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बकरीद
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नगीना। विश्वविख्यात बकरा मंडी मुंबई में इस बार सुल्तान-तोतापरी नहीं बल्कि सिकंदर और शाहरुख की भारी डिमांड है। इसी वजह से मेवात क्षेत्र के बकरा पालकों ने अपने बकरों को शाहरुख और सिकंदर का नाम देकर परवरिश की है ताकि उन्हें महंगे दाम मिलें। मुबंई में सोमवार को बदरपुर निवासी इरशाद का बकरा सिकंदर 68 हजार रुपये में खरीदा गया। उनके साथ शरीफ, नब्बू खान आदि के बकरे 36 हजार से 42 हजार रुपये के बीच बेचे गए हैं। बकरों की विक्री के लिए मुंबई की मंडी दुनियाभर में अव्वल मानी जाती है। अरब देशों से आने वाले व्यापारी मोटी रकम देकर बकरों की खरीदारी करके ले जाते है।
ऊंची कीमत मिलने से मेवात के बहुत से लोगों ने इसे बड़े व्यापार के रूप में अपनाया है। साल भर बकरे पालने के बाद इन्हें बकरीद से पहले मुंबई की मंडी में भेजना शुरू कर चुके है।
इस्लामिक संगठन मुसलमानों को गाय की कुर्बानी से परहेज करने की हिदायत दे चुके हैं। बुधवार 21 जुलाई को ईद उल जुहा (बकरीद) मनाया जाएगा। 21, 22 और 23 जुलाई शाम 5 बजे तक बकरे समेत अन्य पशुओं की कुर्बानियां होंगी।
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कद, वजन और रंग से लाखों में पहुंचते दाम
मेवात क्षेत्र के नूंह, पलवल, फरीदाबाद, गुरुग्राम, रेवाड़ी, अलवर, भरतपुर जिलों से करीब 4-5 लाख बकरे विक्री के लिए मुंबई की बकरा मंडी भेजे जाते हैं। बकरा पालकों की मानें तो बकरे के दाम उनकी कद काठी, वजन और रंग की वजह से लाखों तक पहुंच जाती है। आमतौर पर एक बकरा बकरीद से एक महीने पहले 10 से 15 हजार रुपये के बीच बिकता है। कीमतें 15 से 20 हजार हो चुकी है। कई बकरे तो 50 हजार रुपये से अधिक में बिके हैं।
एक बकरे पर 7 हजार तक का खर्चा
बदरपुर के बकरा पालक दीन मोहम्मद, हाजी सिराज बताते हैं कि बकरों को ट्रक में भरकर मुंबई ले जाने का खर्चा 50 से 70 हजार रुपये आता है। एक ट्रक में करीब 40-45 बकरे आ जाते है। पालन पोषण से लेकर मुंबई ले जाने में एक बकरे पर 7 हजार रुपये का खर्चा आ जाता है। मेवात के बकरों की अरब देशों में ज्यादा मांग है। निकटवर्ती गांव घागस, कंसाली, कोटला, मेवली, मोहम्मदपुर, भोंड़, रेहणा, बीवां, रीठठ, बदरपुर, रहपुवा अरावाली से सटे हैं इसलिए बकरों के पालन पोषण में खर्चा भी कम आता है।
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ऊंची कीमत मिलने से मेवात के बहुत से लोगों ने इसे बड़े व्यापार के रूप में अपनाया है। साल भर बकरे पालने के बाद इन्हें बकरीद से पहले मुंबई की मंडी में भेजना शुरू कर चुके है।
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इस्लामिक संगठन मुसलमानों को गाय की कुर्बानी से परहेज करने की हिदायत दे चुके हैं। बुधवार 21 जुलाई को ईद उल जुहा (बकरीद) मनाया जाएगा। 21, 22 और 23 जुलाई शाम 5 बजे तक बकरे समेत अन्य पशुओं की कुर्बानियां होंगी।
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कद, वजन और रंग से लाखों में पहुंचते दाम
मेवात क्षेत्र के नूंह, पलवल, फरीदाबाद, गुरुग्राम, रेवाड़ी, अलवर, भरतपुर जिलों से करीब 4-5 लाख बकरे विक्री के लिए मुंबई की बकरा मंडी भेजे जाते हैं। बकरा पालकों की मानें तो बकरे के दाम उनकी कद काठी, वजन और रंग की वजह से लाखों तक पहुंच जाती है। आमतौर पर एक बकरा बकरीद से एक महीने पहले 10 से 15 हजार रुपये के बीच बिकता है। कीमतें 15 से 20 हजार हो चुकी है। कई बकरे तो 50 हजार रुपये से अधिक में बिके हैं।
एक बकरे पर 7 हजार तक का खर्चा
बदरपुर के बकरा पालक दीन मोहम्मद, हाजी सिराज बताते हैं कि बकरों को ट्रक में भरकर मुंबई ले जाने का खर्चा 50 से 70 हजार रुपये आता है। एक ट्रक में करीब 40-45 बकरे आ जाते है। पालन पोषण से लेकर मुंबई ले जाने में एक बकरे पर 7 हजार रुपये का खर्चा आ जाता है। मेवात के बकरों की अरब देशों में ज्यादा मांग है। निकटवर्ती गांव घागस, कंसाली, कोटला, मेवली, मोहम्मदपुर, भोंड़, रेहणा, बीवां, रीठठ, बदरपुर, रहपुवा अरावाली से सटे हैं इसलिए बकरों के पालन पोषण में खर्चा भी कम आता है।