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Noida News: रिज पर टूटेगी लैंटाना-कीकर की यारी, लहलहाएगा फलों का बाग

Mon, 10 Jul 2023 06:12 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 10 Jul 2023 06:12 PM IST
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Friendship of Lantana-Keekar will break on the ridge, the fruit garden will flourish
दिल्ली सरकार के वन विभाग ने तैयार की योजना, जानवरों को मिलेगा भोजन
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25 : हेक्टेयर जमीन पर फलदार पौधे
आशीष सिंह
नई दिल्ली। राजधानी में जैव विविधता को बढ़ावा देने के लिए मध्य रिज वन क्षेत्र में मिनी फलों का बाग विकसित किया जाएगा। यहां जामुन, गूलर से लेकर केले के पौधे लगाने की योजना है। इससे यहां रहने वाले वन्यजीवों बंदर, नीलगाय, सियार व पक्षियों के साथ अन्य जीव-जंतुओं के लिए भोजन का सहारा बनेंगे। इसके लिए वन क्षेत्र में दो जगहों को चिह्नित किया गया है, इनकी संख्या आने वाले समय में बढ़ाई जाएगी। इसके साथ ही यह फलों का बाग प्रकृति के लिए मुसीबत बन चुके विलायती कीकर और लैंटाना की घनी झाड़ियों को फैलने से रोकेगा। वन्यजीवों के लिए पानी के तालाब भी विकसित किए जाएंगे।


864 हेक्टेयर में फैला है मध्य रिज वन क्षेत्रमध्य रिज वन क्षेत्र 864 हेक्टेयर में फैला है। इसमें 450 हेक्टेयर क्षेत्र में लैंटाना व विलायती कीकर की घनी टहनियां फैली हैं। इसमें से करीब 25 हेक्टेयर जमीन से लैंटाना को हटा दिया गया है। दिल्ली वन विभाग यहां फलदार पौधे लगाने की योजना तैयार कर काम शुरू कर दिया है। इसमें वन क्षेत्र की गुणवत्ता बढ़ाई जाएगी व वन्यजीवों की आवश्यकतानुसार वन को विकसित किया जाएगा। वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इसे वन्यजीव व पक्षियों के विकास के लिए इसे तैयार किया जा रहा है। इससे यह फलों के पौधे इनके विकास में मदद करेंगे।
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कीकर से अधिक ऊंचाई वाले लगेंगे पौधे


वन विभाग के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि लैंटाना व कीकर की अजीब सी दोस्ती है। दोनों मिलकर अपने इर्द-गिर्द किसी दूसरी प्रजाति के पौधों को पनपने नहीं देते। इससे जैव विविधता में असंतुलन पैदा होता है। ऐसे में यहां कीकर से अधिक ऊंचाई वाले पौधे लगाए जाएंगे। इसमें अमलतास, ढाक, बड़, समेत कई अन्य पौधे शामिल हैं। इससे भविष्य में देशी प्रजातियों की पेड़ के रूप में अधिक घने होंगे व देशी-विदेशी पशु-पक्षी यहां की ओर आकर्षित होंगे।
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तेजी से फैलता है विलायती कीकर और लैंटाना

अरावली जैव विविधता पार्क के वैज्ञानिक इंचार्ज डॉ. एम शाह हुसैन का कहना है कि जैव विविधता के लिए मूल प्रजाति के पौधे बेहतर रहते हैं। यह पानी भी कम लेते हैं और लंबे समय तक बने रहते हैं। लैंटाना मिट्टी की उर्वरक क्षमता को घटाता है, जिससे मिट्टी में सूक्ष्म जीवों कम होते हैं। ऐसे में बाकी प्रजातियों को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचता है। वहीं, विलायती कीकर तेजी से बढ़ता है और अपने आसपास अन्य पौधों को बढ़ने नहीं देता। ऐसे में यह अन्य पौधों को नुकसान पहुंचाता है।

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वर्जन
योजना के तहत विलायती कीकर व लैंटाना को हटाकर उनके स्थान पर स्थानीय प्रजाति के फलदार पौधे लगाने की है। इससे रिज की जैव विविधता मजबूत होगी।
---नवनीत श्रीवास्तव, उप वन संरक्षक, पश्चिमी मंडल
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