ने कहा कि पैथोलॉजिकल रिपोर्ट पर एमबीबीएस डॉक्टर का हस्ताक्षर होना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा लैब को तीन भाग जैसे बेसिक, मीडियम व एडवांस के श्रेणी में बांटा गया है। इस बाबत नोटिस भी जारी कर दिया गया है। इसमें स्पष्ट कर दिया गया है कि मीडियम व एडवांस श्रेणी के लेबोरेटरी में पीजी किए हुए डॉक्टर का हस्ताक्षर होना अनिवार्य है। बेसिक स्तर के लैब की रिपोर्ट पर एमबीबीएस डॉक्टर हस्ताक्षर कर सकते हैं।
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इस बयान का याचिकाकर्ता के अधिवक्ता शशांक देव सुधी ने खंडन किया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर रखा है कि किसी भी तरह के लैबोरेट्री रिपोर्ट पर पीजी करने वाले डॉक्टर का ही हस्ताक्षर होना चाहिए। किसी भी बीमार आदमी का शरीर की बीमारियों का सही ढंग से पता लगाने के लिए उसका लैबोरेट्री टेस्ट होना जरूरी है। लेकिन यह स्तरीय होना चाहिए। आम आदमी की यही उम्मीद रहती है। ऐसा नहीं होना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। इसके बाद दिल्ली सरकार ने इस पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय मांग लिया।