सांप्रदायिक हमला मामला: 18 माह बाद केस दर्ज, वारदात के दिन 3 किमी तक सक्रिय मोबाइल की हो रही जांच
आरोप है कि बदमाशों ने उनकी धार्मिक पहचान देखकर टिप्पणी की और कार में कई बार उनकी दाढ़ी नोची थी। बदमाशों ने उनके पहनावे और पहचान को देखकर गाली गलौच किया और लगातार दाढ़ी पर टिप्पणी की थी।
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट के नोटिस पर वारदात के 18 महीने बाद सांप्रदायिक हमले का मुकदमा दर्ज कर नोएडा पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब वारदात के दिन बॉटेनिकल गार्डेन से महामाया के बीच तीन किमी क्षेत्र में सक्रिय मोबाइल की जांच कर रही है। मोबाइल डंप डाटा से नंबर निकालकर पुलिस की तकनीकी टीम जांच में जुट गई है।
दिल्ली के जाकिर नगर निवासी कजीम अहमद 4 जुलाई 2021 की सुबह सेक्टर-37 स्थित बॉटेनिकल गार्डेन पहुंचे थे। कैब सवार बदमाशों ने उन्हें अलीगढ़ जाने के लिए लिफ्ट दी थी। बाद में चार बदमाशों ने कार लॉक कर मारपीट की और पेचकस से वार कर घायल कर दिया।
आरोप है कि बदमाशों ने उनकी धार्मिक पहचान देखकर टिप्पणी की और कार में कई बार उनकी दाढ़ी नोची थी। बदमाशों ने उनके पहनावे और पहचान को देखकर गाली गलौच किया और लगातार दाढ़ी पर टिप्पणी की थी। करीब 15 मिनट के बाद सेक्टर-37 से तीन किमी दूर उन्हें गाड़ी से फेंक दिया गया था। उस वक्त इस मामले में नोएडा पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की थी।
4 जुलाई 2021 का डाटा खंगाल रही पुलिस
अब सुप्रीम कोर्ट के दखल देने के बाद 15 जनवरी को कोतवाली सेक्टर-39 में रिपोर्ट दर्ज की गई है। मामले की जांच क्राइम ब्रांच की टीम कर रही है। पुलिस की टीम 4 जुलाई 2021 के दिन बॉटेनिकल गार्डेन से महामाया के बीच घटना के वक्त एक्टिव मोबाइल का डाटा निकाल रही है।
क्या होता है मोबाइल डंप डाटा
पुलिस के मुताबिक जिस स्थान पर घटना हुई है। वहां पीड़ित और आरोपियों के मोबाइल लोकेशन को मैच कराया जाता है। दोनों मोबाइल के लोकेशन का मिलान होने पर संदिग्धों की पहचान की जाती है। इसके बाद उन संदिग्धों की पुलिस अपने स्तर से अलग-अलग तरीके व इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के आधार पर जांच करती है। यह प्रक्रिया सामान्य तौर पर जटिल होती है। मोबाइल या कॉल डंप डाटा एक मोबाइल फोन टावर से होने वाले कॉल का विवरण होता है, जिसमें शक के आधार पर पुलिस अपराधी या आरोपी का नंबर पता लगाती है। आमतौर पर कॉल डंप का सहारा वैसे मामलों में लिया जाता है जो ब्लाइंड होते हैं या जिनमें सुराग नहीं मिलता।
दो साल से चल रहे कैब की भी जांच
पुलिस इस एंगल पर काम कर रही है कि जिस कैब में यह वारदात हुई है। वह कैब बॉटेनिकल गार्डेन से लगातार चोरी छिपे चलती है या कभी-कभी लूट के इरादे से बदमाश उसे चलाते थे। पुलिस डेढ़ साल पहले से इस रूट पर चलने वाली कैब के बारे में भी जानकारी जुटाकर डेटाबेस तैयार कर रही है। पुलिस की टीम टेक्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के आधार पर मामले की जांच में जुटी है।