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संक्रमित होकर भी नहीं मानी हार, फर्ज के लिए भुलाया घर-परिवार
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शारदा अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में मरीज का उपचार करता चिकित्सक।
- फोटो : Grnoida
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संक्रमित होकर भी नहीं मानी हार, फर्ज के लिए भुलाया घर-परिवार
ग्रेटर नोएडा (नेहा शर्मा)। 8 मार्च को जिले में पहला कोरोना संक्रमित मरीज मिला था। तब से लेकर अब तक चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मी 23 हजार से ज्यादा संक्रमित मरीजों का इलाज कर चुके हैं। उपचार के दौरान मरीजों के संपर्क में आने से कई चिकित्सक और स्टाफ भी संक्रमित हो गया। स्वास्थ्य विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 9 महीने में 122 कोरोना योद्धा संक्रमित हुए हैं। इनमें से एक कर्मी की संक्रमण की वजह से जान भी चली गई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। बल्कि, फर्ज के आगे घर और परिवार को भी भुला दिया। इन आंकड़ों को शासन को भेजा गया है।
जिले में मिले पहले संक्रमित मरीज का इलाज दिल्ली में हुआ था। जबकि, वह नोएडा निवासी है। स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता दिखाते हुए जिम्स में पहला आइसोलेशन वॉर्ड बनाया था। इसके बाद से लगातार कोविड मरीजों की संख्या बढ़ती गई। इस दौरान सीएमओ, सर्विलांस ऑफिसर, जिला अस्पताल के डॉक्टर समेत आइसोलेशन वॉर्ड में ड्यूटी करने वाले कई डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी भी संक्रमित हो गए, लेकिन किसी ने हार नहीं मानी। अब भी जिले में रोजाना 100 से ज्यादा नए मरीज मिल रहे हैं। इन मरीजों के इलाज में स्वास्थ्य विभाग की टीम दिन-रात लगी है। स्वास्थ्य कर्मियों के इसी समर्पण से ही जिले में मरीजों के स्वस्थ होने की दर बेहतर हुई है। आंकड़ों पर नजर डाले तो रोजाना मिल रहे संक्रमितों की तुलना संक्रमण को मात देने वालों की संख्या ज्यादा है। जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. सुनील दोहरे ने बताया कि अब तक जिले में 122 डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी संक्रमित हो चुके हैं। वहीं, एक कर्मी की संक्रमण से जान गई है। वह जिला अस्पताल में कार्यरत था। डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी जीजान से मरीजों के इलाज में लगे हैं। इलाज के दौरान वह पूरी सावधानी बरते रहे हैं, ताकि खुद को संक्रमण से बचा सकें।
4 महीने से नहीं गए घर
कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार में जुटे कई डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मचारी पिछले करीब 4 महीने से घर नहीं गए हैं। अस्पताल के हॉस्टल में रहकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। वीडियो कॉल के जरिये ही परिवार से संपर्क बनाए हुए हैं। बता दें कि भीषण गर्मी में भी पीपीई किट पहनकर कोरोना योद्धा मरीजों के इलाज में जुटे रहे।
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अस्पतालों से मांगी स्वास्थ्य कर्मियों की जानकारी
सबसे पहले कोरोना वैक्सीन चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को लगाई जानी है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने सभी अस्पतालों से स्वास्थ्य कर्मचारियों की जानकारी मांगी है। कई अस्पतालों ने विभाग को जानकारी उपलब्ध करा दी है। इसको शासन को भेजा जा रहा है, ताकि कोई टीकाकरण से वंचित न रहने पाए।
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ग्रेटर नोएडा (नेहा शर्मा)। 8 मार्च को जिले में पहला कोरोना संक्रमित मरीज मिला था। तब से लेकर अब तक चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मी 23 हजार से ज्यादा संक्रमित मरीजों का इलाज कर चुके हैं। उपचार के दौरान मरीजों के संपर्क में आने से कई चिकित्सक और स्टाफ भी संक्रमित हो गया। स्वास्थ्य विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 9 महीने में 122 कोरोना योद्धा संक्रमित हुए हैं। इनमें से एक कर्मी की संक्रमण की वजह से जान भी चली गई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। बल्कि, फर्ज के आगे घर और परिवार को भी भुला दिया। इन आंकड़ों को शासन को भेजा गया है।
जिले में मिले पहले संक्रमित मरीज का इलाज दिल्ली में हुआ था। जबकि, वह नोएडा निवासी है। स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता दिखाते हुए जिम्स में पहला आइसोलेशन वॉर्ड बनाया था। इसके बाद से लगातार कोविड मरीजों की संख्या बढ़ती गई। इस दौरान सीएमओ, सर्विलांस ऑफिसर, जिला अस्पताल के डॉक्टर समेत आइसोलेशन वॉर्ड में ड्यूटी करने वाले कई डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी भी संक्रमित हो गए, लेकिन किसी ने हार नहीं मानी। अब भी जिले में रोजाना 100 से ज्यादा नए मरीज मिल रहे हैं। इन मरीजों के इलाज में स्वास्थ्य विभाग की टीम दिन-रात लगी है। स्वास्थ्य कर्मियों के इसी समर्पण से ही जिले में मरीजों के स्वस्थ होने की दर बेहतर हुई है। आंकड़ों पर नजर डाले तो रोजाना मिल रहे संक्रमितों की तुलना संक्रमण को मात देने वालों की संख्या ज्यादा है। जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. सुनील दोहरे ने बताया कि अब तक जिले में 122 डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी संक्रमित हो चुके हैं। वहीं, एक कर्मी की संक्रमण से जान गई है। वह जिला अस्पताल में कार्यरत था। डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी जीजान से मरीजों के इलाज में लगे हैं। इलाज के दौरान वह पूरी सावधानी बरते रहे हैं, ताकि खुद को संक्रमण से बचा सकें।
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4 महीने से नहीं गए घर
कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार में जुटे कई डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मचारी पिछले करीब 4 महीने से घर नहीं गए हैं। अस्पताल के हॉस्टल में रहकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। वीडियो कॉल के जरिये ही परिवार से संपर्क बनाए हुए हैं। बता दें कि भीषण गर्मी में भी पीपीई किट पहनकर कोरोना योद्धा मरीजों के इलाज में जुटे रहे।
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अस्पतालों से मांगी स्वास्थ्य कर्मियों की जानकारी
सबसे पहले कोरोना वैक्सीन चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को लगाई जानी है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने सभी अस्पतालों से स्वास्थ्य कर्मचारियों की जानकारी मांगी है। कई अस्पतालों ने विभाग को जानकारी उपलब्ध करा दी है। इसको शासन को भेजा जा रहा है, ताकि कोई टीकाकरण से वंचित न रहने पाए।