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आईएफएस पैकेज
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हेडिंग: एप से आवाज बदलकर अफसरों को देती थी झांसा
सबहेड: अमर उजाला ने किया था फर्जी महिला आईएफएस का खुलासा, पति के साथ किया गया है गिरफ्तार
एप से महिला खुद ही पीए बनकर अधिकारियों को फोन करके काम करवाती थी
नीली बत्ती वाली एसयूवी, यूएनओ का स्टीकर लगी मर्सिडीज आदि बरामद
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को चकमा देकर मेरठ से एस्कॉर्ट लेने वाली फर्जी आईएफएस जोया खान प्रॉक्सी मेल और आवाज बदलने वाले एप से पुलिस को झांसा देती थी। महिला के मोबाइल में वॉयस कनवर्टर एप था। इसके जरिये वह खुद ही पीए अनिल शर्मा बनकर अधिकारियों को फोन करती थी और अपने काम कराती थी। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वैभव कृष्ण के मुताबिक, महिला और उसके पति हर्ष प्रताप सिंह ने रौब झाड़ने के लिए स्कूलों में दाखिला कराने, रिश्तेदारों और परिवार को फायदा पहुंचाने के लिए फर्जी आईएफएस का खेल खेला था। पुलिस ने दंपती को गिरफ्तार कर नीली बत्ती वाली एसयूवी, यूएनओ का स्टीकर लगी मर्सिडीज, दो वॉकी-टॉकी, पिस्टलनुमा लाइटर, दो लैपटॉप, चार एंड्रॉयड फोन बरामद किए हैं। अमर उजाला ने जोया की गिरफ्तारी की खबर बृहस्पतिवार को प्रकाशित की थी।
एसएसपी वैभव कृष्ण ने सूरजपुर कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में बताया कि जनवरी में जोया खान ने गाजियाबाद निवासी बताकर उनसे संपर्क किया। उसने खुद को संयुक्त सचिव, विदेश मंत्रालय और यूनाइटेड नेशन ऑर्गनाइजेशन काउंसिल, वाशिंगटन डीसी बताकर गौड़ सिटी में गाड़ी में तोड़फोड़ की शिकायत की थी। इस पर एनसीआर दर्ज कर जांच की गई थी। 23 मार्च को महिला ने एसएसपी से एक बार फिर संपर्क कर फ्लैट नंबर-सी 1601 प्रीस्टीन एवन्यू सोसाइटी गौड़ सिटी-2, ग्रेटर नोएडा में निवास बताया और सिक्योरिटी चीफ एटदिरेट यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल डॉट ओआरजी से एस्कॉर्ट के लिए मेल किया। इसके बाद यहां भी उसे एस्कॉर्ट दी जाने लगी। जब एसएसपी से उसकी मुलाकात हुई तो उन्हें बातचीत में कुछ चीजें खटकीं। इस पर उन्होंने जांच के आदेश दिए तो पता चला कि महिला के यूनाइटेड नेंशस के मेल का एड्रेस गोडैडी डोमेन से रजिस्टर्ड था, जिसका भुगतान महिला ने अपने नेट बैंकिंग खाते से किया था। जोया खान और उसके पति ने जिन मोबाइल नंबरों से वीआईपी सेल और एसपी यातायात कार्यालय से संपर्क कर एस्कॉर्ट ली थी वह फर्जी पाए गए। जब क्राइम ब्रांच स्टार टीम के प्रभारी दिनेश सिंह ने जांच की तो मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद टीम बनाकर महिला और उसके पति को गिरफ्तार किया।
मर्सिडीज पर बनाया था यूनाइटेड नेशन का लोगो
महिला ने मर्सिडीज कार पर यूएन लिखा हुआ लोगो लगा रखा था। उसके पास एक नीली बत्ती वाली एसयूवी भी थी। पुलिस ने दोनों गाड़ियां बरामद कर ली हैं।
पीसीएस की तैयारी कर रहा था पति
महिला का पति पीसीएस की तैयारी कर रहा था। इससे पहले वह एसबीआई में पीओ की जॉब कर छोड़ चुका था। महिला राजनीति विज्ञान से पोस्ट ग्रेजुएट है। महिला के पिता मेरठ के जाने माने चिकित्सक हैं और हर्ष के पिता यूपी में बड़े सरकारी अधिकारी हैं।
