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क्रेडिट कार्ड धारक 450 लोगों से ठगी: डेढ़ से तीन रुपये में करते थे प्रति डाटा का सौदा, फर्जी कंपनी बनाकर लगाते थे चपत
Fri, 18 Jun 2021 10:55 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 18 Jun 2021 10:55 AM IST
सार
एसटीएफ नोएडा के एएसपी राजकुमार मिश्रा ने बताया कि एसबीआई कार्ड एंड पेमेंट लिमिटेड के प्रार्थना पत्र पर डीजीपी एसटीएफ ने जांच के निर्देश दिए थे। इस मामले में आगरा में केस दर्ज किया गया था। एसटीएफ ने 26 जनवरी को खुलासा करते हुए गिरोह के सरगना मूलरूप से बिहार के भागलपुर निवासी सौरभ भारद्वाज, सिकंदराऊ के आस मोहम्मद, संगम विहार दिल्ली के लखन गुप्ता व शिवम को गिरफ्तार किया था।
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पुलिस ने आरोपियों को किया गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
एसटीएफ नोएडा ने एसबीआई आदि के क्रेडिट कार्ड धारकों का निजी डाटा चोरी कर बेचने वाले गिरोह के तीन आरोपियों को दिल्ली और सूरजपुर से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में 20 हजार का इनामी संगम विहार दिल्ली निवासी एसबीआई का पूर्व टीम लीडर नदीम अहमद, कालकाजी निवासी सिद्धार्थ देवनाथ और पंजाबी बाग निवासी पुनीत लाखा शामिल हैं।
आरोपियों से 7182 उपभोक्ताओं का डाटा बरामद किया गया है। चोरी के डाटा से 450 लोगों से ठगी की जा चुकी है। गिरोह के सरगना और एक महिला समेत छह आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरोह के खिलाफ आगरा, लखनऊ आदि शहरों में धोखाधड़ी के केस दर्ज हैं।
एसटीएफ नोएडा के एएसपी राजकुमार मिश्रा ने बताया कि एसबीआई कार्ड एंड पेमेंट लिमिटेड के प्रार्थना पत्र पर डीजीपी एसटीएफ ने जांच के निर्देश दिए थे। इस मामले में आगरा में केस दर्ज किया गया था। एसटीएफ ने 26 जनवरी को खुलासा करते हुए गिरोह के सरगना मूलरूप से बिहार के भागलपुर निवासी सौरभ भारद्वाज, सिकंदराऊ के आस मोहम्मद, संगम विहार दिल्ली के लखन गुप्ता व शिवम को गिरफ्तार किया था।
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आरोपी क्रेडिट कार्ड धारकों का डाटा प्राप्त कर उन्हें अलग-अलग ढंग से ठगी का शिकार बना रहे थे। गिरोह के 25 हजार की इनामी उत्तम नगर दिल्ली निवासी शिल्पी और नांगलोई के सुलेमान को 8 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में पता चला था कि क्रेडिट कार्ड आदि बनाने वाले कर्मचारी डाटा चोरी कर उन्हें बेचते हैं। इस मामले की जांच में अब नदीम को दिल्ली स्थित उसके घर व सिद्धार्थ और पुनीत लाखा को सूरजपुर से गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों को आगरा के खैरागढ़ थाने में ले जाया गया है।
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आरोपियों से 7182 उपभोक्ताओं का डाटा बरामद किया गया है। चोरी के डाटा से 450 लोगों से ठगी की जा चुकी है। गिरोह के सरगना और एक महिला समेत छह आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरोह के खिलाफ आगरा, लखनऊ आदि शहरों में धोखाधड़ी के केस दर्ज हैं।
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एसटीएफ नोएडा के एएसपी राजकुमार मिश्रा ने बताया कि एसबीआई कार्ड एंड पेमेंट लिमिटेड के प्रार्थना पत्र पर डीजीपी एसटीएफ ने जांच के निर्देश दिए थे। इस मामले में आगरा में केस दर्ज किया गया था। एसटीएफ ने 26 जनवरी को खुलासा करते हुए गिरोह के सरगना मूलरूप से बिहार के भागलपुर निवासी सौरभ भारद्वाज, सिकंदराऊ के आस मोहम्मद, संगम विहार दिल्ली के लखन गुप्ता व शिवम को गिरफ्तार किया था।
