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हमसे लाइसेंस बनवाओ, पैसा किस्तों में अदा करो

Fri, 19 Nov 2021 12:03 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 19 Nov 2021 12:03 AM IST
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नोएडा। सेक्टर-33 स्थित उप संभागीय परिवहन कार्यालय में अधिकारियों से अधिक बिचौलियों का बोलबाला है। जो काम कराने के बदले लोगों को विभिन्न प्रकार की सुविधाएं भी देते हैं। बिचौलियों ने विजिटिंग कार्ड पर सुविधाओं का पूरा ब्योरा दे रखा है। साथ ही लाइसेंस बनवाने के बाद तीन किस्तों में पैसा अदा करने की सुविधा भी दे रहे हैं। वहीं, अधिकारियों की लाख कोशिशों के बावजूद भी इन पर लगाम नहीं कस पा रही है। परिवहन कार्यालय में रोजाना सैकड़ों लोगों का आना-जाना होता है। भीड़ में आम जनता और कौन बिचौलियों की पहचान करना मुश्किल है। साधारण व्यक्ति की तरह ही बिचौलिये परिसर के किसी कोने में या फिर पार्किंग में खड़े वाहनों में बैठकर हर किसी पर नजर रखते हैं।
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जो कोई व्यक्ति अकेला दिखाई देता है तो उसके पास पहुंच जाते हैं। भइया, चाचा और दादा शब्दों के संबोधन से बात शुरू करते हैं और उनसे कागज आदि एकत्र कर लेते हैं। इस दौरान लोगों को आरटीओ से संबंधित सभी काम वाजिब दाम में करवाने की जानकारी दी जाती है। काम के बदले 1500 से 4000 रुपये तक वसूली की जाती है। बिचौलियों यदि किसी का लाइसेंस बनवाते हैं तो रकम तीन किस्तों में लेते हैं। पहली बार में 1000 रुपये, दूसरी बार में 1500 और आखिरी में बची हुई रकम लेते हैं। इन्होंने विजिटिंग कार्ड भी बनवा रखा है। इस पर मोटे-मोटे अक्षरों में लिखा है कि हमारे यहां ड्राइविंग लाइसेंस बनते हैं। कार्ड पर बिचौलिये का नाम और नंबर समेत जो कार्य करवाते हैैं, उसका ब्योरा रहता है।
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रकम लेकर हो जाते हैं फरार
एआरटीओ में घूमने वाले बिचौलिये फीस के अतिरिक्त अधिक रुपये लेकर काम कराने का दावा करते हैं, लेकिन वह रकम लेकर फरार हो जाते हैं। ऐसे में लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वहीं, अधिकारी भी उनकी मदद नहीं कर पाते हैं। अनुमान के तौर पर कार्यालय में रोजाना लाइसेंस, फिटनेस, आरसी के काम के लिए लगभग 300 लोग आते हैं। इनमें सेे ज्यादातर बिचौलियों के चंगुल में फंस जाते हैं। सूत्रों ने बताया कि अतिरिक्त रकम का कुछ हिस्सा विभागीय कर्मचारियों को भी जाता है।
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यह मामला संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा कुछ चल रहा है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी को कोई परेशानी होती है तो वह उनके कार्यालय में आकर मिल सकता है।
- एके पांडेय, एआरटीओ प्रशासन
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