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Noida News: पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी पति की जमानत अर्जी खारिज
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(अदालत से)
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सत्र अदालत ने नोएडा की एमिटी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर पद पर कार्यरत महिला की आत्महत्या के मामले में उसके पति प्रशांत सिवाच की जमानत अर्जी खारिज कर दी। मामला थाना सेक्टर 39 नोएडा में दर्ज अपराध से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार वादिनी रीता खन्ना ने 21 जुलाई 2026 को रिपोर्ट दर्ज कराई कि उनकी छोटी बहन शैली डुग्गल 20 जुलाई को अपने फ्लैट में मृत पाई गईं। शव पंखे से लटका मिला था।
आरोपी पति ने पत्नी के रहते दूसरी शादी कर ली थी, जिसका पता शैली को शादी के कुछ समय बाद चला। आरोपी शैली पर तलाक के लिए दबाव बना मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था। वहीं अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि मृतका ने अपनी मृत्यु से पूर्व दो पन्नों से अधिक का एक सुसाइड नोट छोड़ा था। जिसमें उसने स्पष्ट रूप से लिखा है कि उसकी आत्महत्या के लिए केवल और केवल उसका पति प्रशांत सिवाच जिम्मेदार है।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है। वह घटना के समय रोहतक में अपनी 86 वर्षीय बीमार मां की देखभाल में था और पत्नी को हर माह 32 हजार रुपये भरण-पोषण दे रहा था। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सत्र अदालत ने नोएडा की एमिटी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर पद पर कार्यरत महिला की आत्महत्या के मामले में उसके पति प्रशांत सिवाच की जमानत अर्जी खारिज कर दी। मामला थाना सेक्टर 39 नोएडा में दर्ज अपराध से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार वादिनी रीता खन्ना ने 21 जुलाई 2026 को रिपोर्ट दर्ज कराई कि उनकी छोटी बहन शैली डुग्गल 20 जुलाई को अपने फ्लैट में मृत पाई गईं। शव पंखे से लटका मिला था।
आरोपी पति ने पत्नी के रहते दूसरी शादी कर ली थी, जिसका पता शैली को शादी के कुछ समय बाद चला। आरोपी शैली पर तलाक के लिए दबाव बना मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था। वहीं अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि मृतका ने अपनी मृत्यु से पूर्व दो पन्नों से अधिक का एक सुसाइड नोट छोड़ा था। जिसमें उसने स्पष्ट रूप से लिखा है कि उसकी आत्महत्या के लिए केवल और केवल उसका पति प्रशांत सिवाच जिम्मेदार है।
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बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है। वह घटना के समय रोहतक में अपनी 86 वर्षीय बीमार मां की देखभाल में था और पत्नी को हर माह 32 हजार रुपये भरण-पोषण दे रहा था। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी।
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