{"_id":"615227e58ebc3e09df236369","slug":"dengue-outbreak-rising-again-after-three-years-noida-news-noi607173031","type":"story","status":"publish","title_hn":"तीन साल बाद फिर तेजी से बढ़ रहा डेंगू का प्रकोप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तीन साल बाद फिर तेजी से बढ़ रहा डेंगू का प्रकोप
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नोएडा। कोरोना की संभावित तीसरी लहर के खतरे के बीच जिले में डेंगू का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। सोमवार को जारी स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में डेंगू के दो नए मामलों की पुष्टि हुई है। अब कुल मरीजों की संख्या 39 पहुंच गई है। साल 2019 में डेंगू के 40 मामलों की पुष्टि विभाग ने की थी। ऐसे में 2019 का रिकॉर्ड टूटने की आशंका है। लगातार बढ़ रहे मरीजों ने स्वास्थ्य महकमे की चिंता बढ़ा दी है।
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि दो नए मरीजों की जानकारी अलग-अलग अस्पतालों से रविवार शाम को मिली। हालांकि, जिले में डेंगू के सक्रिय केस केवल तीन हैं। इनका इलाज चल रहा है। स्क्रब टाइफस के इस सीजन में सिर्फ तीन मामले सामने आए हैं। सभी मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। लैप्टोस्पाइरोसिस का मामला अब तक नहीं मिला है। डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ी है, लेकिन अन्य जिलों की तुलना में हालात नियंत्रण में हैं। वहीं, संचारी रोग नियंत्रण के लिए सोमवार को अतिरिक्त मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद ने सभी जिलों के सीएमओ व सीएमएस सहित अन्य अधिकारियों की बैठक ली और अलर्ट रहने के निर्देश दिए। सभी जिलों से डेंगू और मलेरिया से निपटने की कार्ययोजना की जानकारी ली गई।
...तो रहिए सावधान, इस बार खतरा अधिक
स्वास्थ्य विभाग ने साल 2018 में डेंगू के 28 मामलों की पुष्टि की थी। जबकि, साल 2019 में रिकॉर्ड 40 मामले सामने आए थे। इसके बाद साल 2020 में डेंगू के सिर्फ 27 मामले ही दर्ज किए गए। सरकारी आंकड़ों में इस साल मरीजों की 39 पहुंच गई है। जबकि, मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कोरोना के खतरे के बीच लोगों को सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि इस बार खतरा ज्यादा है। मच्छर जनित बीमारियों के मामले आमतौर पर जुलाई से नवंबर के बीच आते हैं। ऐसे में अभी दो महीने बाकी हैं।
विज्ञापन
जिला अस्पताल के डेंगू वार्ड में बढ़े बेड
जिला अस्पताल में डेंगू मरीजों के लिए अलग से 10 बेड की व्यवस्था की गई थी, लेकिन संख्या बढ़ने की आशंका को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने एहतियाती तौर पर बेड बढ़ाकर 15 कर दिए हैं। सभी बेड पर मच्छरदानी लगाई गई है। सीएमएस डॉ. सुषमा चंद्रा ने बताया कि जरूरत पड़ने पर और भी बेड बढ़ाए जाएंगे।
इस बार सबसे बड़ी चुनौती लक्षणों में एकरूपता की है। कोरोना, डेंगू, मलेरिया के लक्षण एक जैसे हैं। डेंगू के लक्षण वाले मरीजों की जांच कराने पर वायरल और टाइफाइड की पुष्टि हो रही है। इस साल बारिश होने और जल जमाव के कारण मच्छरजनित बीमारियों के मामले बढ़े हैं।
- डॉ. सुभाष गुप्ता, कोषाध्यक्ष, आईएमए नोएडा
विज्ञापन
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि दो नए मरीजों की जानकारी अलग-अलग अस्पतालों से रविवार शाम को मिली। हालांकि, जिले में डेंगू के सक्रिय केस केवल तीन हैं। इनका इलाज चल रहा है। स्क्रब टाइफस के इस सीजन में सिर्फ तीन मामले सामने आए हैं। सभी मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। लैप्टोस्पाइरोसिस का मामला अब तक नहीं मिला है। डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ी है, लेकिन अन्य जिलों की तुलना में हालात नियंत्रण में हैं। वहीं, संचारी रोग नियंत्रण के लिए सोमवार को अतिरिक्त मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद ने सभी जिलों के सीएमओ व सीएमएस सहित अन्य अधिकारियों की बैठक ली और अलर्ट रहने के निर्देश दिए। सभी जिलों से डेंगू और मलेरिया से निपटने की कार्ययोजना की जानकारी ली गई।
विज्ञापन
...तो रहिए सावधान, इस बार खतरा अधिक
स्वास्थ्य विभाग ने साल 2018 में डेंगू के 28 मामलों की पुष्टि की थी। जबकि, साल 2019 में रिकॉर्ड 40 मामले सामने आए थे। इसके बाद साल 2020 में डेंगू के सिर्फ 27 मामले ही दर्ज किए गए। सरकारी आंकड़ों में इस साल मरीजों की 39 पहुंच गई है। जबकि, मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कोरोना के खतरे के बीच लोगों को सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि इस बार खतरा ज्यादा है। मच्छर जनित बीमारियों के मामले आमतौर पर जुलाई से नवंबर के बीच आते हैं। ऐसे में अभी दो महीने बाकी हैं।
विज्ञापन
जिला अस्पताल के डेंगू वार्ड में बढ़े बेड
जिला अस्पताल में डेंगू मरीजों के लिए अलग से 10 बेड की व्यवस्था की गई थी, लेकिन संख्या बढ़ने की आशंका को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने एहतियाती तौर पर बेड बढ़ाकर 15 कर दिए हैं। सभी बेड पर मच्छरदानी लगाई गई है। सीएमएस डॉ. सुषमा चंद्रा ने बताया कि जरूरत पड़ने पर और भी बेड बढ़ाए जाएंगे।
इस बार सबसे बड़ी चुनौती लक्षणों में एकरूपता की है। कोरोना, डेंगू, मलेरिया के लक्षण एक जैसे हैं। डेंगू के लक्षण वाले मरीजों की जांच कराने पर वायरल और टाइफाइड की पुष्टि हो रही है। इस साल बारिश होने और जल जमाव के कारण मच्छरजनित बीमारियों के मामले बढ़े हैं।
- डॉ. सुभाष गुप्ता, कोषाध्यक्ष, आईएमए नोएडा