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Noida News: हत्या के प्रयास के मामले में महिला बरी, कोर्ट ने कहा- सबूत नाकाफी
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(अदालत से)
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सत्र अदालत ने वर्ष 2011 के एक गोलीकांड में आरोपी मनवीरी को दोषमुक्त कर दिया। मामले के अनुसार 15 जुलाई 2011 को शाम थाना दनकौर क्षेत्र में मदन सिंह का भाई विजय सिंह अपने खेत पर धान में पानी लगाने जा रहा था। रास्ते में तालाब के पास आरोपी मनवीरी व उसका पुत्र सन्नी मिले। ट्रैक्टर खेत से निकालने को लेकर पहले हुए विवाद पर गाली-गलौज हुई, जिसके बाद महिला के पुत्र ने कथित रूप से तमंचे से फायर कर दिया, जो विजय सिंह की कमर में जा लगी।
आरोप था कि मनवीरी ने ही अपने बेटे को गोली मारने के लिए उकसाया था। घटना के समय नाबालिग पुत्र के खिलाफ मामला किशोर न्यायालय में चला। वहीं मां मनवीरी का मुकदमा सत्र न्यायालय में चला। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के तीन प्रमुख गवाहों में से अभियोजन कहानी का समर्थन नहीं किया। न्यायालय ने कहा कि गवाह की मृत्यु के कारण अप्रतिपरीक्षित बयान को दोषसिद्धि का आधार नहीं बनाया जा सकता। जब तक कि बचाव पक्ष ने जानबूझकर प्रतिपरीक्षा का अवसर न छोड़ा हो। मनवीरी की भूमिका को सिद्ध करने वाला यह इकलौता साक्ष्य अपुष्ट रह गया। इसी आधार पर न्यायालय ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिय।ा
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सत्र अदालत ने वर्ष 2011 के एक गोलीकांड में आरोपी मनवीरी को दोषमुक्त कर दिया। मामले के अनुसार 15 जुलाई 2011 को शाम थाना दनकौर क्षेत्र में मदन सिंह का भाई विजय सिंह अपने खेत पर धान में पानी लगाने जा रहा था। रास्ते में तालाब के पास आरोपी मनवीरी व उसका पुत्र सन्नी मिले। ट्रैक्टर खेत से निकालने को लेकर पहले हुए विवाद पर गाली-गलौज हुई, जिसके बाद महिला के पुत्र ने कथित रूप से तमंचे से फायर कर दिया, जो विजय सिंह की कमर में जा लगी।
आरोप था कि मनवीरी ने ही अपने बेटे को गोली मारने के लिए उकसाया था। घटना के समय नाबालिग पुत्र के खिलाफ मामला किशोर न्यायालय में चला। वहीं मां मनवीरी का मुकदमा सत्र न्यायालय में चला। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के तीन प्रमुख गवाहों में से अभियोजन कहानी का समर्थन नहीं किया। न्यायालय ने कहा कि गवाह की मृत्यु के कारण अप्रतिपरीक्षित बयान को दोषसिद्धि का आधार नहीं बनाया जा सकता। जब तक कि बचाव पक्ष ने जानबूझकर प्रतिपरीक्षा का अवसर न छोड़ा हो। मनवीरी की भूमिका को सिद्ध करने वाला यह इकलौता साक्ष्य अपुष्ट रह गया। इसी आधार पर न्यायालय ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिय।ा
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