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वह मेरे जिगर का टुकड़ा था, नहीं पढ़ना था तो बता देता : पिता

Sat, 16 Aug 2025 09:12 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 16 Aug 2025 09:12 PM IST
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He was a piece of my heart, if he didn't want to study I should have told him: Father
वह मेरे जिगर का टुकड़ा था, नहीं पढ़ना था तो बता देता : पिता
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शारदा विश्वविद्यालय के बीटेक छात्र की आत्महत्या का मामला

माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। वह मेरे जिगर का टुकड़ा था। नहीं पढ़ना था तो बता देता। वह आखिरी बार 26 मई को घर आया था। उसने ऐसा नहीं बताया कि उसके साथ क्या हो रहा है। वह घर पर आराम से बातचीत करता रहा, कोई दिक्कत नहीं थी।
अभी 2 अगस्त को घर से विश्वविद्यालय में पढ़ाई की बात कहकर लौटा था। इससे पहले परिवार के सभी लोग वैष्णो देवी, वृंदावन भी गए थे। वहां भी कुछ ऐसा नहीं था। सब कुछ ठीक था। शिवम परिवार का इकलौता बेटा था। अगर नहीं पढ़ना था, तो वह मना कर देता। वह उनके जिगर का टुकड़ा था। यह बात कहते-कहते पिता कार्तिक चंद्र डे की आंख भर आती है। पिता ने बताया कि पुत्र विश्वविद्यालय नहीं जाता होगा, तो वो दिनभर हॉस्टल में ही रहता होगा। विश्वविद्यालय या हॉस्टल वार्डन को इस तरह की गतिविधि लगी थी, तो परिजन को फोन करके बताना चाहिए था। हॉस्टल को हर साल लाखों रुपये देते हैं। पूर्व में हॉस्टल वार्डन ने पुत्र के सही व्यवहार के बारे में जानकारी दी थी। इस तरह विश्वविद्यालय फीस लेता है, तो उसकी जिम्मेदारी बनती है कि परिजन को सूचित करें। विश्वविद्यालय प्रशासन की गलती है, उन्होंने सूचना नहीं दी। वह चाहते थे कि पुत्र पढ़ाई के बाद अच्छा इंजीनियर बनकर देश के लिए सेवा करे। साथ ही परिवार की आर्थिक स्थिति को भी और बेहतर बना सके। वहीं शिवम के मामा के बेटे शुभांकर ने बताया कि यह विश्वविद्यालय वालों की लापरवाही का नतीजा है। अगर छात्र विश्वविद्यालय नहीं आ रहा था तो बताना चाहिए था। आत्महत्या की घटना के बाद जब परिजन विश्वविद्यालय जानकारी के लिए पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि वह दो साल से विश्वविद्यालय नहीं आ रहा था जबकि फीस बराबर जा रही थी।
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पढ़ाई के लिए ले रखा था लोन
मां का कहना है कि छोटी पुत्री अभी 10वीं कक्षा में पढ़ रही है। घटना से एक घंटे पूर्व ही उससे फोन पर बात हुई थी। उसने यह बात पूछी थी कि घर पर क्या बनाया है। उस दौरान उन्हें जरा भी एहसास नहीं हुआ कि वह सुसाइड कर लेगा। पूर्व में उसने बताया था कि प्रवेश के पहले साल रैगिंग होती है। पुत्र की पढ़ाई के लिए लोन ले रखा था। विश्वविद्यालय की ओर से लगातार फीस ली जा रही थी। फीस जमा करने के उनके पास जरूरी कागज भी हैं। नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच कर रही है। वहीं घटना के बाद नाराज परिजन ने शनिवार को विश्वविद्यालय के गेट बाहर खड़े होकर यहां एडमिशन कराने के लिए आए दूसरे परिजनों को रोका।
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