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दिल्ली दंगा: संवेनशीलता के बावजूद हमें सामान्य सूझ-बूझ को नहीं छोड़ना चाहिए -कोर्ट
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नई दिल्ली। दंगों से जुड़े मामलों की सुनवाई संवेदनशीलता से होनी चाहिए लेकिन इसके बावजूद हमें सामान्य सूझ-बूझ को नहीं छोड़ना चाहिए। अदालत ने ये टिप्पणी दंगा मामले में एक शख्स को आरोपमुक्त करते हुए की। उत्तर पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 में हुए दंगों में 53 लोग मारे गए थे और 700 से ज्यादा घायल हुए थे।
कड़कड़डूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने 22 साल के जावेद को आगजनी से नुकसान पहुंचाने के अपराध से आरोपमुक्त कर दिया। अदालत ने इस बात पर गौर किया कि शिकायतकर्ता ने अपने बयान में ऐसे अपराध के होने का जिक्र नहीं किया था।
उन्होंने कहा कि ये अदालत इस बात को लेकर सचेत है कि दंगों से जुड़े मामलों की सुनवाई संवेदशनशीलता के साथ होनी चाहिए लेकिन तब भी हमें अपनी सामान्य सूझ-बूझ को नहीं छोड़ना चाहिए। आरोप तय करते समय भी रिकार्ड पर मौजूद साक्ष्यों व सामग्री के संबंध में विवेक का प्रयोग करना चाहिए।
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पुलिस ने जावेद को अप्रैल 2020 में 25 फरवरी 2020 की शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया था। इसमें कहा गया था कि शिकायतकर्ता के गोदाम और दुकान में दंगाइयों ने तोड़फोड़ और आगजनी की थी।
अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए इस बात पर भी गौर किया कि घटना का कोई चश्मदीद, सीसीटीवी फुटेज या फोटोग्राफ नहीं है। इस बात पर भी गौर किया कि शिकायतकर्ता ने आग या विस्फोटक सामग्री से संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की बात नहीं की है। अदालत ने कहा इस खामी को पुलिस शिकायतकर्ता का पूरक बयान लेकर नहीं भर सकती क्योंकि आग से नुकसान के तथ्य मूल बयान में नहीं है।
अदालत ने कहा कि इस केस में आग से संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मामला नहीं बनता है। इसके अलावा सभी अन्य आरोप मजिस्ट्रेट के समक्ष सुनवाई योग्य हैं। -एजेंसी
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कड़कड़डूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने 22 साल के जावेद को आगजनी से नुकसान पहुंचाने के अपराध से आरोपमुक्त कर दिया। अदालत ने इस बात पर गौर किया कि शिकायतकर्ता ने अपने बयान में ऐसे अपराध के होने का जिक्र नहीं किया था।
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उन्होंने कहा कि ये अदालत इस बात को लेकर सचेत है कि दंगों से जुड़े मामलों की सुनवाई संवेदशनशीलता के साथ होनी चाहिए लेकिन तब भी हमें अपनी सामान्य सूझ-बूझ को नहीं छोड़ना चाहिए। आरोप तय करते समय भी रिकार्ड पर मौजूद साक्ष्यों व सामग्री के संबंध में विवेक का प्रयोग करना चाहिए।
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पुलिस ने जावेद को अप्रैल 2020 में 25 फरवरी 2020 की शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया था। इसमें कहा गया था कि शिकायतकर्ता के गोदाम और दुकान में दंगाइयों ने तोड़फोड़ और आगजनी की थी।
अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए इस बात पर भी गौर किया कि घटना का कोई चश्मदीद, सीसीटीवी फुटेज या फोटोग्राफ नहीं है। इस बात पर भी गौर किया कि शिकायतकर्ता ने आग या विस्फोटक सामग्री से संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की बात नहीं की है। अदालत ने कहा इस खामी को पुलिस शिकायतकर्ता का पूरक बयान लेकर नहीं भर सकती क्योंकि आग से नुकसान के तथ्य मूल बयान में नहीं है।
अदालत ने कहा कि इस केस में आग से संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मामला नहीं बनता है। इसके अलावा सभी अन्य आरोप मजिस्ट्रेट के समक्ष सुनवाई योग्य हैं। -एजेंसी