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यूनाईटेड नेशन के फर्जी आईकार्ड से देती थी झांसा
पुलिस ने जोया खान से यूनाईटेड नेंशस ऑर्गनाईजेशन सिक्योरिटी काउंसिल का पर्सनल फर्जी पहचान पत्र बरामद किया है। इसमें न्यूक्लियर पॉलिसी ऑफिसर स्टेशन-वाशिंगटन डीसी दर्ज है। इसके अलावा यूनाईटेड स्टेट डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट्स के फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस पर फर्जी मोहर लगी है। इस पर वुडवार्ड अपार्टमेंट पीएलएनडब्ल्यू वाशिंगटन डीसी लिखा है। वहीं, एक ड्राइविंग लाइसेंस जोया के नाम से मूल पते मेरठ के नाम पर दर्ज है, जो परिवहन निगम ने जारी किया है।
पीएम की दौरे से पहले चार दिन एस्कॉर्ट लेकर घूमी जोया
- बगैर जांच किए फर्जी आईएफएस जोया को सौंपी एस्कार्ट
- प्रधानमंत्री की सुरक्षा में पुलिस की लापरवाही हुई उजागर
गजेंद्र चौधरी
मेरठ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से चार दिन पहले पुलिस की एस्कॉर्ट लेकर फर्जी आईएफएस महिला जोया खान शहर में घूमी थी। जोया खान और उसके पति हर्ष प्रताप सिंह की गिरफ्तारी के बाद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। छह जिलों की पुलिस जोया को बगैर जांच किए वीआईपी सुविधा मुहैया करा देती थी। कभी किसी ने जानने का भी प्रयास तक नहीं किया तो आखिर जोया कौन है। ये मामला प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक का है। क्योंकि जोया के साथ में चलने वाले पुलिसकर्मी भी जोया को प्रधानमंत्री की सिक्योरिटी में प्रमुख सचिव होना मानते थे।
जोया फर्जी आईडी से एसएसपी को ई-मेल करती थी। हाल की बात करें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से पहले भी पुलिस को जोया खान ने चकमा देकर एस्कॉर्ट ली। 24, 25, 26 और 27 मार्च को रात आठ बजे तक जोया खान के पास पुलिस एस्कॉर्ट और पर्सनल सिक्योरिटी अफसर (पीएसओ) रहा था।
कल पीएम की सुरक्षा में जाना है...
28 मार्च सुबह 11:05 बजे प्रधानमंत्री को सिवाया टोल के पास चुनावी सभा में पहुंचना तय था। 27 मार्च की रात आठ बजे जोया खान पुलिस एस्कार्ट लेकर अपने घर पर पहुंची। जोया ने पुलिस से कहा कि अब तुम जाओ, कल प्रधानमंत्री की सुरक्षा में मुझे जाना है। दोपहर 12 बजे मैं तुम लोगों को खुद कॉल करके बुलाऊंगी। 28 मार्च को कोई कॉल नहीं आई। पुलिस कॉल का इंतजार करती रही।
शहर में घूमती रही जोया खान
24, 25, 26 व 27 मार्च तक जोया पुलिस एस्कॉर्ट लेकर शहर में घूमती रही। सवाल उठने लाजिमी हैं कि आखिर जोया का शहर में अपना रुतबा दिखाने के पीछे क्या मकसद था। जिसकी अभी जांच चल रही है।
नकली पिस्टल से दिखाती थी रुतबा
फर्जी आईएफएस जोया खान नीली बत्ती गाड़ी में चलती थी। उसकी गाड़ी में नकली पिस्टल (लाइटर) और दो वॉकीटॉकी मिले हैं। जिससे वह साथ में चलने वाली एस्कार्ट और पीएसओ पर रुतबा दिखाती थी।
दुकान पर कब्जा करना चाहती थी जोया
जोया अपने पति हर्ष प्रताप को अपना पीए बताती थी। 27 मार्च को जोया एस्कार्ट और पीएसओ आसिफ अली के साथ घंटाघर स्थित एक दुकान पर पहुंची थी। जोया दुकान पर कब्जा करने की बात कर रही थी। जिस पर व्यापारियों ने हंगामा कर दिया था। व्यापारियों ने हल्ला मचाया था कि एक महिला अधिकारी कब्जा कराने आई है। व्यापारी दौड़कर थाने पहुंच गए। पुलिस पहुंची। लेकिन इससे पहले जोया वहां से निकल गई थी।
