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परिवार की मदद के लिए उठे हाथ, परिजनों ने मांगा न्याय
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नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर चली ‘जस्टिस फॉर सलिल त्रिपाठी’ मुहिम के बाद लोग सलिल के परिवार की मदद को आगे आए हैं। कई नामचीन लोगों की मदद के बाद बुधवार दोपहर तक सलिल की पत्नी सुचेता के बैंक अकाउंट में 9 लाख रुपये की मदद पहुंचाई जा चुकी है। कई अन्य संस्थाएं भी परिवार की मदद को आगे आई हैं। सलिल के परिजनों ने लोगों के मदद करने पर उनका शुक्रिया अदा किया है।
वहीं परिजनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत अन्य को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है। परिवार का आरोप है पुलिस सलिल को टक्कर मारने वाले सिपाही जिले सिंह को बचाने में जुटी है। हादसे के समय वह शराब के नशे में था, लेकिन दर्ज की गई एफआईआर में इसका जिक्र नहीं था। दूसरी ओर केस में देरी करने के लिए जिले सिंह के ब्लड सैंपल को एफएसएल भेजा गया है। दूसरी ओर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है। तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जिले सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है।
सलिल के चचेरे भाई राहुल त्रिपाठी ने बताया कि परिवार मूलरूप से गांव मुबारकपुर-पिकर, जिला आंबेडकर नगर, यूपी निवासी है। काफी समय पूर्व सलिल के पिता जंग बहादुर त्रिपाठी के दिल्ली के बुध विहार फेज-2 स्थित श्याम कॉलोनी में आए थे। यहां उन्होंने अपने भाई के साथ मिलकर मकान बनाया। सलिल का बड़ा भाई मनोज त्रिपाठी गांव में ही रहकर खेतीबाड़ी करता है। मां कल्याणी देवी दिल्ली में रहती हैं।
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राहुल के मुताबिक पहले लॉकडाउन में सलिल को नौकरी से निकाल दिया गया था। सलिल किंगस्वे कैंप के एक होटल में मैनेजर था। शुरुआत में इधर-उधर नौकरी करने के बाद सलिल ने जोमैटो में डिलीवरी बॉय की नौकरी शुरू की। कोरोना की दूसरी लहर में उसके पिता जंग बहादुर भी कोरोना से चल बसे। आर्थिक स्थिति खराब हुई तो सलिल के बेटे दिव्यांश को स्कूल वालों ने निकाल दिया। दिव्यांश रोहिणी सेक्टर-23 के नामी पब्लिक स्कूल में चौथी कक्षा में पढ़ता था। मजबूरन सलिल ने घर के पास ही एक छोटे से स्कूल में उसका दाखिला करा दिया था। आठ से दस घंटे मेहनत करने के बाद किसी तरह वह नौ-दस हजार रुपये कमा पाता था। सलिल की मौत के बाद उसके परिवार में अब कोई कमाने वाला नहीं है।
बेटे ने नोटबुक में हाथ से लिखी अपील, पिता के लिए मांगा इंसाफ
मासूम दिव्यांश ने अपनी स्कूल नोटबुक में अंग्रेजी में पिता को न्याय दिलाने की गुहार के अलावा मदद करने की अपील की। मामला सोशल मीडिया पर पहुंचा तो परिवार की मदद के लिए कई हाथ उठ खड़े हुए। परिवार चाहता है कि आरोपी सिपाही जिले सिंह को कड़ी से कड़ी सजा मिले। इसके अलावा सलिल की पत्नी को सरकारी नौकरी मिल जाए, जिससे परिवार का गुजारा चलता रहे।
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वहीं परिजनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत अन्य को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है। परिवार का आरोप है पुलिस सलिल को टक्कर मारने वाले सिपाही जिले सिंह को बचाने में जुटी है। हादसे के समय वह शराब के नशे में था, लेकिन दर्ज की गई एफआईआर में इसका जिक्र नहीं था। दूसरी ओर केस में देरी करने के लिए जिले सिंह के ब्लड सैंपल को एफएसएल भेजा गया है। दूसरी ओर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है। तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जिले सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है।
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सलिल के चचेरे भाई राहुल त्रिपाठी ने बताया कि परिवार मूलरूप से गांव मुबारकपुर-पिकर, जिला आंबेडकर नगर, यूपी निवासी है। काफी समय पूर्व सलिल के पिता जंग बहादुर त्रिपाठी के दिल्ली के बुध विहार फेज-2 स्थित श्याम कॉलोनी में आए थे। यहां उन्होंने अपने भाई के साथ मिलकर मकान बनाया। सलिल का बड़ा भाई मनोज त्रिपाठी गांव में ही रहकर खेतीबाड़ी करता है। मां कल्याणी देवी दिल्ली में रहती हैं।
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राहुल के मुताबिक पहले लॉकडाउन में सलिल को नौकरी से निकाल दिया गया था। सलिल किंगस्वे कैंप के एक होटल में मैनेजर था। शुरुआत में इधर-उधर नौकरी करने के बाद सलिल ने जोमैटो में डिलीवरी बॉय की नौकरी शुरू की। कोरोना की दूसरी लहर में उसके पिता जंग बहादुर भी कोरोना से चल बसे। आर्थिक स्थिति खराब हुई तो सलिल के बेटे दिव्यांश को स्कूल वालों ने निकाल दिया। दिव्यांश रोहिणी सेक्टर-23 के नामी पब्लिक स्कूल में चौथी कक्षा में पढ़ता था। मजबूरन सलिल ने घर के पास ही एक छोटे से स्कूल में उसका दाखिला करा दिया था। आठ से दस घंटे मेहनत करने के बाद किसी तरह वह नौ-दस हजार रुपये कमा पाता था। सलिल की मौत के बाद उसके परिवार में अब कोई कमाने वाला नहीं है।
बेटे ने नोटबुक में हाथ से लिखी अपील, पिता के लिए मांगा इंसाफ
मासूम दिव्यांश ने अपनी स्कूल नोटबुक में अंग्रेजी में पिता को न्याय दिलाने की गुहार के अलावा मदद करने की अपील की। मामला सोशल मीडिया पर पहुंचा तो परिवार की मदद के लिए कई हाथ उठ खड़े हुए। परिवार चाहता है कि आरोपी सिपाही जिले सिंह को कड़ी से कड़ी सजा मिले। इसके अलावा सलिल की पत्नी को सरकारी नौकरी मिल जाए, जिससे परिवार का गुजारा चलता रहे।