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Noida News: कॉल सेंटर का काला खेल, विदेशी ग्राहकों को ठगने वाला गिरोह हुआ बेनकाब
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थाना साइबर क्राइम नोएडा द्वारा टेक सर्पोट के नाम पर हेंकिंग व डाटा चोरी का भय दिखाकर विदेशी नाग
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तकनीकी मदद के नाम पर विदेशी नागरिकों के साथ करते थे ठगी
- अमेरिकी व यूरोपीय नागरिकों के साथ की जा रही थी ठगी, साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने कार्रवाई
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। तकनीकी मदद के नाम पर अमेरिकी व यूरोपीय देशों के नागरिकों के साथ ठगी करने वाले अवैध कॉल सेंटर का साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने मंगलवार को सरगना समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से लैपटॉप,मोबाइल और अन्य दस्तावेज बरामद किए गए हैं। आरोपियों ने अब तक ढाई सौ से अधिक विदेशी नागरिकों के साथ ठगी की है।
डीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने बताया कि साइबर थाने की टीम ने इनपुट के आधार पर मंगलवार को सेक्टर-76 में छापेमारी कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में पता चला कि ये लोग अवैध कॉल सेंटर चलाते हैं । गिरफ्तार आरोपियों की पहचान महेंद्र पार्क दिल्ली निवासी मोहम्मद बिलाल (28), आदर्श नगर दिल्ली निवासी देव कपाही (25) राजस्थान के अलवर तिजारा निवासी अभिषेक मुखेजा (27) और रोहिणी दिल्ली निवासी 24 वर्षीय कुशाग्र निम्बेकर के रूप में हुई है।
बिलाल गिरोह का सरगना है। पुलिस पूछताछ में पता चला कि आरोपी इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर टेक सपोर्ट के नाम से पेड विज्ञापन चलाते थे। इन विज्ञापनों में टोल-फ्री नंबर देते थे। विदेशी नागरिक लैपटॉप कंप्यूटर के लिए तकनीकी सपोर्ट के लिए इन टोल फ्री नंबर पर कॉल करते थे। कॉल आते ही आरोपी बड़ी कंपनी का टेक्निकल स्टाफ बताते थे। उसके बाद उनके कंप्यूटर या मोबाइल डिवाइस को हैक होने की बात कहकर डरा देते थे। इसके बाद ये स्क्रीन शेयरिंग ऐप के जरिए पीड़ित के सिस्टम तक पहुंच बना लेते थे और कंप्यूटर स्क्रीन को ब्लैक कर देते थे। इससे पीड़ित परेशान हो जाता था। स्क्रीन एक्सेस मिलने के बाद आरोपी पीड़ित की बैंकिंग जानकारी हासिल कर लेते थे। इसके जरिए वे खाते में मौजूद रकम का अंदाजा लगाते थे। यदि खाते में कम पैसा होता था तो 350 से दो हजार अमेरिकी डॉलर तक वसूल लेते थे। वहीं अगर खाते में अधिक राशि होती थी तो मामला तथाकथित सीनियर एजेंट को ट्रांसफर कर दिया जाता था।
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यह हुई बरामदगी : आरोपियों के पास से चार लैपटॉप, आठ मोबाइल फोन, चार माइक्रोफोन हेडफोन और दो राउटर बरामद किए हैं। इन उपकरणों के जरिए इन लोगों ने कॉल सेंटर का सेटअप तैयार कर रखा था और कहीं से भी फोन कर ठगी की वारदात को अंजाम दे रहे थे। ये आरोपी अब तक करोड़ों की ठगी कर चुके हैं। पुलिस इनसे बरामद डिजिटल डिवाइस की फॉरेंसिक जांच कराएगी।
40 हजार किराए पर चला रहे थे अवैध कॉल सेंटर : पुलिस पूछताछ में पता चला कि ये आरोपी पिछले कुछ महीने से सेक्टर-76 में अवैध कॉल सेंटर चला रहे थे। इस बिल्डिंग में कॉल सेंटर का पूरा सेटअप तैयार किया गया था। इसका किराया चालीस हजार रुपये प्रति माह था। इस गिरोह का नेटवर्क कई देशों में हैं और ये लोग कई स्थानों पर अवैध कॉल सेंटर चला चुके हैं।
क्रिप्टो करेंसी में आती है रकम : पुलिस की जांच में पता चला कि तकनीकी सहायता के नाम पर विदेशी नागरिकों से आरोपी डॉलर, गिफ्ट कूपन और क्रिप्टो करेंसी मंगवाते थे। इनके पास हवाला के माध्यम से भारतीय मुद्रा में कैश आता है। दरअसल इन आरोपियों ने कई विदेशी अकाउंट किराये पर ले रखा है। इन किराये के अकाउंट में डॉलर में पैसे ट्रांजैक्शन किए जाते हैं। फिर किराये के अकाउंट वाले अपना कमीशन काटकर भारत में हवाला के माध्यम से ऑनलाइन भेजते हैं।
