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रजत का हकदार था, स्वर्ण पदक करीब से निकल गया : सुहास
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नोएडा पहुंचे रजत पदक जीतने वाले जिलाधिकारी सुहास एलवाई।
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नोएडा (संजय शिशौदिया)। ‘देश के लिए पैरालंपिक खेलना और पदक जीतना वास्तव में बहुत बड़ी बात है। हर खिलाड़ी चाहता है कि वह अपने देश को विजेता बनाए। पूरा विश्वास था कि पदक जीतकर ही लौटूंगा। रजत का हकदार था, वह मुझे मिला। थोड़ी सी निराशा इस बात की है कि स्वर्ण पदक करीब से निकल गया।’ टोक्यो पैरालंपिक से रजत पदक जीतकर लौटे गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी और विश्व में पैरा बैडमिंटन के नंबर-3 के खिलाड़ी सुहास एलवाई ने यह बात कही।
जिलाधिकारी ने कहा कि जीत के बाद जो सम्मान मुझे देश की जनता ने दिया है, उसका शब्दों में वर्णन नहीं किया जा सकता। इंदिरा गांधी एयरपोर्ट से नोएडा तक जगह-जगह जिस तरह देश और जिले के लोगों का प्यार मुझे मिला है कि मेरे पास उसके लिए शब्द ही नहीं हैं। खुली छत की जीप से ‘भारत माता की जय’ और ‘चक दे इंडिया’ के नारे लगाते हुए जिलाधिकारी जब सेक्टर-27 स्थित अपने आवास पर पहुंचे तो उनके प्रशंसकों ने उन्हें कंधों पर बैठाकर दरवाजे तक पहुंचाया।
दरवाजे पर सबसे पहले उन्होंने अपनी मां के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। मां ने खुशी के आंसुओं के साथ बेटे की सिर से कई बार बलाएं लीं। ढोल की थाप पर शुभचिंतक, रिश्तेदार और अधीनस्थ अधिकारी जमकर थिरके। इस दौरान उनके आवास की ओर वाला ट्रैफिक रोक दिया गया। सड़क पर ही आतिशबाजी की गई। इसके बाद दरवाजे पर ही खड़ी महिलाओं ने जिलाधिकारी की आरती उतारी और तिलक लगाया। जीप में डीएम के साथ उनकी पत्नी ऋतु सुहास भी मौजूद थीं। घर के आंगन में सुहास एलवाई और ऋतु ने बैडमिंटन की आकृति का बना केक काटकर एक-दूसरे को खिलाया।
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इससे पहले जिला क्रीड़ा अधिकारी अनीता नागर ने डीएनडी पर जिलाधिकारी के स्वागत का कार्यक्रम रखा था। वहां उनका जोरदार स्वागत किया गया। कई खिलाड़ी ग्रुप और एनजीओ भी डीएम का स्वागत करने पहुंचे थे। पैरालंपिक में पदक जीतने वाले सुहास एलवाई देश के पहले आईएएस अधिकारी हैं। उनकी इस खुशी में जैसे पूरा शहर ही शामिल हुआ। सड़कों पर चलते लोग सुहास एलवाई की एक झलक देखने को उतावले नजर आए।
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जिलाधिकारी ने कहा कि जीत के बाद जो सम्मान मुझे देश की जनता ने दिया है, उसका शब्दों में वर्णन नहीं किया जा सकता। इंदिरा गांधी एयरपोर्ट से नोएडा तक जगह-जगह जिस तरह देश और जिले के लोगों का प्यार मुझे मिला है कि मेरे पास उसके लिए शब्द ही नहीं हैं। खुली छत की जीप से ‘भारत माता की जय’ और ‘चक दे इंडिया’ के नारे लगाते हुए जिलाधिकारी जब सेक्टर-27 स्थित अपने आवास पर पहुंचे तो उनके प्रशंसकों ने उन्हें कंधों पर बैठाकर दरवाजे तक पहुंचाया।
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दरवाजे पर सबसे पहले उन्होंने अपनी मां के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। मां ने खुशी के आंसुओं के साथ बेटे की सिर से कई बार बलाएं लीं। ढोल की थाप पर शुभचिंतक, रिश्तेदार और अधीनस्थ अधिकारी जमकर थिरके। इस दौरान उनके आवास की ओर वाला ट्रैफिक रोक दिया गया। सड़क पर ही आतिशबाजी की गई। इसके बाद दरवाजे पर ही खड़ी महिलाओं ने जिलाधिकारी की आरती उतारी और तिलक लगाया। जीप में डीएम के साथ उनकी पत्नी ऋतु सुहास भी मौजूद थीं। घर के आंगन में सुहास एलवाई और ऋतु ने बैडमिंटन की आकृति का बना केक काटकर एक-दूसरे को खिलाया।
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इससे पहले जिला क्रीड़ा अधिकारी अनीता नागर ने डीएनडी पर जिलाधिकारी के स्वागत का कार्यक्रम रखा था। वहां उनका जोरदार स्वागत किया गया। कई खिलाड़ी ग्रुप और एनजीओ भी डीएम का स्वागत करने पहुंचे थे। पैरालंपिक में पदक जीतने वाले सुहास एलवाई देश के पहले आईएएस अधिकारी हैं। उनकी इस खुशी में जैसे पूरा शहर ही शामिल हुआ। सड़कों पर चलते लोग सुहास एलवाई की एक झलक देखने को उतावले नजर आए।