कंट्रोल रूम से आती थी कॉल
फर्जी आईएफएस अफसर जोया खान सीधे थानेदार के सीयूजी नंबर पर कॉल करती थी। उन्हें हड़काकर पूछती थी कि एस्कॉर्ट कहां रह गई। थानेदार बोलते कि हमें तो कोई संदेश नहीं आया। तभी दो-तीन मिनट बाद कंट्रोल रूम से थानेदार के पास कॉल आती थी कि मैडम को एस्कॉर्ट मुहैया कराओ। दौराला, कंकरखेड़ा, सदर बाजार थाने से वह एस्कॉर्ट ले चुकी थी।
मामले की जड़ तक पहुंचेंगे
फर्जी आईएफएस अधिकारी जोया खान व उसके पति हर्ष प्रताप सिंह को नोएडा में गिरफ्तार कर लिया गया है। उसको एस्कॉर्ट और पीएसओ कैसे मुहैया कराया गया, इसकी भी जांच की जा रही है। पुलिस मामले की जड़ तक पहुंचेगी। -प्रशांत कुमार, एडीजी मेरठ जोन
स्थानीय लोगों और पुलिस में था महिला का रौब
-फर्जी मेल के जरिए चल रहा था धोखाधड़ी का खेल
संदीप वर्मा
ग्रेटर नोएडा। नोएडा, मेरठ, गाजियाबाद, अलीगढ़ और गुरुग्राम में जोया खान ने फर्जी मेल के जरिए आईएफएस और यूनाइटेड नेशन की अधिकारी बनकर एस्कॉर्ट हासिल की हुई थी। आरोपियों को गिरफ्तार करने गई क्राइम ब्रांच और स्टार-2 टीम को बातचीत में जानकारी मिली कि महिला और उसके परिवार के प्रति आस-पास के लोगों में तो क्या स्थानीय पुलिस भी उनके रौब का खौफ था।
महिला यूनाईटेड नेशन के प्रॉक्सी सर्वर का प्रयोग करते हुए अधिकारियों और पुलिस विभाग को मेल भेजती थी। यूनाईटेड नेशन की ओर से मेल देखकर पुलिस विभाग चकमा खा जाता था और महिला को एस्कॉर्ट और गनर उपलब्ध हो जाता था। पिछले डेढ़ वर्षों से यह खेल चल रहा था। तीन बार गौतमबुद्धनगर, आठ से दस बार मेरठ, दो बार गुरुग्राम, दो बार अलीगढ़, तीन बार गाजियाबाद में महिला ने एस्कॉर्ट और गनर हासिल किया। महिला अपने आपको वर्ष 2007 बैच की आईएफएस अधिकारी बताती थी। कम उम्र में 12 वर्ष पुरानी आईएफएस अधिकारी बताना महिला के लिए गलती साबित हुआ और एसएसपी गौतमबुद्धनगर वैभव कृष्ण ने संदेह होने पर महिला की जांच करा ली।
जांच में फर्जी आईएफएस का मामला सामने आने के बाद पुलिस की क्राइम ब्रांच और स्टार-2 टीम ने मेरठ में महिला को पकडने के लिए डेरा डाला। इस दौरान पड़ताल में उसके चिकित्सक पिता और मूलरूप से मेरठ निवासी कानपुर में पोस्टेड उसके पति के पिता का भी नाम था। वहीं, आस-पास के लोगों सहित स्थानीय पुलिस में महिला का रुतबा कायम था। उन्हें लोकल पुलिस ने किसी भी बड़ी कार्रवाई से पहले दस बार सोच लेने का भी सुझाव दिया था।
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गिरफ्तारी के लिए गई टीम पर रौब गांठने की कोशिश
गिरफ्तारी के लिए गई गौतमबुद्धनगर की टीम पर दंपति ने रौब गांठने की कोशिश की। इस दौरान महिला ने उच्च पुलिस अधिकारियों को कॉल कर पुलिस निरीक्षक और उप निरीक्षकों की शिकायत भी की। वहीं, टीम को रौब गांठते हुए निलंबित कराने की भी धमकी दी।
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दंपती में पीसीएस न बनने का अवसाद भी हावी दिखा
महिला के पिता एक बड़े चिकित्सक के रूप में मेरठ में जाने जाते हैं। वहीं, उसके पति के पिता भी बड़े सरकारी अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। पति हर्ष प्रताप सिंह ने एसबीआई पीओ की नौकरी छोड़कर पीसीएस की तैयारी की लेकिन अधिकारी नहीं बन पाया। वहीं, महिला भी कोई बड़ा पद नहीं पा सकी। पूछताछ के दौरान दंपति में इसका अवसाद दिखाई दे रहा था।
