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Noida News: बच्चों की ताकत बने अभिभावक, डांट ले जाती है अवसाद की ओर
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सीबीएसई 10वीं परिणाम
- कम अंक आने और फेल होने पर छात्र हुए उदास
- मनोवैज्ञानिक बोले, पहला पेपर सरल विषय से होना चाहिए शुरु
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सीबीएसई 10वीं का परिणाम घोषित होने के बाद सफल छात्रों के चेहरे खिल उठे हैं। वहीं, कम अंक लाने वाले छात्रों के चेहरे पर मायूसी छाई रही। ऐसे में माता-पिता की डांट बच्चों को अवसाद की ओर ले जाती है। मनोवैज्ञानिक का कहना है कि कम नंबर व फेल हुए छात्र अवसाद का शिकार न हों। जिंदगी में बेहतर करने के कई मौके आएंगे। अभिभावक भी उनके साथ अच्छा व्यवहार करें। उनकी ताकत बनकर उन्हें आगे बढ़ाने का प्रयास करें।
राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) के मनोरोग विभाग के लेफ्टिनेंट कर्नल प्रोफेसर अभिषेक भारती का कहना है कि हर बच्चा परीक्षा में काफी अच्छा करने की कोशिश करता है। ऐसे में बच्चे के प्रयासों की तारीफ करें और उन्हें समझाएं कि मेहनत ही सबसे महत्वपूर्ण चीज है। जब बच्चा पूरे समय खाली रहेगा, तो वो हमेशा अपने रिजल्ट के बारे में ही सोचेगा। अभिभावक बच्चों पर दबाव न बनाएं।
उन्होंने कहा कि गणित का पहला पेपर होने के कारण काफी बच्चों का रिजल्ट बिगड़ गया है। शिक्षा विभाग को पहला पेपर सरल रखना चाहिए। जीबीयू के मनोविज्ञान व मानसिक स्वाथ्य विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद प्रताप सिंह ने कहा कि अभिभावक बच्चों को समझाएं कि आप हर परिणाम में उनके साथ खड़े हैं। खराब रिजल्ट आने पर उन्हें समझाएं कि कोई बात नहीं, आगे वह और बेहतर कर सकता है। यदि वे ऐसा करते हैं तो बच्चों को मानसिक आघात भी पहुंच सकता है।
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- कम अंक आने और फेल होने पर छात्र हुए उदास
- मनोवैज्ञानिक बोले, पहला पेपर सरल विषय से होना चाहिए शुरु
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सीबीएसई 10वीं का परिणाम घोषित होने के बाद सफल छात्रों के चेहरे खिल उठे हैं। वहीं, कम अंक लाने वाले छात्रों के चेहरे पर मायूसी छाई रही। ऐसे में माता-पिता की डांट बच्चों को अवसाद की ओर ले जाती है। मनोवैज्ञानिक का कहना है कि कम नंबर व फेल हुए छात्र अवसाद का शिकार न हों। जिंदगी में बेहतर करने के कई मौके आएंगे। अभिभावक भी उनके साथ अच्छा व्यवहार करें। उनकी ताकत बनकर उन्हें आगे बढ़ाने का प्रयास करें।
राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) के मनोरोग विभाग के लेफ्टिनेंट कर्नल प्रोफेसर अभिषेक भारती का कहना है कि हर बच्चा परीक्षा में काफी अच्छा करने की कोशिश करता है। ऐसे में बच्चे के प्रयासों की तारीफ करें और उन्हें समझाएं कि मेहनत ही सबसे महत्वपूर्ण चीज है। जब बच्चा पूरे समय खाली रहेगा, तो वो हमेशा अपने रिजल्ट के बारे में ही सोचेगा। अभिभावक बच्चों पर दबाव न बनाएं।
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उन्होंने कहा कि गणित का पहला पेपर होने के कारण काफी बच्चों का रिजल्ट बिगड़ गया है। शिक्षा विभाग को पहला पेपर सरल रखना चाहिए। जीबीयू के मनोविज्ञान व मानसिक स्वाथ्य विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद प्रताप सिंह ने कहा कि अभिभावक बच्चों को समझाएं कि आप हर परिणाम में उनके साथ खड़े हैं। खराब रिजल्ट आने पर उन्हें समझाएं कि कोई बात नहीं, आगे वह और बेहतर कर सकता है। यदि वे ऐसा करते हैं तो बच्चों को मानसिक आघात भी पहुंच सकता है।
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