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Noida News: साइबर ठगी की रकम लेने वाले बैंक खाताधारक पर प्राथमिकी दर्ज
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- एनसीआरपी पोर्टल की शिकायतों के आधार पर अलग-अलग बैंक खातों की हुई जांच
- जांच में साइबर फ्रॉड की रकम मिलने का दावा, पुलिस कर रही नेटवर्क की पड़ताल
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। साइबर ठगी करने वाले गिरोहों के साथ-साथ अब उनकी रकम को अपने बैंक खातों के जरिए प्राप्त करने वाले खाताधारकों पर भी गौतमबुद्धनगर पुलिस का शिकंजा कसता जा रहा है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज शिकायतों के आधार पर सूरजपुर और ईकोटेक-3 थाना पुलिस ने चार अलग-अलग मामलों में बैंक खाताधारकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की हैं। साथ ही चारों बैंक खातों में जमा 93 हजार रुपये फ्रीज कराए हैं। पुलिस के अनुसार साइबर अपराधी सीधे अपने खातों का इस्तेमाल नहीं करते। वह अलग-अलग लोगों के बैंक खातों का उपयोग ठगी की रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए करते हैं। ऐसे खातों को आम बोलचाल में ''मनी म्यूल अकाउंट'' कहा जाता है। कई बार खाताधारक कमीशन के लालच में अपने खाते उपलब्ध करा देते हैं, जबकि कुछ मामलों में उनकी संलिप्तता की जांच की जाती है।
केस-1
सूरजपुर कोतवाली पुलिस ने यूको बैंक मकौड़ा शाखा में संचालित मनीष नागर के खाते की जांच की। साइबर हेल्प डेस्क पर तैनात आयुषी मिश्रा द्वारा 102 संदिग्ध बैंक खातों की जांच के दौरान पता चला कि इस खाते में साइबर ठगी से जुड़े दो मामलों में क्रमशः 10 हजार और 8,500 रुपये, कुल 18,500 रुपये जमा हुए थे। दोनों शिकायतें पहले से एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज थीं। बैंक से प्राप्त लेनदेन का विवरण और पोर्टल पर उपलब्ध रिकॉर्ड के मिलान के बाद आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
केस-2
साइबर हेल्प डेस्क पर तैनात उपनिरीक्षक शिवम यादव ने एक संदिग्ध बैंक खाते की जांच की। जांच में सामने आया कि यह खाता उत्तर प्रदेश और गुजरात में हुई दो अलग-अलग साइबर ठगी की घटनाओं से जुड़ा है। वर्ष 2025 में अलीगढ़ के हरदुआगंज थाना क्षेत्र में यूपीआई फ्रॉड के जरिए हुई 74 हजार रुपये की ठगी में से 8 हजार रुपये इसी खाते में ट्रांसफर किए गए थे। वहीं गुजरात के अहमदाबाद में फर्जी पहचान के जरिए हुई 8 लाख रुपये की साइबर ठगी में से 98 हजार रुपये भी इसी खाते में पहुंचे थे।
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केस-3
सूरजपुर कोतवाली पुलिस ने एचडीएफसी बैंक की सूरजपुर क्षेत्र स्थित शाखा में संचालित अंकित कुमार के बैंक खाते की जांच की। जांच में सामने आया कि साइबर ठगी से जुड़े एक मामले में 8 हजार रुपये इस खाते में प्राप्त हुए थे। इस संबंध में पहले से एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज थी। बैंक रिकॉर्ड और पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी का सत्यापन करने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया।
केस स्टडी-3
सूरजपुर कोतवाली क्षेत्र स्थित कोटक महिंद्रा बैंक के दो खातों से कुल 50,488 रुपये की धोखाधड़ी कर ली गई। शिकायतकर्ता आयुषी मिश्रा ने बताया कि वह 102 म्यूल बैंक खातों की जांच कर रही थीं। जांच के दौरान उन्होंने पाया कि कोटक महिंद्रा बैंक अपोजिट प्रिया गोल्ड फैक्टरी मेन दादरी रोड सूरजपुर शाखा का है। दूसरा खाता जो प्रिन्स भाटी निवासी गांव तिलपता सूरजपुर के नाम है। इन दोनों खातों में साइबर फ्रॉड कर क्रमशः 20,488 रुपये और 30,000 रुपये की धनराशि प्राप्त की गई है।
बैंक स्टेटमेंट, ट्रांजेक्शन हिस्ट्री का हो रहा मिलान: सभी मामलों में एक समान बात यह सामने आई कि संबंधित बैंक खाते एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के आधार पर चिन्हित किए गए। पुलिस ने बैंक स्टेटमेंट, ट्रांजेक्शन हिस्ट्री और डिजिटल रिकॉर्ड का मिलान कर प्रथम दृष्टया साइबर ठगी की रकम खातों में पहुंचने की पुष्टि की। इसके बाद संबंधित खाताधारकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