वैभव कृष्ण, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक
सबहेड: अमर उजाला ने किया था फर्जी महिला आईएफएस का खुलासा, पति के साथ किया गया है गिरफ्तार
एप से महिला खुद ही पीए बनकर अधिकारियों को फोन करके काम करवाती थी
नीली बत्ती वाली एसयूवी, यूएनओ का स्टीकर लगी मर्सिडीज आदि बरामद
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को चकमा देकर मेरठ से एस्कॉर्ट लेने वाली फर्जी आईएफएस जोया खान प्रॉक्सी मेल और आवाज बदलने वाले एप से पुलिस को झांसा देती थी। महिला के मोबाइल में वॉयस कनवर्टर एप था। इसके जरिये वह खुद ही पीए अनिल शर्मा बनकर अधिकारियों को फोन करती थी और अपने काम कराती थी। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वैभव कृष्ण के मुताबिक, महिला और उसके पति हर्ष प्रताप सिंह ने रौब झाड़ने के लिए स्कूलों में दाखिला कराने, रिश्तेदारों और परिवार को फायदा पहुंचाने के लिए फर्जी आईएफएस का खेल खेला था। पुलिस ने दंपती को गिरफ्तार कर नीली बत्ती वाली एसयूवी, यूएनओ का स्टीकर लगी मर्सिडीज, दो वॉकी-टॉकी, पिस्टलनुमा लाइटर, दो लैपटॉप, चार एंड्रॉयड फोन बरामद किए हैं। अमर उजाला ने जोया की गिरफ्तारी की खबर बृहस्पतिवार को प्रकाशित की थी।
एसएसपी वैभव कृष्ण ने सूरजपुर कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में बताया कि जनवरी में जोया खान ने गाजियाबाद निवासी बताकर उनसे संपर्क किया। उसने खुद को संयुक्त सचिव, विदेश मंत्रालय और यूनाइटेड नेशन ऑर्गनाइजेशन काउंसिल, वाशिंगटन डीसी बताकर गौड़ सिटी में गाड़ी में तोड़फोड़ की शिकायत की थी। इस पर एनसीआर दर्ज कर जांच की गई थी। 23 मार्च को महिला ने एसएसपी से एक बार फिर संपर्क कर फ्लैट नंबर-सी 1601 प्रीस्टीन एवन्यू सोसाइटी गौड़ सिटी-2, ग्रेटर नोएडा में निवास बताया और सिक्योरिटी चीफ एटदिरेट यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल डॉट ओआरजी से एस्कॉर्ट के लिए मेल किया। इसके बाद यहां भी उसे एस्कॉर्ट दी जाने लगी। जब एसएसपी से उसकी मुलाकात हुई तो उन्हें बातचीत में कुछ चीजें खटकीं। इस पर उन्होंने जांच के आदेश दिए तो पता चला कि महिला के यूनाइटेड नेंशस के मेल का एड्रेस गोडैडी डोमेन से रजिस्टर्ड था, जिसका भुगतान महिला ने अपने नेट बैंकिंग खाते से किया था। जोया खान और उसके पति ने जिन मोबाइल नंबरों से वीआईपी सेल और एसपी यातायात कार्यालय से संपर्क कर एस्कॉर्ट ली थी वह फर्जी पाए गए। जब क्राइम ब्रांच स्टार टीम के प्रभारी दिनेश सिंह ने जांच की तो मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद टीम बनाकर महिला और उसके पति को गिरफ्तार किया।
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मर्सिडीज पर बनाया था यूनाइटेड नेशन का लोगो
महिला ने मर्सिडीज कार पर यूएन लिखा हुआ लोगो लगा रखा था। उसके पास एक नीली बत्ती वाली एसयूवी भी थी। पुलिस ने दोनों गाड़ियां बरामद कर ली हैं।
पीसीएस की तैयारी कर रहा था पति
महिला का पति पीसीएस की तैयारी कर रहा था। इससे पहले वह एसबीआई में पीओ की जॉब कर छोड़ चुका था। महिला राजनीति विज्ञान से पोस्ट ग्रेजुएट है। महिला के पिता मेरठ के जाने माने चिकित्सक हैं और हर्ष के पिता यूपी में बड़े सरकारी अधिकारी हैं।
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यूनाईटेड नेशन के फर्जी आईकार्ड से देती थी झांसा
