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कर्मचारियों ने रैली निकाल जताया विरोध
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नूंह। कर्मचारियों के प्रति सरकार के मनमाने रवैये से परेशान होकर सोमवार को कर्मचारियों ने गांधी पार्क से उपायुक्त निवास तक रैली निकालकर अपना विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान ग्रामीण चौकीदार, आशा वर्कर, मिड-डे मील वर्कर, सफाई कर्मचारी सहित अन्य विभागों के कर्मचारी मौजूद रहे।
कर्मचारियों ने बताया कि सीटू के आह्वान पर पूरे देश में राष्ट्रव्यापी विरोध सप्ताह का आयोजन किया गया है। इसी कड़ी में नूंह में भी इस प्रदर्शन में कर्मचारियों ने अपना विरोध जताया। ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन के जिला प्रधान अनिल कुमार, कामरेड सतबीर सिंह, आशा वर्करों की जिला प्रधान महरम, रहीश खां, काले खां सबरस, राजबीर सिंह, अरशद वकील ने बताया कि उनकी 20 सूत्रीय मुख्य मांगों में जनस्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार जल्द से जल्द खर्च को बढ़ाए, जमाखोरी, ठेका प्रथा, किसानों व आम उपभोक्ताओं के अहित वाले अध्यादेश को तुरंत प्रभाव से वापस लेने, बिजली, रेल, रोडवेज, बैंक, बीमा व कोयला उत्पादन आदि के सार्वजनिक उपक्रमों निजीकरण को बंद करने, अंतिम वर्ष के छात्रों को डिग्री प्रदान करने, रोजगार गारंटी कानून को पारित करने, प्रति व्यक्ति दस किलो की दर से राशन देने, श्रमिकों कानूनों को खत्म करने, बच्चों की स्कूली फीस को माफ करने के साथ प्रदेश में पीटीआई को बहाल करना है। ग्रामीण चौकीदार, एजूसेट चौकीदार, मिड-डे मील, आशा वर्कर, आंगनबाड़ी वर्कर व हेल्पर को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देना, मनरेगा के तहत मजदूरी को बढ़ाने सहित अन्य मांगे शामिल हे। इस दौरान उन्होंने सरकार के प्रति नारेबाजी कर अपना विरोध प्रकट किया।
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कर्मचारियों ने बताया कि सीटू के आह्वान पर पूरे देश में राष्ट्रव्यापी विरोध सप्ताह का आयोजन किया गया है। इसी कड़ी में नूंह में भी इस प्रदर्शन में कर्मचारियों ने अपना विरोध जताया। ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन के जिला प्रधान अनिल कुमार, कामरेड सतबीर सिंह, आशा वर्करों की जिला प्रधान महरम, रहीश खां, काले खां सबरस, राजबीर सिंह, अरशद वकील ने बताया कि उनकी 20 सूत्रीय मुख्य मांगों में जनस्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार जल्द से जल्द खर्च को बढ़ाए, जमाखोरी, ठेका प्रथा, किसानों व आम उपभोक्ताओं के अहित वाले अध्यादेश को तुरंत प्रभाव से वापस लेने, बिजली, रेल, रोडवेज, बैंक, बीमा व कोयला उत्पादन आदि के सार्वजनिक उपक्रमों निजीकरण को बंद करने, अंतिम वर्ष के छात्रों को डिग्री प्रदान करने, रोजगार गारंटी कानून को पारित करने, प्रति व्यक्ति दस किलो की दर से राशन देने, श्रमिकों कानूनों को खत्म करने, बच्चों की स्कूली फीस को माफ करने के साथ प्रदेश में पीटीआई को बहाल करना है। ग्रामीण चौकीदार, एजूसेट चौकीदार, मिड-डे मील, आशा वर्कर, आंगनबाड़ी वर्कर व हेल्पर को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देना, मनरेगा के तहत मजदूरी को बढ़ाने सहित अन्य मांगे शामिल हे। इस दौरान उन्होंने सरकार के प्रति नारेबाजी कर अपना विरोध प्रकट किया।
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