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आफत: नोएडा में ऑक्सीजन की आस में भटकते रहे 16 मरीज, एक को एंबुलेंस में दी 'नई जिंदगी'
Wed, 21 Apr 2021 10:15 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 21 Apr 2021 10:15 AM IST
सार
ऑक्सीजन खत्म होने पर निम्स अस्पताल से मरीजों को बस से नोएडा सेक्टर-39 स्थित कोविड अस्पताल भेज दिया गया, लेकिन वहां मरीजों को भर्ती नहीं किया गया।
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ऑक्सीजन सिलेंडर (फाइल फोटो)
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
ग्रेटर नोएडा जिला प्रशासन की लापरवाही के कारण मंगलवार को 30 से अधिक कोरोना संक्रमितों की जान मुश्किल में पड़ गई। आरोप है कि ऑक्सीजन खत्म होने पर निम्स अस्पताल से मरीजों को बस से नोएडा सेक्टर-39 स्थित कोविड अस्पताल भेज दिया गया, लेकिन वहां मरीजों को भर्ती नहीं किया गया।
ग्रेनो वेस्ट की ऐस एस्पायर सोसाइटी निवासी युवक कोरोना संक्रमित हैं। उन्हें कुछ दिन पहले निम्स में भर्ती कराया गया था। उन्होंने बताया कि वार्ड में 30 से अधिक मरीज थे। सभी को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही थी। समय-समय पर ऑक्सीजन भी दी जा रही थी। मंगलवार को सुबह ऑक्सीजन खत्म हो गई।
इसके बाद बस से सभी को नोएडा सेक्टर-39 के कोविड अस्पताल भेजा गया। बस में 16 मरीज थे। आरोप है कि नोएडा में अस्पताल के बाहर करीब दो घंटे
इंतजार किया, लेकिन भर्ती नहीं किया गया। इस दौरान किसी ने पानी और खाने के लिए भी नहीं पूछा। उम्मीद खत्म होने के बाद वह कैब पकड़कर वह घर आ गए। घर पर आकर भांप ली। साथ ही, योग भी किया। उससे आराम मिला।
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बुजुर्गों को उठानी पड़ी काफी दिक्कत
नोएडा के सेक्टर-51 स्थिति केंद्रीय विहार सोसाइटी के 70 वर्षीय बुजुर्ग भी बस में सवार थे। सोसाइटी निवासी शरद जैन ने बताया कि पीड़ित से उनकी फोन पर बात हुई थी। वे करीब दो घंटे तक नोएडा में अस्पताल के बाहर खड़े रहे। वहां अस्पताल के कर्मचारियों के मरीजों के आने की जानकारी से इंकार कर दिया। सभी मरीजों ने काफी आग्रह किया, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। उसके बाद सभी बस से वापस निम्स अस्पताल पहुंच गए। करीब तीन घंटे तक मरीज इधर-उधर भटकते रहे।
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ग्रेनो वेस्ट की ऐस एस्पायर सोसाइटी निवासी युवक कोरोना संक्रमित हैं। उन्हें कुछ दिन पहले निम्स में भर्ती कराया गया था। उन्होंने बताया कि वार्ड में 30 से अधिक मरीज थे। सभी को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही थी। समय-समय पर ऑक्सीजन भी दी जा रही थी। मंगलवार को सुबह ऑक्सीजन खत्म हो गई।
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इसके बाद बस से सभी को नोएडा सेक्टर-39 के कोविड अस्पताल भेजा गया। बस में 16 मरीज थे। आरोप है कि नोएडा में अस्पताल के बाहर करीब दो घंटे
इंतजार किया, लेकिन भर्ती नहीं किया गया। इस दौरान किसी ने पानी और खाने के लिए भी नहीं पूछा। उम्मीद खत्म होने के बाद वह कैब पकड़कर वह घर आ गए। घर पर आकर भांप ली। साथ ही, योग भी किया। उससे आराम मिला।
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बुजुर्गों को उठानी पड़ी काफी दिक्कत