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- जांच में साइबर फ्रॉड की रकम मिलने का दावा, पुलिस कर रही नेटवर्क की पड़ताल
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। साइबर ठगी करने वाले गिरोहों के साथ-साथ अब उनकी रकम को अपने बैंक खातों के जरिए प्राप्त करने वाले खाताधारकों पर भी गौतमबुद्धनगर पुलिस का शिकंजा कसता जा रहा है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज शिकायतों के आधार पर सूरजपुर और ईकोटेक-3 थाना पुलिस ने चार अलग-अलग मामलों में बैंक खाताधारकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की हैं। साथ ही चारों बैंक खातों में जमा 93 हजार रुपये फ्रीज कराए हैं। पुलिस के अनुसार साइबर अपराधी सीधे अपने खातों का इस्तेमाल नहीं करते। वह अलग-अलग लोगों के बैंक खातों का उपयोग ठगी की रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए करते हैं। ऐसे खातों को आम बोलचाल में ''मनी म्यूल अकाउंट'' कहा जाता है। कई बार खाताधारक कमीशन के लालच में अपने खाते उपलब्ध करा देते हैं, जबकि कुछ मामलों में उनकी संलिप्तता की जांच की जाती है।
केस-1
सूरजपुर कोतवाली पुलिस ने यूको बैंक मकौड़ा शाखा में संचालित मनीष नागर के खाते की जांच की। साइबर हेल्प डेस्क पर तैनात आयुषी मिश्रा द्वारा 102 संदिग्ध बैंक खातों की जांच के दौरान पता चला कि इस खाते में साइबर ठगी से जुड़े दो मामलों में क्रमशः 10 हजार और 8,500 रुपये, कुल 18,500 रुपये जमा हुए थे। दोनों शिकायतें पहले से एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज थीं। बैंक से प्राप्त लेनदेन का विवरण और पोर्टल पर उपलब्ध रिकॉर्ड के मिलान के बाद आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
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केस-2
साइबर हेल्प डेस्क पर तैनात उपनिरीक्षक शिवम यादव ने एक संदिग्ध बैंक खाते की जांच की। जांच में सामने आया कि यह खाता उत्तर प्रदेश और गुजरात में हुई दो अलग-अलग साइबर ठगी की घटनाओं से जुड़ा है। वर्ष 2025 में अलीगढ़ के हरदुआगंज थाना क्षेत्र में यूपीआई फ्रॉड के जरिए हुई 74 हजार रुपये की ठगी में से 8 हजार रुपये इसी खाते में ट्रांसफर किए गए थे। वहीं गुजरात के अहमदाबाद में फर्जी पहचान के जरिए हुई 8 लाख रुपये की साइबर ठगी में से 98 हजार रुपये भी इसी खाते में पहुंचे थे।
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केस-3
सूरजपुर कोतवाली पुलिस ने एचडीएफसी बैंक की सूरजपुर क्षेत्र स्थित शाखा में संचालित अंकित कुमार के बैंक खाते की जांच की। जांच में सामने आया कि साइबर ठगी से जुड़े एक मामले में 8 हजार रुपये इस खाते में प्राप्त हुए थे। इस संबंध में पहले से एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज थी। बैंक रिकॉर्ड और पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी का सत्यापन करने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया।
केस स्टडी-3
सूरजपुर कोतवाली क्षेत्र स्थित कोटक महिंद्रा बैंक के दो खातों से कुल 50,488 रुपये की धोखाधड़ी कर ली गई। शिकायतकर्ता आयुषी मिश्रा ने बताया कि वह 102 म्यूल बैंक खातों की जांच कर रही थीं। जांच के दौरान उन्होंने पाया कि कोटक महिंद्रा बैंक अपोजिट प्रिया गोल्ड फैक्टरी मेन दादरी रोड सूरजपुर शाखा का है। दूसरा खाता जो प्रिन्स भाटी निवासी गांव तिलपता सूरजपुर के नाम है। इन दोनों खातों में साइबर फ्रॉड कर क्रमशः 20,488 रुपये और 30,000 रुपये की धनराशि प्राप्त की गई है।
बैंक स्टेटमेंट, ट्रांजेक्शन हिस्ट्री का हो रहा मिलान: सभी मामलों में एक समान बात यह सामने आई कि संबंधित बैंक खाते एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के आधार पर चिन्हित किए गए। पुलिस ने बैंक स्टेटमेंट, ट्रांजेक्शन हिस्ट्री और डिजिटल रिकॉर्ड का मिलान कर प्रथम दृष्टया साइबर ठगी की रकम खातों में पहुंचने की पुष्टि की। इसके बाद संबंधित खाताधारकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।