पुलिस ने जोया खान से यूनाईटेड नेंशस ऑर्गनाईजेशन सिक्योरिटी काउंसिल का पर्सनल फर्जी पहचान पत्र बरामद किया है। इसमें न्यूक्लियर पॉलिसी ऑफिसर स्टेशन-वाशिंगटन डीसी दर्ज है। इसके अलावा यूनाईटेड स्टेट डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट्स के फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस पर फर्जी मोहर लगी है। इस पर वुडवार्ड अपार्टमेंट पीएलएनडब्ल्यू वाशिंगटन डीसी लिखा है। वहीं, एक ड्राइविंग लाइसेंस जोया के नाम से मूल पते मेरठ के नाम पर दर्ज है, जो परिवहन निगम ने जारी किया है।
पीएम की दौरे से पहले चार दिन एस्कॉर्ट लेकर घूमी जोया
- बगैर जांच किए फर्जी आईएफएस जोया को सौंपी एस्कार्ट
- प्रधानमंत्री की सुरक्षा में पुलिस की लापरवाही हुई उजागर
गजेंद्र चौधरी
मेरठ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से चार दिन पहले पुलिस की एस्कॉर्ट लेकर फर्जी आईएफएस महिला जोया खान शहर में घूमी थी। जोया खान और उसके पति हर्ष प्रताप सिंह की गिरफ्तारी के बाद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। छह जिलों की पुलिस जोया को बगैर जांच किए वीआईपी सुविधा मुहैया करा देती थी। कभी किसी ने जानने का भी प्रयास तक नहीं किया तो आखिर जोया कौन है। ये मामला प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक का है। क्योंकि जोया के साथ में चलने वाले पुलिसकर्मी भी जोया को प्रधानमंत्री की सिक्योरिटी में प्रमुख सचिव होना मानते थे।
जोया फर्जी आईडी से एसएसपी को ई-मेल करती थी। हाल की बात करें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से पहले भी पुलिस को जोया खान ने चकमा देकर एस्कॉर्ट ली। 24, 25, 26 और 27 मार्च को रात आठ बजे तक जोया खान के पास पुलिस एस्कॉर्ट और पर्सनल सिक्योरिटी अफसर (पीएसओ) रहा था।
कल पीएम की सुरक्षा में जाना है...
28 मार्च सुबह 11:05 बजे प्रधानमंत्री को सिवाया टोल के पास चुनावी सभा में पहुंचना तय था। 27 मार्च की रात आठ बजे जोया खान पुलिस एस्कार्ट लेकर अपने घर पर पहुंची। जोया ने पुलिस से कहा कि अब तुम जाओ, कल प्रधानमंत्री की सुरक्षा में मुझे जाना है। दोपहर 12 बजे मैं तुम लोगों को खुद कॉल करके बुलाऊंगी। 28 मार्च को कोई कॉल नहीं आई। पुलिस कॉल का इंतजार करती रही।
शहर में घूमती रही जोया खान
24, 25, 26 व 27 मार्च तक जोया पुलिस एस्कॉर्ट लेकर शहर में घूमती रही। सवाल उठने लाजिमी हैं कि आखिर जोया का शहर में अपना रुतबा दिखाने के पीछे क्या मकसद था। जिसकी अभी जांच चल रही है।
नकली पिस्टल से दिखाती थी रुतबा
फर्जी आईएफएस जोया खान नीली बत्ती गाड़ी में चलती थी। उसकी गाड़ी में नकली पिस्टल (लाइटर) और दो वॉकीटॉकी मिले हैं। जिससे वह साथ में चलने वाली एस्कार्ट और पीएसओ पर रुतबा दिखाती थी।
दुकान पर कब्जा करना चाहती थी जोया
जोया अपने पति हर्ष प्रताप को अपना पीए बताती थी। 27 मार्च को जोया एस्कार्ट और पीएसओ आसिफ अली के साथ घंटाघर स्थित एक दुकान पर पहुंची थी। जोया दुकान पर कब्जा करने की बात कर रही थी। जिस पर व्यापारियों ने हंगामा कर दिया था। व्यापारियों ने हल्ला मचाया था कि एक महिला अधिकारी कब्जा कराने आई है। व्यापारी दौड़कर थाने पहुंच गए। पुलिस पहुंची। लेकिन इससे पहले जोया वहां से निकल गई थी।
कंट्रोल रूम से आती थी कॉल
