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100 करोड़ का निवेश करने वाली कोरियाई कंपनी के निदेशक से धोखाधड़ी
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ग्रेटर नोएडा स्थित स्वर्ण नगरी में प्रेसवार्ता करते अधिवक्ता और कोरियाई कंपनी के निदेशक।
- फोटो : Grnoida
ग्रेटर नोएडा। ईकोटेक-1 एक्सटेंशन में 100 करोड़ का निवेश कर मोबाइल पार्ट्स बनाने वाली कोरियाई कंपनी के निदेशक से उद्योग लगाने के लिए खरीदे गए प्लॉट में धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। कोरियाई कंपनी के वकील की शिकायत और कोर्ट के आदेश पर नॉलेज पार्क थाना पुलिस ने मेसर्स ओगान इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक कविता भरतिया और ताकेश माथुर पर केस दर्ज किया है। आरोप है कि ग्रेनो प्राधिकरण का 36 लाख बकाया जमा कराए बिना ही कोरियाई नागरिक को झूठ बोलकर औद्योगिक प्लॉट बेचा गया है। कंपनी के अधिवक्ता ने प्रेसवार्ता कर इस पूरे मामले की जानकारी दी।
अधिवक्ता एमके राणा ने बताया कि कोरियाई नागरिक सेनेटेक कंपनी के निदेशक चांगयू वू ने ग्रेटर नोएडा स्थित ईकोटेक-1 एक्सटेंशन में औद्योगिक प्लॉट खरीदने के लिए 12 जून 2019 को ओगान कंपनी से अनुबंध किया था। जिसमें तय हुआ था कि अनुबंध होने तक प्लॉट पर प्राधिकरण के बकाए आदि का सभी भुगतान ओगान कंपनी को करना होगा। 16 जुलाई 2019 को यह प्लॉट ओगान कंपनी से कोरियाई कंपनी सेनेटेक के नाम ट्रांसफर हो गया। 02 अगस्त 2019 को प्लॉट की रजिस्ट्री हो गई। कोरियाई कंपनी ने प्लॉट पर निर्माण कार्य के लिए नक्शा आदि के लिए प्राधिकरण में आवेदन किया। आवेदन करने पर पता चला कि प्लॉट पर प्राधिकरण का करीब 36 लाख का (ब्याज-पेनल्टी समेत) पुराना बकाया है। आरोप है कि कोरियाई कंपनी के प्रतिनिधियों ने इस संबंध में ओगान कंपनी की निदेशक दिल्ली निवासी कविता भरतिया से संपर्क किया तो उन्होंने पैसा देने से इनकार कर दिया। इस मामले में पुलिस से भी शिकायत की गई। कोई कार्रवाई नहीं होने पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। कोर्ट के आदेश पर इस मामले में नॉलेज पार्क थाना पुलिस ने केेस दर्ज किया है।
बकाया जमा कर किया कंपनी ने काम शुरू
कोरियाई कंपनी के प्रतिनिधि ने बताया कि कंपनी ने ग्रेनो में करीब 100 करोड़ का निवेश किया है। कंपनी ने प्राधिकरण का बकाया स्वयं जमा करने के बाद 1 अप्रैल 2022 से काम शुरू कर दिया है। लेकिन अब वह अपना रुपया ओगान इंडिया के अधिकारियों ने प्राप्त करने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
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अधिवक्ता एमके राणा ने बताया कि कोरियाई नागरिक सेनेटेक कंपनी के निदेशक चांगयू वू ने ग्रेटर नोएडा स्थित ईकोटेक-1 एक्सटेंशन में औद्योगिक प्लॉट खरीदने के लिए 12 जून 2019 को ओगान कंपनी से अनुबंध किया था। जिसमें तय हुआ था कि अनुबंध होने तक प्लॉट पर प्राधिकरण के बकाए आदि का सभी भुगतान ओगान कंपनी को करना होगा। 16 जुलाई 2019 को यह प्लॉट ओगान कंपनी से कोरियाई कंपनी सेनेटेक के नाम ट्रांसफर हो गया। 02 अगस्त 2019 को प्लॉट की रजिस्ट्री हो गई। कोरियाई कंपनी ने प्लॉट पर निर्माण कार्य के लिए नक्शा आदि के लिए प्राधिकरण में आवेदन किया। आवेदन करने पर पता चला कि प्लॉट पर प्राधिकरण का करीब 36 लाख का (ब्याज-पेनल्टी समेत) पुराना बकाया है। आरोप है कि कोरियाई कंपनी के प्रतिनिधियों ने इस संबंध में ओगान कंपनी की निदेशक दिल्ली निवासी कविता भरतिया से संपर्क किया तो उन्होंने पैसा देने से इनकार कर दिया। इस मामले में पुलिस से भी शिकायत की गई। कोई कार्रवाई नहीं होने पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। कोर्ट के आदेश पर इस मामले में नॉलेज पार्क थाना पुलिस ने केेस दर्ज किया है।
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बकाया जमा कर किया कंपनी ने काम शुरू
कोरियाई कंपनी के प्रतिनिधि ने बताया कि कंपनी ने ग्रेनो में करीब 100 करोड़ का निवेश किया है। कंपनी ने प्राधिकरण का बकाया स्वयं जमा करने के बाद 1 अप्रैल 2022 से काम शुरू कर दिया है। लेकिन अब वह अपना रुपया ओगान इंडिया के अधिकारियों ने प्राप्त करने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
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