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Noida News: कटान तेज, जमीन व घर निशाने पर
Sat, 13 Sep 2025 12:17 AM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
Updated Sat, 13 Sep 2025 12:17 AM IST
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तंबौर क्षेत्र में कटान करती शारदा नदी।
रामपुर मथुरा (सीतापुर)। सरयू नदी का जलस्तर शुक्रवार को स्थिर रहा। अंगरौरा के पास लगे मीटर गेज पर जलस्तर 117.80 मीटर दर्ज किया गया। जलस्तर कम होने से अब ग्रामीणों को बाढ़ का खतरा कम होता दिखाई दे रहा है। वहीं कटान बढ़ने से तटवर्ती गांव लोधनपुरवा, नवीन रामरूपपुरवा व सुंदरपुरवा के ग्रामीण चिंतित हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ का पानी केवल फसल व कुछ गृहस्थी का नुकसान करता है, लेकिन कटान से आशियाना व जीविकोपार्जन के सारे साधन नष्ट हो जाते हैं। जिनको दोबारा बनाने में पूरी पीढ़ी गुजर जाती है। बीती रात तेज हुई कटान में जमीन व घर निशाने पर आ गए हैं।
इसी गांव के रविंद्र ने बताया कि उनकी करीब एक बीघा जमीन, प्रकाश की आधा बीघा, मौजीलाल की आधा बीघा व बिसंभर की 15 बिस्वा जमीन नदी में कट गई है। ललतू ने बताया कि उनका प्रधानमंत्री आवास कटान की जद में है। अगर इसी तरह कटान होता रहा तो एक-दो दिन में पूरा घर नदी में समा जाएगा।
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गैस सिलिंडर व माह में दो बार राशन दिलवाने की हो व्यवस्था
तटवर्ती गांव जगरूपपुरवा, निरंजन पुरवा, कनरखी, सोतीपुरवा, गोमती पुरवा, सुंदर पुरवा, लोधन पुरवा, बाबा कुटी, अंगरौरा व प्यारे पुरवा से बाढ़ का पानी पूरी तरह से निकल गया है। सुंदरपुरवा, लोधनपुरवा गांव के पीड़ित राकेश, ललतु आदि ने कहा कि निशुल्क गैस सिलिंडर व माह में उचित दर की दुकान से दो बार राशन दिलवाने की व्यवस्था कर दी जाए, ताकि जीविका चल सके। हालांकि जानवरों के चारे का बड़ा संकट खड़ा है। एक बार मिला 50 किलो भूसा तो चार दिन में खत्म हो गया है। बेनीराम ने बताया कि बाढ़ के कारण सारी घास भी सूख गई है। जानवरों के जीवन के लिए अब कोई उपाय नहीं है। प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए।
कराया जा रहा सर्वे
सरयू का जलस्तर कम हो गया है। बाढ़ के समय भूसा व राशन किट आदि का वितरण कराया गया था। इस समय कटान लगभग बंद है। जमीन की जो भी मामूली कटान हुई है उसका सर्वे करवाया जा रहा है। - अनिल कुमार, तहसीलदार महमूदाबाद
नदी से 10 मीटर के फासले पर लखनीपुर के पांच घर
तंबौर (सीतापुर)। शारदा नदी का पानी लगातार कम हो रहा है। लखनीपुर गांव में सिंचाई विभाग द्वारा बचाव कार्य में लाई गई तेजी का भी असर देखने को मिला है। शुक्रवार को कटान की गति कम हुई है। हालांकि लखनीपुर के पांच घरों और नदी के बीच 10 मीटर का ही फासला बचा है।
शारदा नदी के किनारे पर रहने वाले राम भूखन, गजराज, खुशीराम, परागी और राजकिशोर के घर पर मंडराने वाला कटान का संकट अभी थमा नजर आ रहा है। सिंचाई विभाग द्वारा बंबू क्रेट में ईसी बैग लगाकर बोरियों को नदी किनारे डाला जा रहा है। शुक्रवार को सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता विशाल पोरवाल और सहायक अभियंता पुष्कर वर्मा लखनीपुर गांव पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की। ग्रामीणों को बताया कि किसी भी दशा में आबादी क्षेत्र प्रभावित होने नहीं दिया जाएगा। अधिशासी अभियंता ने निरीक्षण के दौरान कर्मचारियों को तीव्रगति से कार्य कराने के लिए निर्देशित किया। सिंचाई विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा शारदा नदी के तटवर्ती गांवों का लगातार भ्रमण किया जा रहा है।