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आरोपी क्रेडिट कार्ड धारकों का डाटा प्राप्त कर उन्हें अलग-अलग ढंग से ठगी का शिकार बना रहे थे। गिरोह के 25 हजार की इनामी उत्तम नगर दिल्ली निवासी शिल्पी और नांगलोई के सुलेमान को 8 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में पता चला था कि क्रेडिट कार्ड आदि बनाने वाले कर्मचारी डाटा चोरी कर उन्हें बेचते हैं। इस मामले की जांच में अब नदीम को दिल्ली स्थित उसके घर व सिद्धार्थ और पुनीत लाखा को सूरजपुर से गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों को आगरा के खैरागढ़ थाने में ले जाया गया है।
डेढ़ से तीन रुपये में करते थे प्रति डाटा का सौदा
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वह एक क्रेडिट कार्ड होल्डर का डाटा ठग गिरोह को डेढ़ से तीन रुपये तक में बेचते हैं। फिलहाल, आरोपियों से 7182 उपभोक्ताओं का डाटा बरामद किया गया है। इससे पहले गिरफ्तार आरोपियों से 13 हजार उपभोक्ताओं का डाटा बरामद किया जा चुका है।
ऐसे एकजुट हुए आरोपी
एसटीएफ को पूछताछ में नदीम ने बताया कि वह 12वीं पास है। वह मोनिका के साथ नौकरी करता था। वहीं, उसकी मुलाकात आस मोहम्मद से हुई और बाद में वह एसबीआई में टीम लीडर के रुप में काम करने लगा और यहीं उसकी पहचान सुलेमान से हुई। सुलेमान ही डाटा चोरी कर उसे वह मोनिका को बेचने लगा।
बाद में वह माई मनी मंत्रा कंपनी से संपर्क कर आरबीएल क्रेडिट कार्ड धारकों का डाटा एकत्रित करने लगा। इसी दौरान नदीम मनी मंत्रा के टीम लीडर सिद्धार्थ और सहायक उपाध्यक्ष पुुनीत लाखा नदीम अहमद को देने लगे। इस डाटा को आरोपी मोनिका को तीन रुपये प्रति डाटा के हिसाब से बेच देता था। मोनिका अभी फरार है। टीम उसे तलाश रही है।
फर्जी कंपनी बनाकर करते थे ठगी
गिरोह ने मर्चेंडाइज साइट बनाने के बाद प्रताप इंटरप्राइजेज, इंडिया शापी लाइट और शिव इंटरप्राइजेज नाम से कंपनी बना ली। सरगना सौरभ भारद्वाज पहले आशु के संपर्क में आया फिर आशु ने पड़ोसी शिवम और लखन को भी जोड़ लिया। आरोपी ग्राहकों को कॉल कर फर्जी साइट पर शॉपिंग का झांसा देकर ओटीपी आदि हासिल कर लेता था। क्रेडिट कार्ड से शॉपिंग की रकम प्रताप इंटरप्राइजेज के खाते में जाती थी। जिसे यह तुरंत निकाल लेते थे। खाते से रकम पार करके इसके खाते में ट्रांसफर कर देते थे।
ऐसे एकजुट हुए आरोपी
एसटीएफ को पूछताछ में नदीम ने बताया कि वह 12वीं पास है। वह मोनिका के साथ नौकरी करता था। वहीं, उसकी मुलाकात आस मोहम्मद से हुई और बाद में वह एसबीआई में टीम लीडर के रुप में काम करने लगा और यहीं उसकी पहचान सुलेमान से हुई। सुलेमान ही डाटा चोरी कर उसे वह मोनिका को बेचने लगा।
बाद में वह माई मनी मंत्रा कंपनी से संपर्क कर आरबीएल क्रेडिट कार्ड धारकों का डाटा एकत्रित करने लगा। इसी दौरान नदीम मनी मंत्रा के टीम लीडर सिद्धार्थ और सहायक उपाध्यक्ष पुुनीत लाखा नदीम अहमद को देने लगे। इस डाटा को आरोपी मोनिका को तीन रुपये प्रति डाटा के हिसाब से बेच देता था। मोनिका अभी फरार है। टीम उसे तलाश रही है।
फर्जी कंपनी बनाकर करते थे ठगी
गिरोह ने मर्चेंडाइज साइट बनाने के बाद प्रताप इंटरप्राइजेज, इंडिया शापी लाइट और शिव इंटरप्राइजेज नाम से कंपनी बना ली। सरगना सौरभ भारद्वाज पहले आशु के संपर्क में आया फिर आशु ने पड़ोसी शिवम और लखन को भी जोड़ लिया। आरोपी ग्राहकों को कॉल कर फर्जी साइट पर शॉपिंग का झांसा देकर ओटीपी आदि हासिल कर लेता था। क्रेडिट कार्ड से शॉपिंग की रकम प्रताप इंटरप्राइजेज के खाते में जाती थी। जिसे यह तुरंत निकाल लेते थे। खाते से रकम पार करके इसके खाते में ट्रांसफर कर देते थे।