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चिटहेरा भूमि घोटाला : पट्टों की जमीन के मुआवजे की होगी वसूली

Wed, 18 May 2022 01:48 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 18 May 2022 01:48 AM IST
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Chithera land scam: Compensation for leased land will be recovered
ग्रेटर नोएडा। जिला प्रशासन चिटहेरा भूमि घोटाले में अब भूमाफिया से पट्टों की जमीन के मुआवजे की वसूली करेगा। इस संबंध में मंगलवार को जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने संबंधित अफसरों को आदेश जारी कर दिया। उन्होंने जमीन से जुड़े सभी दस्तावेज को ठीक करने, दोषी अफसरों व यशपाल तोमर व उसके गिरोह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और अफसरों के खिलाफ शासन को रिपोर्ट भेजने का आदेश भी दिया है।
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अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वंदिता श्रीवास्तव ने चिटहेरा भूमि घोटाले की जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी थी। मंगलवार को जिलाधिकारी ने अफसरों के साथ रिपोर्ट पर बैठक की। जिलाधिकारी ने बताया कि पट्टों का आवंटन गलत हुआ था। नियमों के खिलाफ जाकर क्रय-विक्रय किया गया। जिन लोगों ने पट्टों का मुआवजा उठाया है। उन सभी के खिलाफ रिकवरी सर्टिफिकेट जारी कर मुआवजे की धनराशि वसूल की जाएगी। पट्टों की जमीन का करीब 32 करोड़ रुपये मुआवजा उठाया जा चुका है जो ग्रेनो प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से लिया गया है। प्रशासन भी मुआवजे का आकलन कर रहा है। पट्टों की करीब 25 हेक्टेयर जमीन है। इसमें कुछ ग्राम समाज और कुछ प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र की जमीन है। जिलाधिकारी ने बताया कि जमीन ग्रेनो प्राधिकरण के सुपुर्द की जाएगी। ग्राम समाज की जमीन की देखभाल की जिम्मेदारी प्राधिकरण के पास है।
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पट्टा रजिस्टर गायब होने व रकबा बढ़ाने में दर्ज होगा केस
एडीएम वंदिता श्रीवास्तव ने बताया कि तहसील दादरी के रिकॉर्ड रूम से चिटहेरा गांव का पट्टा रजिस्टर गायब है। मामले में संबंधित रजिस्टर कानूनगो के खिलाफ एफआईआर होगी। वहीं, मेरठ में पट्टा पत्रावली में रकबा बढ़ाया गया था। वहां संबंधित दोषी कर्मचारी पर भी एफआईआर होगी। इस संबंध में दादरी एसडीएम को आदेश दिया गया है।
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एसडीएम और तहसीलदार को दोषी माना
एडीएम की जांच रिपोर्ट में पट्टा आवंटन गलत माना गया है। इस पर वर्ष 1997 के तत्कालीन एसडीएम को दोषी माना गया है। साथ ही, वर्ष 2015 में तहसीलदार ने एडीएम हापुड को जांच रिपोर्ट भेजी थी। संबंधित तहसीलदार को भी दोषी माना गया है। इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी। साथ ही, शासन को भी रिपोर्ट भेजी जाएगी।
राजस्व दस्तावेज में किया जाएगा सुधार
एडीएम ने बताया कि राजस्व अभिलेखों में पट्टों की जमीन का रकबा बढ़ा दिया गया था। साथ ही, खतौनी में भी बढ़ा हुआ रकबा दर्ज कर दिया गया था। इन अभिलेखों को दुरुस्त किया जाएगा। बढ़ा हुआ रकबा हटाया जाएगा। वहीं, तहसील दादरी में चिटहेरा गांव की पट्टा पत्रावली फिर से तैयार की जाएगी।
पट्टा बहाली के आदेश को दी जाएगी चुनौती
एडीएम हापुड ने वर्ष 2015 में चिटहेरा गांव के पट्टों को बहाल कर दिया था। जांच रिपोर्ट में इन बहाली को गलत माना गया है। जिलाधिकारी ने फैसला लिया है कि इस आदेश को मेरठ आयुक्त के यहां पर चुनौती दी जाएगी। पट्टों के आवंटन को निरस्त कराने की पैरवी की जाएगी। इस संबंध में डीजीसी राजस्व को जिम्मेदारी दी है।
वर्ष 2015 व बाद में तैनात अफसरों पर भी लटकी तलवार
घोटाले में भूमाफिया का साथ देने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी गाज गिरेगी। जिलाधिकारी ने संबंधित अफसर और कर्मचारियों की रिपोर्ट शासन को भेजने का आदेश दिया है। एडीएम ने बताया कि वर्ष 2015 से 2020 तक तहसील में तैनात रहे अफसरों की सूची शासन को भेजी जाएगी। वहीं से इन पर कार्रवाई होगी। यह सूची शासन के साथ-साथ नियुक्ति विभाग और राजस्व विभाग को भी भेजी जाएगी।

यशपाल एंड कंपनी पर भी दर्ज होगा केस
घोटाले का मुख्य आरोपी यशपाल तोमर है। उसने गिरोह मनाकर पट्टों की जमीन को खरीदा। प्रशासन ने यशपाल को भूमाफिया घोषित किया था। अब प्रशासन यशपाल और उसके गिरोह के खिलाफ धोखाधड़ी, राजस्व संहिता समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज कराएगा।
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