नोएडा के सेक्टर-51 स्थिति केंद्रीय विहार सोसाइटी के 70 वर्षीय बुजुर्ग भी बस में सवार थे। सोसाइटी निवासी शरद जैन ने बताया कि पीड़ित से उनकी फोन पर बात हुई थी। वे करीब दो घंटे तक नोएडा में अस्पताल के बाहर खड़े रहे। वहां अस्पताल के कर्मचारियों के मरीजों के आने की जानकारी से इंकार कर दिया। सभी मरीजों ने काफी आग्रह किया, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। उसके बाद सभी बस से वापस निम्स अस्पताल पहुंच गए। करीब तीन घंटे तक मरीज इधर-उधर भटकते रहे।
सोशल मीडिया पर लोगों ने उतारा गुस्सा
स्वास्थ्य विभाग की इस लापरवाही से नोएडा से लेकर ग्रेटर नोएडा के लोग काफी परेशान हैं। उनका आरोप है कि अगर ऐसी व्यवस्था है तो फिर कोरोना संक्रमण को रोका नहीं जा सकता। लोगों ने सोशल मीडिया पर यह मुद्दा उठाया और प्रशासन की निंदा की। जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
10 मिनट के लिए बाधित हुई कोविड अस्पताल की ऑक्सीजन
सेक्टर-39 स्थित कोविड अस्पताल में सोमवार रात को ऑक्सीजन की कमी हो गई। इससे कुछ देर के लिए ऑक्सीजन की सप्लाई शून्य के बराबर हो गई। करीब 10 मिनट के लिए सप्लाई प्रभावित हुई। इस दौरान अस्पताल प्रबंधन लगातार कंपनी को फोन करता रहा। कोविड अस्पताल के चिकित्सक डॉ. एस मिश्रा ने बताया की रात को ऑक्सीजन की कमी हो गई थी।
अस्पताल प्रशासन लगातार कंपनी से संपर्क कर रहे थे। हालांकि पूरी तरह से सप्लाई बंद नहीं हुई थी। सिलेंडर कम और मरीज ज्यादा होने से सप्लाई कम आ रही थी। अस्पताल की टीम एनॉक्स कंपनी गई थी। उसके बाद ऑक्सीजन मिल गई और सब सामान्य हो गया। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, जिले में रोजाना 60 टन ऑक्सीजन की जरूरत है, लेकिन सिर्फ आधी ऑक्सीजन का ही इंतजाम हो पा रहा है।
जान पर आफत, एंबुलेंस में लिटाकर देनी पड़ी ऑक्सीजन
ग्रेटर नोएडा जिले में बेड और अन्य संसाधनों की कमी से कोविड मरीजों की जान पर बन आई है। ऑक्सीजन का स्तर 80 के नीचे पहुंचने के बाद भी मरीजों को बेड नहीं मिल पा रहे हैं। मजबूरी में लोग अस्पतालों से निवेदन कर घर पर एडवांस लाइफ स्पोर्टिंग एंबुलेंस मंगाकर मरीज को ऑक्सीजन दे रहे हैं, ताकि जान बचाई जा सके।
10 मिनट के लिए बाधित हुई कोविड अस्पताल की ऑक्सीजन
सेक्टर-39 स्थित कोविड अस्पताल में सोमवार रात को ऑक्सीजन की कमी हो गई। इससे कुछ देर के लिए ऑक्सीजन की सप्लाई शून्य के बराबर हो गई। करीब 10 मिनट के लिए सप्लाई प्रभावित हुई। इस दौरान अस्पताल प्रबंधन लगातार कंपनी को फोन करता रहा। कोविड अस्पताल के चिकित्सक डॉ. एस मिश्रा ने बताया की रात को ऑक्सीजन की कमी हो गई थी।
अस्पताल प्रशासन लगातार कंपनी से संपर्क कर रहे थे। हालांकि पूरी तरह से सप्लाई बंद नहीं हुई थी। सिलेंडर कम और मरीज ज्यादा होने से सप्लाई कम आ रही थी। अस्पताल की टीम एनॉक्स कंपनी गई थी। उसके बाद ऑक्सीजन मिल गई और सब सामान्य हो गया। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, जिले में रोजाना 60 टन ऑक्सीजन की जरूरत है, लेकिन सिर्फ आधी ऑक्सीजन का ही इंतजाम हो पा रहा है।
जान पर आफत, एंबुलेंस में लिटाकर देनी पड़ी ऑक्सीजन
ग्रेटर नोएडा जिले में बेड और अन्य संसाधनों की कमी से कोविड मरीजों की जान पर बन आई है। ऑक्सीजन का स्तर 80 के नीचे पहुंचने के बाद भी मरीजों को बेड नहीं मिल पा रहे हैं। मजबूरी में लोग अस्पतालों से निवेदन कर घर पर एडवांस लाइफ स्पोर्टिंग एंबुलेंस मंगाकर मरीज को ऑक्सीजन दे रहे हैं, ताकि जान बचाई जा सके।
डेल्टा टू में रहने वाले सुनील गुप्ता को भी ससुर वेद प्रकाश गुप्ता की जान बचाने का ऐसा प्रयास करना पड़ा। हालांकि, इसके बाद भी उनकी जान नहीं बच पाई। परिजनों का कहना है कि यदि समय पर बेड मिल जाता तो जान बच सकती थी।
