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पेंशन बहाल न होने पर कर्मचारियों का प्रदर्शन
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सरकार के खिलाफ विरोध प्रकट करते कर्मचारी।
- फोटो : Mewat
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नूंह। पेंशन बहाली संघर्ष समिति हरियाणा के आह्वान पर रविवार को कर्मचारियों ने पेंशन बहाल नहीं होने के विरोध में प्रदेश सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रोष जताया। इस दौरान सभी कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नूंह में बैठक आयोजित की गई। इसमें फरीदाबाद, पलवल, रेवाड़ी, गुरुग्राम और नूंह आदि जिलों की ब्लॉक और जिला कार्यकारिणी के सदस्यों ने हिस्सा लिया। इस दौरान सभी कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रोष प्रकट किया।
संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र धारीवाल के आह्वान पर पेंशन बहाली संघर्ष समिति के गठन को चार वर्ष पूर्ण होने पर सभी विभागों के कर्मचारियों ने इस दिवस को कर्मचारी एकता दिवस के रूप में मनाया। मंच संचालन डॉ. संजय द्वारा किया गया। जिला प्रधान मुनसेद खान ने बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा पुरानी पेंशन नीति को बहाल न करने और गलत आंकड़े प्रस्तुत कर नई पेंशन योजना (एनपीएस) को कर्मचारी और प्रदेश हित में बताए जाने पर रोष जताया और कहा कि वो कर्मचारियों के हित में न सोचकर पूंजीपतियों के हाथ मजबूत करने का काम कर रहे हैं, जोकि सरासर गलत है। इस कारण अब प्रदेश के कर्मचारियों में सरकार के प्रति नाराजगी है। विजेंद्र धारीवाल ने कहा कि अगर एनपीएस योजना इतनी ही अच्छी है तो मुख्यमंत्री और गठबंधन सरकार सबसे पहले एनपीएस को अपने विधायकों और सांसदों पर लागू करें। मुख्यमंत्री स्वयं पुरानी पेंशन का लाभ ले रहे हैं और कर्मचारियों के लिए एनपीएस को बेहतर बता रहे हैं। उन्होंने संघर्ष समिति के पदाधिकारियों से कहा कि अप्रैल महीने में जागरूकता अभियान चलाकर सभी कर्मचारियों को पेंशन बहाली संघर्ष समिति के साथ एक मंच पर लाया जाएगा। इसके बाद मई माह से ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर बड़े आंदोलन की शुरुआत की जाएगी।
जिला संयोजक दिनेश गोयल ने कहा कि नई पेंशन योजना पूरी तरह से बाजार पर अनिश्चितता पर आधारित योजना है, जिसमें कर्मचारियों को ना तो निश्चित रिटर्न और ना ही निश्चित पेंशन की कोई गारंटी है। एनपीएस योजना से सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन हरियाणा में दी जा रही बुजुर्ग पेंशन से भी कम है। इससे कर्मचारियों का सामाजिक शोषण हो रहा है। इस मौके पर फरीदाबाद जिले से राजेश भाटी, पलवल से रमेश कौशिक, मंडल प्रभारी ऋषि देव , रेवाड़ी से रविंद्र , गुरुग्राम से सुशील कटारिया, फतेहाबाद से महेंद्र शर्मा, जिला प्रधान कैथल सुरेंद्र माजरा, राज्य ऑडिटर विजय भुना, रमेश जांडली, किशोर जवलिया, डॉ. प्रमोद वर्मा आदि मौजूद रहे।
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संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र धारीवाल के आह्वान पर पेंशन बहाली संघर्ष समिति के गठन को चार वर्ष पूर्ण होने पर सभी विभागों के कर्मचारियों ने इस दिवस को कर्मचारी एकता दिवस के रूप में मनाया। मंच संचालन डॉ. संजय द्वारा किया गया। जिला प्रधान मुनसेद खान ने बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा पुरानी पेंशन नीति को बहाल न करने और गलत आंकड़े प्रस्तुत कर नई पेंशन योजना (एनपीएस) को कर्मचारी और प्रदेश हित में बताए जाने पर रोष जताया और कहा कि वो कर्मचारियों के हित में न सोचकर पूंजीपतियों के हाथ मजबूत करने का काम कर रहे हैं, जोकि सरासर गलत है। इस कारण अब प्रदेश के कर्मचारियों में सरकार के प्रति नाराजगी है। विजेंद्र धारीवाल ने कहा कि अगर एनपीएस योजना इतनी ही अच्छी है तो मुख्यमंत्री और गठबंधन सरकार सबसे पहले एनपीएस को अपने विधायकों और सांसदों पर लागू करें। मुख्यमंत्री स्वयं पुरानी पेंशन का लाभ ले रहे हैं और कर्मचारियों के लिए एनपीएस को बेहतर बता रहे हैं। उन्होंने संघर्ष समिति के पदाधिकारियों से कहा कि अप्रैल महीने में जागरूकता अभियान चलाकर सभी कर्मचारियों को पेंशन बहाली संघर्ष समिति के साथ एक मंच पर लाया जाएगा। इसके बाद मई माह से ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर बड़े आंदोलन की शुरुआत की जाएगी।
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जिला संयोजक दिनेश गोयल ने कहा कि नई पेंशन योजना पूरी तरह से बाजार पर अनिश्चितता पर आधारित योजना है, जिसमें कर्मचारियों को ना तो निश्चित रिटर्न और ना ही निश्चित पेंशन की कोई गारंटी है। एनपीएस योजना से सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन हरियाणा में दी जा रही बुजुर्ग पेंशन से भी कम है। इससे कर्मचारियों का सामाजिक शोषण हो रहा है। इस मौके पर फरीदाबाद जिले से राजेश भाटी, पलवल से रमेश कौशिक, मंडल प्रभारी ऋषि देव , रेवाड़ी से रविंद्र , गुरुग्राम से सुशील कटारिया, फतेहाबाद से महेंद्र शर्मा, जिला प्रधान कैथल सुरेंद्र माजरा, राज्य ऑडिटर विजय भुना, रमेश जांडली, किशोर जवलिया, डॉ. प्रमोद वर्मा आदि मौजूद रहे।
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