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Noida News: दिल्ली हादसे के बाद ग्रेटर नोएडा में भी कमजोर मकानों का खौफ
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फोटो-
कम किराए के लिए परिवार जोखिम उठाने को मजबूर।
ग्रेटर नोएडा। दिल्ली के शांति निकेतन पीजी के बाद सीमापुरी में हुए हादसे ने जर्जर और कमजोर मकानों में रहने वाले परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रेटर नोएडा के कई इलाकों में भी ऐसे मकान नजर आते हैं, जिनकी दीवारों और छतों पर दरारें हैं। कहीं प्लास्टर झड़ रहा है तो कहीं पुरानी दीवारें सहारे के भरोसे खड़ी दिखाई देती हैं। इसके बावजूद कम किराए की मजबूरी में परिवार इन्हीं मकानों में रहने को विवश हैं।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि इन मकानों में रहने वाले लोगों के पास अक्सर सुरक्षित आवास का विकल्प नहीं होता। नौकरीपेशा, मजदूर और दूसरे राज्यों से आकर बसे परिवारों के लिए कम किराए वाला कमरा ही प्राथमिकता बन जाता है। दिल्ली के हादसों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या प्रशासन की नजर कमजोर भवनों पर हादसे के बाद जाती है?
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मैं अपने परिवार के साथ किराए के मकान में रहकर पढ़ाई करता हूँ। पहले कम किराए के कारण पुराने मकान में रहते थे, अब घर बदल लिया है। दिल्ली हादसे ने हमें डरा दिया था। अभिषेक, विद्यार्थी
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-शांति निकेतन के बाद सीमापुरी हादसे ने हमें डरा दिया है। ग्रेटर नोएडा में भी ऐसी घटनाओं से बचने के लिए पुरानी इमारतों पर ध्यान देना जरूरी है। शिवम, विद्यार्थी ब्यूरो
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कम किराए के लिए परिवार जोखिम उठाने को मजबूर।
ग्रेटर नोएडा। दिल्ली के शांति निकेतन पीजी के बाद सीमापुरी में हुए हादसे ने जर्जर और कमजोर मकानों में रहने वाले परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रेटर नोएडा के कई इलाकों में भी ऐसे मकान नजर आते हैं, जिनकी दीवारों और छतों पर दरारें हैं। कहीं प्लास्टर झड़ रहा है तो कहीं पुरानी दीवारें सहारे के भरोसे खड़ी दिखाई देती हैं। इसके बावजूद कम किराए की मजबूरी में परिवार इन्हीं मकानों में रहने को विवश हैं।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि इन मकानों में रहने वाले लोगों के पास अक्सर सुरक्षित आवास का विकल्प नहीं होता। नौकरीपेशा, मजदूर और दूसरे राज्यों से आकर बसे परिवारों के लिए कम किराए वाला कमरा ही प्राथमिकता बन जाता है। दिल्ली के हादसों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या प्रशासन की नजर कमजोर भवनों पर हादसे के बाद जाती है?
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मैं अपने परिवार के साथ किराए के मकान में रहकर पढ़ाई करता हूँ। पहले कम किराए के कारण पुराने मकान में रहते थे, अब घर बदल लिया है। दिल्ली हादसे ने हमें डरा दिया था। अभिषेक, विद्यार्थी
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-शांति निकेतन के बाद सीमापुरी हादसे ने हमें डरा दिया है। ग्रेटर नोएडा में भी ऐसी घटनाओं से बचने के लिए पुरानी इमारतों पर ध्यान देना जरूरी है। शिवम, विद्यार्थी ब्यूरो