सुनील गुप्ता ने बताया कि घर में दो लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई थी। दोनों को क्वारंटीन किया गया था। इसमें 85 वर्षीय ससुर भी शामिल थे। लगातार उनके ऑक्सीजन के स्तर की जांच कर रहे थे। दो दिनों तक अस्पताल में भर्ती कराने के लिए चक्कर काटते रहे। सरकारी अस्पताल भी गए, लेकिन बेड की कमी बताकर लौटा दिया गया।
18 अप्रैल की शाम के बाद से उनका ऑक्सीजन का स्तर लगातार गिरता गया। जिस अस्पताल में फोन करते, वहां पर बेड न होने की बात कही जा रही थी। मजबूरी में निवेदन के बाद एक एंबुलेंस मंगवाई, ताकि उसमें मरीज को लिटाकर ऑक्सीजन दी जा सके, लेकिन इसके बाद हम उनकी जान नहीं बचा पाए।
ऑक्सीजन केवल हवा नहीं, बल्कि दवा है
जिले के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी महसूस होने लगी है। पारस चेस्ट इंस्टीट्यूट के एचओडी और सीनियर पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. अरुणेश कुमार ने बताया कि ऑक्सीजन केवल हवा नहीं बल्कि दवा भी होती है। इसका सही इस्तेमाल बहुत जरूरी है। अगर शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ जाए तो कार्बन डाई ऑक्साइड की भी मात्रा भी बढ़ जाती है। इससे दिल और दिमाग पर असर पड़ता है।
सुनील गुप्ता ने बताया कि घर में दो लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई थी। दोनों को क्वारंटीन किया गया था। इसमें 85 वर्षीय ससुर भी शामिल थे। लगातार उनके ऑक्सीजन के स्तर की जांच कर रहे थे। दो दिनों तक अस्पताल में भर्ती कराने के लिए चक्कर काटते रहे। सरकारी अस्पताल भी गए, लेकिन बेड की कमी बताकर लौटा दिया गया।
18 अप्रैल की शाम के बाद से उनका ऑक्सीजन का स्तर लगातार गिरता गया। जिस अस्पताल में फोन करते, वहां पर बेड न होने की बात कही जा रही थी। मजबूरी में निवेदन के बाद एक एंबुलेंस मंगवाई, ताकि उसमें मरीज को लिटाकर ऑक्सीजन दी जा सके, लेकिन इसके बाद हम उनकी जान नहीं बचा पाए।
ऑक्सीजन केवल हवा नहीं, बल्कि दवा है
जिले के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी महसूस होने लगी है। पारस चेस्ट इंस्टीट्यूट के एचओडी और सीनियर पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. अरुणेश कुमार ने बताया कि ऑक्सीजन केवल हवा नहीं बल्कि दवा भी होती है। इसका सही इस्तेमाल बहुत जरूरी है। अगर शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ जाए तो कार्बन डाई ऑक्साइड की भी मात्रा भी बढ़ जाती है। इससे दिल और दिमाग पर असर पड़ता है।
अगर किसी को सांस लेने में दिक्कत हो रही है या फिर उसका ऑक्सीजन लेवल गिर रहा है तो बिना किसी डॉक्टर के सलाह के ऑक्सीजन नहीं देनी चाहिए। केवल डॉक्टर ही बता सकता है कि ऑक्सीजन लेवल गिरने की क्या वजह है। लोगों ने बिना सोचे ऑक्सीजन सिलिंडरों को खरीदकर रख लिया है। इससे बाजार में इसकी कमी आ गई है। वहीं, जरूरतमंद लोगों को यह नहीं मिल पा रही है। सरकार को ऐसा व्यवस्था करनी चाहिए कि बिना डॉक्टर के पर्चे के ऑक्सीजन कोई ना खरीद पाए।
जिले के अस्पतालों में करीब 2900 के बेड हैं। मरीजों की संख्या को देखते हुए बेड की संख्या बढ़ाई जा रही है। कई अस्पतालों में बेड बढ़ाएं भी गए हैं। स्वास्थ्य विभाग सभी मरीजों को बेहतर इलाज देने में जुटा हुआ है।
- डॉ. दीपक ओहरी, सीएमओ
जिले के अस्पतालों में करीब 2900 के बेड हैं। मरीजों की संख्या को देखते हुए बेड की संख्या बढ़ाई जा रही है। कई अस्पतालों में बेड बढ़ाएं भी गए हैं। स्वास्थ्य विभाग सभी मरीजों को बेहतर इलाज देने में जुटा हुआ है।
- डॉ. दीपक ओहरी, सीएमओ