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डूसू चुनाव : दर्जनभर से अधिक कॉलेज तय करते हैं हार-जीत

Fri, 22 Sep 2023 06:43 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 22 Sep 2023 06:43 PM IST
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DUSU elections: More than a dozen colleges decide victory and defeat
-52 कॉलेजों में से 12 से 15 कॉलेजों में होता है एक से तीन हजार के बीच मतदान
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-उम्मीदवार की जीत में अहम भूमिका निभाते हैं ये कॉलेज

-आउट व साउथ कैंपस में सबसे अधिक होता है मतदान

अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के 52 कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव(डूसू) से संबद्घ हैं, लेकिन मतदान और परिणाम के आधार पर देखा जाए तो 12 से 15 कॉलेज ही उम्मीदवारों की हार-जीत का फैसला कर देते हैं। इन्हीं कॉलेज में यदि पैनल वोटिंग हो जाए तो कोई भी संगठन डूसू फतह कर लेता है। इनमें कैंपस कॉलेजों के अलावा आउट ऑफ कैंपस कॉलेज भी शामिल हैं। यहां पर एक हजार से तीन हजार के बीच मतदान होता है जो कि किसी भी उम्मीदवार के लिए संजीवनी बूटी का काम करता है। जबकि नॉर्थ कैंपस की बात की जाए तो यहां मतदान का भार सीधे फ्रेशर्स(नए छात्रों) के कंधों पर ही टिका होता है।

डूसू चुनाव के परिणामों को प्रभावित करने में बाहरी दिल्ली स्थित स्वामी श्रद्घानंद, कालकाजी बेल्ट के देशबंधु कॉलेज, रामानुजन, कॉलेज ऑफ वोकेशनल स्टडी, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, भगिनी निवेदिता, शिवाजी कॉलेज आते हैं। इसके अलावा रामजस, हिंदू, हंसराज व किरोड़ीमल कॉलेज, पीजीडीएवी कॉलेज, लॉ सेंटर-1 में भी ज्यादा वोटिंग हो जाती है। इन कॉलेजों में मतदान 1000 से तीन हजार के बीच रहता है। खासकर दिल्ली देहात और ईवनिंग कॉलेज में पैनल वोट पड़ने से किसी उम्मीदवार के जीतने की प्रबल संभावना बन जाती है। पूर्वी दिल्ली स्थित श्याम लाल कॉलेज में भी 1200 से अधिक वोट पड़ जाते हैं।
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कैंपस कॉलेज रहते हैं निर्णायक की भूमिका में
कैंपस कॉलेजों की बात करें तो रामजस, हिंदू, हंसराज, किरोड़ीमल और सत्यवती कॉलेज भी निर्णायक कॉलेजों में शुमार किए जाते हैं। इन सभी कॉलेजों में मतदान का स्तर एक हजार से अधिक रहता है। यहां मतदान का भार सीधे तौर पर फ्रेशर्स के कंधों पर ही टिका होता है। यदि नया छात्र वोट के लिए निकलता है तो पैनल वोटिंग भी हो जाती है। साउथ कैंपस के कॉलेजों में श्री वेंकटेश्वर, पीजीडीएवी, श्री अरबिंदो, आत्माराम सनातन धर्म और देशबंधु कॉलेज निर्णायक कॉलेजों में शामिल हैं। इन सभी कॉलेजों में भी मतदान का स्तर भी एक हजार से अधिक रहता है। जानकारों के मुताबिक अगर इन दर्जनभर कॉलेजों के मतदाता मेहरबान हों तो किसी भी उम्मीदवार का भाग्य चमक सकता है।
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देहात के कॉलेजों में जाट-गुर्जर फैक्टर
दिल्ली देहात के कॉलेजों में जाट-गुर्जर फैक्टर भी काम करता है। यहां इस वर्ग के सर्वाधिक वोट पड़ते हैं। इन्हीं जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखते हुए संगठन अपने उम्मीदवार तय करते हैं। इस बार के चुनावों में एबीवीपी एवं एनएसयूआई ने भी इन्हीं जातियों से संबंधित उम्मीदवारों पर दांव लगाया है।
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