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थाने से बांटी गई खाद
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पुन्हाना/पिनगवां। नूंह जिला में डीएपी खाद की समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। जिसकी वजह से किसान बेहद परेशान हैं। सोमवार को भी पुलिस थाने में पुलिस की मौजूदगी में किसानों को करीब 500 खाद के कट्टे बांटे गए। किसानों का आरोप है कि सरकार खाद के नाम पर उनको बेवजह परेशान कर रही है।
कृषि अधिकारी अभय राम ने बताया कि सोमवार को रवि खाद भंडार पिनगवां में आये 500 डीएपी खाद के किसानों को कट्टे बांटे गए। उन्होंने बताया कि किसानों की भीड़ को देखते हुए पिनगवां थाने ।के पुलिस की मौजूदगी में किसानों को खाद के कट्टों की पर्ची काटी गई और बाद में रवि खाद भंडार से किसानों को खाद दिया गया। उन्होंने बताया उन्हें जहां खाद बांटने में परेशानी होती है वहां पुलिस थाने में किसानों की पर्ची काटते हैं और जहां किसान तसल्ली से खाद लेते हैं तो मौके पर ही पर्ची काट कर किसानों को खाद दे दी जाती हैं।
किसान तौफीक, असलम, इब्राहीम का कहना है कि बिना खाद के मेवात के किसानों को भारी परेशानी हो रही है। सरसों की बिजाई का समय निकलता जा रहा है अगर जल्दी ही खाद नहीं मिला तो वह सरसों की बिजाई से वंचित रह जाएंगे। किसानों का कहना है कि उनके इलाके में पानी की कमी की वजह से वे सरसों की बिजाई करते हैं अगर समय पर खाद नहीं मिली तो वह ने तो सरसों की बिजाई कर सकेंगे और न ही गेहूं की बुवाई कर सकते है। किसानों का कहना है कि गेहूं की खेती करने पर उनके करीब 20 हज़ार प्रति एकड़ खर्चा आ जाता है इसलिए व गेंहू की जगह खेतों में सरसों की बिजाई करते है।
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कृषि अधिकारी अभय राम ने बताया कि सोमवार को रवि खाद भंडार पिनगवां में आये 500 डीएपी खाद के किसानों को कट्टे बांटे गए। उन्होंने बताया कि किसानों की भीड़ को देखते हुए पिनगवां थाने ।के पुलिस की मौजूदगी में किसानों को खाद के कट्टों की पर्ची काटी गई और बाद में रवि खाद भंडार से किसानों को खाद दिया गया। उन्होंने बताया उन्हें जहां खाद बांटने में परेशानी होती है वहां पुलिस थाने में किसानों की पर्ची काटते हैं और जहां किसान तसल्ली से खाद लेते हैं तो मौके पर ही पर्ची काट कर किसानों को खाद दे दी जाती हैं।
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किसान तौफीक, असलम, इब्राहीम का कहना है कि बिना खाद के मेवात के किसानों को भारी परेशानी हो रही है। सरसों की बिजाई का समय निकलता जा रहा है अगर जल्दी ही खाद नहीं मिला तो वह सरसों की बिजाई से वंचित रह जाएंगे। किसानों का कहना है कि उनके इलाके में पानी की कमी की वजह से वे सरसों की बिजाई करते हैं अगर समय पर खाद नहीं मिली तो वह ने तो सरसों की बिजाई कर सकेंगे और न ही गेहूं की बुवाई कर सकते है। किसानों का कहना है कि गेहूं की खेती करने पर उनके करीब 20 हज़ार प्रति एकड़ खर्चा आ जाता है इसलिए व गेंहू की जगह खेतों में सरसों की बिजाई करते है।
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