{"_id":"6138f6268ebc3eb6c127c261","slug":"dengue-mewat-news-noi603478620","type":"story","status":"publish","title_hn":"डेंगू का पहला केस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डेंगू का पहला केस
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नगीना। करीब 5 साल के बाद डेंगू ने फिर से नूंह में दस्तक दे दी है। जिले में एक डेंगू का व तीन मलेरिया के मामले मिले हैं। इससे पहले 2017 में आखिरी बार डेंगू का केस जिले में मिला था। एक मरीज मिलने से जिला स्वास्थ्य पूरी तरह अलर्ट हो गया है। डेंगू व मलेरिया से बचाव में दोबारा तैयारियों की समीक्षा की जा रही है। जिले भर में 27 टीमें बनाई गई हैं। प्रत्येक टीम में एक सुपरवाइजर सहित 6 सदस्य नियुक्त किए गए हैं।
हाई रिस्क प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के तौर पर उजीना, पुन्हाना, बाई, सुडाका, तिगांव व संगेल आदि क्षेत्रों के 150 गांवों को चुना गया है। फिलहाल जिले में मलेरिया के तीन और डेंगू का एक मामला सामने आया है। जबकि पिछले साल 34 मलेरिया, 2019 में 920, 2018 में 1968, 2017 में 3647 मलेरिया व एक डेंगू और 2016 में 5075 मलेरिया और एक डेंगू का केस सामने आया था। सर्वेक्षण का पहला राउंड 10 मई से शुरू हुआ था। 15 जुलाई से दूसरा राउंड चल रहा है। तीसरा राउंड 10 अक्टूबर तक चलेगा। ग्राम पंचायतों व नगर पालिका में फॉगिंग कराई जा रही है। चुने गए 150 गांव में लोगों के खून के नमूने लिए जा रहे हैं।
............
बनाई गई है फिश हैचरीऱ्
जिला स्वास्थ्य विभाग ने गंबूजिया फिश हैचरी जिला नागरिक अस्पताल अलआफिया मांडीखेड़ा में
बनाई है। यहां तैयार की गई मछलियों को तालाबों व अन्य ऐसे स्थानों पर छोड़ा जाएगा जहां पानी की अत्यधिक मात्रा होती है व डेंगू, मलेरिया फैलने का खतरा बना रहता है।
विज्ञापन
..............
150 गांवों का डाटा तैयार
जिला महामारी अधिकारी डॉ. विमलेश तिवारी ने बताया कि 150 गांवों का डाटा तैयार कर लिया गया है। जहां एक फीसदी मलेरिया के केस आए थे एवं आगे केस मिलने की संभावना है। छह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अलग से नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं जो निरंतर कर्मचारियों द्वारा बनाई जा रही मलेरिया और डेंगू की स्लाइड और रिपोर्ट का मूल्यांकन करेंगे।
27 टीमों में 162 कर्मचारियों को 150 गांव में सर्वेक्षण के लिए तैनात किया गया है। जहां आवश्यकता है वहां नगर पालिका और ग्राम पंचायतों के सहयोग से फॉगिंग कराई जा रही है। दूसरा राउंड चल रहा है जिसमें कर्मचारी गांवों में जाकर संभावित मरीजों के खून के नमूने ले रहे हैं। तालाबों और अन्य स्थानों पर पानी बना है वहां पर मिट्टी का तेल आवश्यकता अनुसार डाला जा रहा है। फिश हैचरी जिला अस्पताल मांडीखेड़ा से गंबूजिया मछली तालाबों में डाली जा रही है जो डेंगू और मलेरिया के लारवा को खा जाती है।-डॉ. सुरेंद्र यादव, सिविल सर्जन नूंह।
कैप्शनऱ् जिला नागरिक अस्पताल अलआफिया मांडीखेड़ा में बनाई गई गंबूसिया फिश हैचरी।
कैप्शनऱ् बनारसी गांव में युवक के खून के नमूने लेती टीम व तालाब में भरे पानी में मिट्टी का तेल डालता युवक।
राजूद्दीन जंग
नगीना।
विज्ञापन
हाई रिस्क प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के तौर पर उजीना, पुन्हाना, बाई, सुडाका, तिगांव व संगेल आदि क्षेत्रों के 150 गांवों को चुना गया है। फिलहाल जिले में मलेरिया के तीन और डेंगू का एक मामला सामने आया है। जबकि पिछले साल 34 मलेरिया, 2019 में 920, 2018 में 1968, 2017 में 3647 मलेरिया व एक डेंगू और 2016 में 5075 मलेरिया और एक डेंगू का केस सामने आया था। सर्वेक्षण का पहला राउंड 10 मई से शुरू हुआ था। 15 जुलाई से दूसरा राउंड चल रहा है। तीसरा राउंड 10 अक्टूबर तक चलेगा। ग्राम पंचायतों व नगर पालिका में फॉगिंग कराई जा रही है। चुने गए 150 गांव में लोगों के खून के नमूने लिए जा रहे हैं।
विज्ञापन
............
बनाई गई है फिश हैचरीऱ्
जिला स्वास्थ्य विभाग ने गंबूजिया फिश हैचरी जिला नागरिक अस्पताल अलआफिया मांडीखेड़ा में
बनाई है। यहां तैयार की गई मछलियों को तालाबों व अन्य ऐसे स्थानों पर छोड़ा जाएगा जहां पानी की अत्यधिक मात्रा होती है व डेंगू, मलेरिया फैलने का खतरा बना रहता है।
विज्ञापन
..............
150 गांवों का डाटा तैयार
जिला महामारी अधिकारी डॉ. विमलेश तिवारी ने बताया कि 150 गांवों का डाटा तैयार कर लिया गया है। जहां एक फीसदी मलेरिया के केस आए थे एवं आगे केस मिलने की संभावना है। छह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अलग से नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं जो निरंतर कर्मचारियों द्वारा बनाई जा रही मलेरिया और डेंगू की स्लाइड और रिपोर्ट का मूल्यांकन करेंगे।
27 टीमों में 162 कर्मचारियों को 150 गांव में सर्वेक्षण के लिए तैनात किया गया है। जहां आवश्यकता है वहां नगर पालिका और ग्राम पंचायतों के सहयोग से फॉगिंग कराई जा रही है। दूसरा राउंड चल रहा है जिसमें कर्मचारी गांवों में जाकर संभावित मरीजों के खून के नमूने ले रहे हैं। तालाबों और अन्य स्थानों पर पानी बना है वहां पर मिट्टी का तेल आवश्यकता अनुसार डाला जा रहा है। फिश हैचरी जिला अस्पताल मांडीखेड़ा से गंबूजिया मछली तालाबों में डाली जा रही है जो डेंगू और मलेरिया के लारवा को खा जाती है।-डॉ. सुरेंद्र यादव, सिविल सर्जन नूंह।
कैप्शनऱ् जिला नागरिक अस्पताल अलआफिया मांडीखेड़ा में बनाई गई गंबूसिया फिश हैचरी।
कैप्शनऱ् बनारसी गांव में युवक के खून के नमूने लेती टीम व तालाब में भरे पानी में मिट्टी का तेल डालता युवक।
राजूद्दीन जंग
नगीना।