शारदा नदी का जलस्तर 134.90 मीटर है जो कि खतरे निशान से 59 सेंटीमीटर नीचे है। घाघरा नदी का जलस्तर 135.15 मीटर है, जो कि खतरे के निशान से 113 सेंटीमीटर नीचे है। - विशाल पोरवाल अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग।
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ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ का पानी केवल फसल व कुछ गृहस्थी का नुकसान करता है, लेकिन कटान से आशियाना व जीविकोपार्जन के सारे साधन नष्ट हो जाते हैं। जिनको दोबारा बनाने में पूरी पीढ़ी गुजर जाती है। बीती रात तेज हुई कटान में जमीन व घर निशाने पर आ गए हैं।
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इसी गांव के रविंद्र ने बताया कि उनकी करीब एक बीघा जमीन, प्रकाश की आधा बीघा, मौजीलाल की आधा बीघा व बिसंभर की 15 बिस्वा जमीन नदी में कट गई है। ललतू ने बताया कि उनका प्रधानमंत्री आवास कटान की जद में है। अगर इसी तरह कटान होता रहा तो एक-दो दिन में पूरा घर नदी में समा जाएगा।
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गैस सिलिंडर व माह में दो बार राशन दिलवाने की हो व्यवस्था
तटवर्ती गांव जगरूपपुरवा, निरंजन पुरवा, कनरखी, सोतीपुरवा, गोमती पुरवा, सुंदर पुरवा, लोधन पुरवा, बाबा कुटी, अंगरौरा व प्यारे पुरवा से बाढ़ का पानी पूरी तरह से निकल गया है। सुंदरपुरवा, लोधनपुरवा गांव के पीड़ित राकेश, ललतु आदि ने कहा कि निशुल्क गैस सिलिंडर व माह में उचित दर की दुकान से दो बार राशन दिलवाने की व्यवस्था कर दी जाए, ताकि जीविका चल सके। हालांकि जानवरों के चारे का बड़ा संकट खड़ा है। एक बार मिला 50 किलो भूसा तो चार दिन में खत्म हो गया है। बेनीराम ने बताया कि बाढ़ के कारण सारी घास भी सूख गई है। जानवरों के जीवन के लिए अब कोई उपाय नहीं है। प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए।
कराया जा रहा सर्वे
सरयू का जलस्तर कम हो गया है। बाढ़ के समय भूसा व राशन किट आदि का वितरण कराया गया था। इस समय कटान लगभग बंद है। जमीन की जो भी मामूली कटान हुई है उसका सर्वे करवाया जा रहा है। - अनिल कुमार, तहसीलदार महमूदाबाद
नदी से 10 मीटर के फासले पर लखनीपुर के पांच घर
तंबौर (सीतापुर)। शारदा नदी का पानी लगातार कम हो रहा है। लखनीपुर गांव में सिंचाई विभाग द्वारा बचाव कार्य में लाई गई तेजी का भी असर देखने को मिला है। शुक्रवार को कटान की गति कम हुई है। हालांकि लखनीपुर के पांच घरों और नदी के बीच 10 मीटर का ही फासला बचा है।
शारदा नदी के किनारे पर रहने वाले राम भूखन, गजराज, खुशीराम, परागी और राजकिशोर के घर पर मंडराने वाला कटान का संकट अभी थमा नजर आ रहा है। सिंचाई विभाग द्वारा बंबू क्रेट में ईसी बैग लगाकर बोरियों को नदी किनारे डाला जा रहा है। शुक्रवार को सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता विशाल पोरवाल और सहायक अभियंता पुष्कर वर्मा लखनीपुर गांव पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की। ग्रामीणों को बताया कि किसी भी दशा में आबादी क्षेत्र प्रभावित होने नहीं दिया जाएगा। अधिशासी अभियंता ने निरीक्षण के दौरान कर्मचारियों को तीव्रगति से कार्य कराने के लिए निर्देशित किया। सिंचाई विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा शारदा नदी के तटवर्ती गांवों का लगातार भ्रमण किया जा रहा है।
शारदा नदी का जलस्तर 134.90 मीटर है जो कि खतरे निशान से 59 सेंटीमीटर नीचे है। घाघरा नदी का जलस्तर 135.15 मीटर है, जो कि खतरे के निशान से 113 सेंटीमीटर नीचे है। - विशाल पोरवाल अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग।

तंबौर क्षेत्र में कटान करती शारदा नदी।