फर्जी आईएफएस अफसर जोया खान सीधे थानेदार के सीयूजी नंबर पर कॉल करती थी। उन्हें हड़काकर पूछती थी कि एस्कॉर्ट कहां रह गई। थानेदार बोलते कि हमें तो कोई संदेश नहीं आया। तभी दो-तीन मिनट बाद कंट्रोल रूम से थानेदार के पास कॉल आती थी कि मैडम को एस्कॉर्ट मुहैया कराओ। दौराला, कंकरखेड़ा, सदर बाजार थाने से वह एस्कॉर्ट ले चुकी थी।
मामले की जड़ तक पहुंचेंगे
फर्जी आईएफएस अधिकारी जोया खान व उसके पति हर्ष प्रताप सिंह को नोएडा में गिरफ्तार कर लिया गया है। उसको एस्कॉर्ट और पीएसओ कैसे मुहैया कराया गया, इसकी भी जांच की जा रही है। पुलिस मामले की जड़ तक पहुंचेगी। -प्रशांत कुमार, एडीजी मेरठ जोन
स्थानीय लोगों और पुलिस में था महिला का रौब
-फर्जी मेल के जरिए चल रहा था धोखाधड़ी का खेल
संदीप वर्मा
ग्रेटर नोएडा। नोएडा, मेरठ, गाजियाबाद, अलीगढ़ और गुरुग्राम में जोया खान ने फर्जी मेल के जरिए आईएफएस और यूनाइटेड नेशन की अधिकारी बनकर एस्कॉर्ट हासिल की हुई थी। आरोपियों को गिरफ्तार करने गई क्राइम ब्रांच और स्टार-2 टीम को बातचीत में जानकारी मिली कि महिला और उसके परिवार के प्रति आस-पास के लोगों में तो क्या स्थानीय पुलिस भी उनके रौब का खौफ था।
महिला यूनाईटेड नेशन के प्रॉक्सी सर्वर का प्रयोग करते हुए अधिकारियों और पुलिस विभाग को मेल भेजती थी। यूनाईटेड नेशन की ओर से मेल देखकर पुलिस विभाग चकमा खा जाता था और महिला को एस्कॉर्ट और गनर उपलब्ध हो जाता था। पिछले डेढ़ वर्षों से यह खेल चल रहा था। तीन बार गौतमबुद्धनगर, आठ से दस बार मेरठ, दो बार गुरुग्राम, दो बार अलीगढ़, तीन बार गाजियाबाद में महिला ने एस्कॉर्ट और गनर हासिल किया। महिला अपने आपको वर्ष 2007 बैच की आईएफएस अधिकारी बताती थी। कम उम्र में 12 वर्ष पुरानी आईएफएस अधिकारी बताना महिला के लिए गलती साबित हुआ और एसएसपी गौतमबुद्धनगर वैभव कृष्ण ने संदेह होने पर महिला की जांच करा ली।
जांच में फर्जी आईएफएस का मामला सामने आने के बाद पुलिस की क्राइम ब्रांच और स्टार-2 टीम ने मेरठ में महिला को पकडने के लिए डेरा डाला। इस दौरान पड़ताल में उसके चिकित्सक पिता और मूलरूप से मेरठ निवासी कानपुर में पोस्टेड उसके पति के पिता का भी नाम था। वहीं, आस-पास के लोगों सहित स्थानीय पुलिस में महिला का रुतबा कायम था। उन्हें लोकल पुलिस ने किसी भी बड़ी कार्रवाई से पहले दस बार सोच लेने का भी सुझाव दिया था।
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गिरफ्तारी के लिए गई टीम पर रौब गांठने की कोशिश
गिरफ्तारी के लिए गई गौतमबुद्धनगर की टीम पर दंपति ने रौब गांठने की कोशिश की। इस दौरान महिला ने उच्च पुलिस अधिकारियों को कॉल कर पुलिस निरीक्षक और उप निरीक्षकों की शिकायत भी की। वहीं, टीम को रौब गांठते हुए निलंबित कराने की भी धमकी दी।
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दंपती में पीसीएस न बनने का अवसाद भी हावी दिखा
महिला के पिता एक बड़े चिकित्सक के रूप में मेरठ में जाने जाते हैं। वहीं, उसके पति के पिता भी बड़े सरकारी अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। पति हर्ष प्रताप सिंह ने एसबीआई पीओ की नौकरी छोड़कर पीसीएस की तैयारी की लेकिन अधिकारी नहीं बन पाया। वहीं, महिला भी कोई बड़ा पद नहीं पा सकी। पूछताछ के दौरान दंपति में इसका अवसाद दिखाई दे रहा था।
वैभव कृष्ण, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक