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ऑपरेशन क्लीन- 15: नहीं चलेगी बाउंसरों की दबंगई, तीन सिक्योरिटी एजेंसियों पर मुकदमा दर्ज
Wed, 17 Jul 2019 05:40 AM IST
नोएडा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, नोएडा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, नोएडा
Published by: नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 17 Jul 2019 05:40 AM IST
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पुलिस द्वारा पकडे़ गए बाउंसर
- फोटो : Amar Ujala
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जनपद को साफ और सुरक्षित रखने के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन क्लीन के तहत सोसायटी में अवैध रूप से काम करने वाले बाउंसरों के खिलाफ अभियान चलाया गया। सोमवार शाम को ऑपरेशन क्लीन-15 के तहत जनपद की 215 सोसायटियों में पुलिस ने चेकिंग की। 18 सोसायटियों में से 36 बाउंसरों को थाने लाया गया। इन बाउंसरों को फटकार और हिदायत देकर छोड़ दिया गया। वहीं, तीन सिक्योरिटी एजेंसियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
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जनपद की बड़ी आबादी सोसायटियों में रहती है और इनमें बिल्डर ने अवैध रूप से सुरक्षा के नाम पर बाउंसर रखे हुए हैं। ये बाउंसर सुरक्षा के नाम पर कुछ नहीं करते हैं और सोसायटी के लोगों से ही अच्छा व्यवहार भी नहीं करते हैं। बाउंसरों की दबंगई की लगातार शिकायत एसएसपी को मिल रही थीं। इसके बाद सोमवार शाम पांच बजे से लेकर रात आठ बजे तक अभियान चलाया गया।
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एसएसपी वैभव कृष्ण ने बताया कि तीन घंटे में पुलिस की टीम ने 215 जगह चेकिंग की। 18 सोसायटी में 36 बाउंसर ऐेसे मिले जो निजी सिक्योरिटी एजेंसी रेगुलेशन एक्ट 2005 के अनुरूप नहीं पाए गए। इन सभी को थाने ले जाया गया। वहां पुलिस ने निर्धारित वर्दी पहनने और सोसायटी के लोगों के साथ संयमित व्यवहार करने की चेतावनी दी। साथ ही, चेकिंग के दौरान तीन ऐसी सिक्योरिटी एजेंसियों का पता चला जो निजी सिक्योरिटी एजेंसी रेगुलेशन एक्ट 2005 के तहत निबंधित नहीं है।
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सेक्टर-82 स्थित ग्रुप एक्समैन सिक्योरिटी एजेंसी और सेक्टर-92 स्थित गोल्डन मेट्रो एंड फैसिलिटी सिक्योरिटी एजेंसी के खिलाफ कोतवाली फेज टू में मुकदमा दर्ज किया गया है। वहीं, जीटा वन, ग्रेटर नोएडा स्थित एवीजे हाइट्स सिक्योरिटी एजेंसी के खिलाफ कोतवाली सूरजपुर में मुकदमा दर्ज किया गया है।
यह है सिक्योरिटी एजेंसी रेगुलेशन एक्ट 2005
सिक्योरिटी एजेंसी संचालकों के लिए वर्ष 2005 में प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी रेगुलेशन एक्ट बनाया गया था। इसमें सिक्योरिटी एजेंसी चलाने वालों के लिए मानक तय किए गए थे। गार्डों की पूरी तरह से ट्रेनिंग से लेकर उपकरणों के बारे में तय दिशा निर्देश बनाए गए थे। किसी भी सिक्योरिटी एजेंसी के लिए इस रेगुलेशन एक्ट के मानकों को पूरा करना आवश्यक है।
स्टेटस सिंबल बन गया है बाउंसर
नोएडा-एनसीआर में बाउंसर स्टेटस सिंबल हैं। पहले होटल, पब, बार आदि में सुरक्षा के लिए बाउंसर रखे जाते थे, लेकिन धीरे-धीरे पैसे वाले लोग अपने साथ पीएसओ के रूप में बाउंसरों को रखने लगे। इसके बाद जब नोएडा में हाईराइज सोसायटी बनी तो बिल्डर सोसायटी के अंदर भी बाउंसर को रखने लगे।
सोसायटी में रौब झाड़ते हैं बाउंसर
कहने के लिए तो सोसायटी के अंदर सुरक्षा के नाम पर बाउंसर रखे जाते हैं, लेकिन धरातल पर बाउंसर के काम कुछ अलग ही हैं। दरअसल, बाउंसर सोसायटी के अंदर रहने वाले लोगों के साथ दबंगई दिखाते हैं। अगर कोई रेजिडेंट किसी समस्या के संबंध में बिल्डर से सवाल करता है तो ये बाउंसर उनके साथ बदसलूकी करते हैं। हाल में ही कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिसमें बिल्डरों ने रेजिडेंट के साथ मारपीट की है।
20 से 50 हजार तक वेतन होता है बाउंसर का
नोएडा में काम करने वाले बाउंसरों की औसत सैलरी बीस हजार रुपये प्रति माह है। बाउंसरों की सैलरी उनकी कद काठी व लंबाई के अनुसार भी होती है। नोएडा में बीस से पचास हजार रुपये तक के वेतन वाले बाउंसर काम कर रहे हैं। नोएडा में करीब 100 से अधिक ऐसी एजेंसियां हैं जो बाउंसर उपलब्ध कराते हैं।