{"_id":"5f5bb80f8ebc3e213c2aa871","slug":"farmers-not-getting-benefits-of-government-schemes-mewat-news-noi5356224102","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसानों को नहीं मिल रहा योजनाओं का लाभ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसानों को नहीं मिल रहा योजनाओं का लाभ
विज्ञापन
पुन्हाना। नूंह कृषि प्रधान जिला है। यहां के 90 फीसदी लोग कृषि से ही आजीविका चलाते हैं, लेकिन सरकारों की लापरवाही और अनदेखी के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना उनके लिए दूर की कौड़ी है। क्षेत्र के किसान आर्थिक तौर पर मजबूत नहीं हैं। जिले के 443 गांवों मेें सुविधा देने के लिए सरकार ने अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए 90 पद मंजूर किए गए हैं, लेकिन उनमें से 61 पद वर्षों से खाली पडे़ हैं।
ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसानों को सुविधाओं का लाभ कैसे मिल पा रहा होगा। यहां तक कि कृषि विभाग के पास अपना कार्यालय भी नहीं है। 2005 में नूंह जिला बना था तभी से यहां 90 फीसदी पद खाली हैं। सरकारों ने जिला का नाम तो बदला लेकिन कृषि विभाग की हालत में सुधार नहीं किया। कृषि विभाग में कुल 90 पद स्वीकृत हैं। इनमें से फिलहाल डिप्टी डायरेक्टर का एक, एसडीओ का एक, बीएओ के दो, एडीओ के 33, क्वालिटी कंट्रोल इंस्पेक्टर का एक, सहायक सांख्यिकी का एक, एपीपी का एक, भूमि परीक्षण अधिकारी का एक, टेक्निकल असिस्टेंट का एक और चतुर्थ श्रेणी के सात पदों सहित कुल 61 पद खाली हैं। जिले में एडीओ के कुल 37 पर मंजूर किए गए हैं जिनमें से 32 पद खाली हैं।
अधिकारियों की कमी होने की वजह से किसानों को खाद-बीज की उचित जानकारी नहीं मिल पाती है। साथ ही जिले का आंकड़ा भी ठीक तरीके से इकट्ठा नहीं हो पाता है। महत्वपूर्ण पदों का अतिरिक्त चार्ज गुरुग्राम और रेवाड़ी के अधिकारियों को दे रखा है जो कभी-कभार ही जिले में आते हैं।
विज्ञापन
रिक्त पदों के बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। अधिकारियों की कमी होने की वजह से कई किसानों को परेशानी होती है। किसानों को कोई दिक्कत नहीं हो इसके लिए एक-एक अधिकारी को कई जिम्मेदारी दी गई है। - महाबीर सिंह, डिप्टी डायरेक्टर, कृषि विभाग
जिले के अधिकतर किसान अनपढ़ हैं, जब भी फसलों में कीट लगने से परेशानी होती है तो निजी डॉक्टरों से सहायता लेनी पड़ती है। कृषि विभाग में अधिकारियों की कमी होने की वजह से दिक्कत होती है। - हुक्कड़, सरपंच, गुलालता
कृषि विभाग में अधिकारियों की कमी से यहां के किसानों को दवाई के बारे में पता नहीं चलता है। अगर यहां पर कृषि अधिकारी होंगे तो वे जानकारी देकर किसानों की मदद कर सकते हैं।
- उमर दराज, किसान टूंडलाका
सरकार की ओर से किसानों के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही है, लेकिन कृषि अधिकारियों की कमी होने की वजह से सभी योजनाओं का लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है। - नबाब खां किसान, गुबराड़ी
विज्ञापन
ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसानों को सुविधाओं का लाभ कैसे मिल पा रहा होगा। यहां तक कि कृषि विभाग के पास अपना कार्यालय भी नहीं है। 2005 में नूंह जिला बना था तभी से यहां 90 फीसदी पद खाली हैं। सरकारों ने जिला का नाम तो बदला लेकिन कृषि विभाग की हालत में सुधार नहीं किया। कृषि विभाग में कुल 90 पद स्वीकृत हैं। इनमें से फिलहाल डिप्टी डायरेक्टर का एक, एसडीओ का एक, बीएओ के दो, एडीओ के 33, क्वालिटी कंट्रोल इंस्पेक्टर का एक, सहायक सांख्यिकी का एक, एपीपी का एक, भूमि परीक्षण अधिकारी का एक, टेक्निकल असिस्टेंट का एक और चतुर्थ श्रेणी के सात पदों सहित कुल 61 पद खाली हैं। जिले में एडीओ के कुल 37 पर मंजूर किए गए हैं जिनमें से 32 पद खाली हैं।
विज्ञापन
अधिकारियों की कमी होने की वजह से किसानों को खाद-बीज की उचित जानकारी नहीं मिल पाती है। साथ ही जिले का आंकड़ा भी ठीक तरीके से इकट्ठा नहीं हो पाता है। महत्वपूर्ण पदों का अतिरिक्त चार्ज गुरुग्राम और रेवाड़ी के अधिकारियों को दे रखा है जो कभी-कभार ही जिले में आते हैं।
विज्ञापन
रिक्त पदों के बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। अधिकारियों की कमी होने की वजह से कई किसानों को परेशानी होती है। किसानों को कोई दिक्कत नहीं हो इसके लिए एक-एक अधिकारी को कई जिम्मेदारी दी गई है। - महाबीर सिंह, डिप्टी डायरेक्टर, कृषि विभाग
जिले के अधिकतर किसान अनपढ़ हैं, जब भी फसलों में कीट लगने से परेशानी होती है तो निजी डॉक्टरों से सहायता लेनी पड़ती है। कृषि विभाग में अधिकारियों की कमी होने की वजह से दिक्कत होती है। - हुक्कड़, सरपंच, गुलालता
कृषि विभाग में अधिकारियों की कमी से यहां के किसानों को दवाई के बारे में पता नहीं चलता है। अगर यहां पर कृषि अधिकारी होंगे तो वे जानकारी देकर किसानों की मदद कर सकते हैं।
- उमर दराज, किसान टूंडलाका
सरकार की ओर से किसानों के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही है, लेकिन कृषि अधिकारियों की कमी होने की वजह से सभी योजनाओं का लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है। - नबाब खां किसान, गुबराड़ी