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- अमेरिकी व यूरोपीय नागरिकों के साथ की जा रही थी ठगी, साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने कार्रवाई
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। तकनीकी मदद के नाम पर अमेरिकी व यूरोपीय देशों के नागरिकों के साथ ठगी करने वाले अवैध कॉल सेंटर का साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने मंगलवार को सरगना समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से लैपटॉप,मोबाइल और अन्य दस्तावेज बरामद किए गए हैं। आरोपियों ने अब तक ढाई सौ से अधिक विदेशी नागरिकों के साथ ठगी की है।
डीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने बताया कि साइबर थाने की टीम ने इनपुट के आधार पर मंगलवार को सेक्टर-76 में छापेमारी कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में पता चला कि ये लोग अवैध कॉल सेंटर चलाते हैं । गिरफ्तार आरोपियों की पहचान महेंद्र पार्क दिल्ली निवासी मोहम्मद बिलाल (28), आदर्श नगर दिल्ली निवासी देव कपाही (25) राजस्थान के अलवर तिजारा निवासी अभिषेक मुखेजा (27) और रोहिणी दिल्ली निवासी 24 वर्षीय कुशाग्र निम्बेकर के रूप में हुई है।
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बिलाल गिरोह का सरगना है। पुलिस पूछताछ में पता चला कि आरोपी इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर टेक सपोर्ट के नाम से पेड विज्ञापन चलाते थे। इन विज्ञापनों में टोल-फ्री नंबर देते थे। विदेशी नागरिक लैपटॉप कंप्यूटर के लिए तकनीकी सपोर्ट के लिए इन टोल फ्री नंबर पर कॉल करते थे। कॉल आते ही आरोपी बड़ी कंपनी का टेक्निकल स्टाफ बताते थे। उसके बाद उनके कंप्यूटर या मोबाइल डिवाइस को हैक होने की बात कहकर डरा देते थे। इसके बाद ये स्क्रीन शेयरिंग ऐप के जरिए पीड़ित के सिस्टम तक पहुंच बना लेते थे और कंप्यूटर स्क्रीन को ब्लैक कर देते थे। इससे पीड़ित परेशान हो जाता था। स्क्रीन एक्सेस मिलने के बाद आरोपी पीड़ित की बैंकिंग जानकारी हासिल कर लेते थे। इसके जरिए वे खाते में मौजूद रकम का अंदाजा लगाते थे। यदि खाते में कम पैसा होता था तो 350 से दो हजार अमेरिकी डॉलर तक वसूल लेते थे। वहीं अगर खाते में अधिक राशि होती थी तो मामला तथाकथित सीनियर एजेंट को ट्रांसफर कर दिया जाता था।
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यह हुई बरामदगी : आरोपियों के पास से चार लैपटॉप, आठ मोबाइल फोन, चार माइक्रोफोन हेडफोन और दो राउटर बरामद किए हैं। इन उपकरणों के जरिए इन लोगों ने कॉल सेंटर का सेटअप तैयार कर रखा था और कहीं से भी फोन कर ठगी की वारदात को अंजाम दे रहे थे। ये आरोपी अब तक करोड़ों की ठगी कर चुके हैं। पुलिस इनसे बरामद डिजिटल डिवाइस की फॉरेंसिक जांच कराएगी।
40 हजार किराए पर चला रहे थे अवैध कॉल सेंटर : पुलिस पूछताछ में पता चला कि ये आरोपी पिछले कुछ महीने से सेक्टर-76 में अवैध कॉल सेंटर चला रहे थे। इस बिल्डिंग में कॉल सेंटर का पूरा सेटअप तैयार किया गया था। इसका किराया चालीस हजार रुपये प्रति माह था। इस गिरोह का नेटवर्क कई देशों में हैं और ये लोग कई स्थानों पर अवैध कॉल सेंटर चला चुके हैं।
क्रिप्टो करेंसी में आती है रकम : पुलिस की जांच में पता चला कि तकनीकी सहायता के नाम पर विदेशी नागरिकों से आरोपी डॉलर, गिफ्ट कूपन और क्रिप्टो करेंसी मंगवाते थे। इनके पास हवाला के माध्यम से भारतीय मुद्रा में कैश आता है। दरअसल इन आरोपियों ने कई विदेशी अकाउंट किराये पर ले रखा है। इन किराये के अकाउंट में डॉलर में पैसे ट्रांजैक्शन किए जाते हैं। फिर किराये के अकाउंट वाले अपना कमीशन काटकर भारत में हवाला के माध्यम से ऑनलाइन भेजते हैं।

थाना साइबर क्राइम नोएडा द्वारा टेक सर्पोट के नाम पर हेंकिंग व डाटा चोरी का भय दिखाकर विदेशी नाग