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Noida News: शतरंज बने पाठ्यक्रम का हिस्सा, बढ़ेगी बौद्धिक क्षमता
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- यूपी चेस स्पोर्ट्स शतरंज एसोसिएशन के संयुक्त सचिव अतुल निगम ने कहा
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। स्कूलों में अमर उजाला की ओर से शतरंज को लेकर की गई पहल खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाएगी। देश का शतरंज में भविष्य उज्ज्वल है। कक्षा पांच तक बच्चों को शतरंज खिलाना और उसके बारे में जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है। अब पाठ्यक्रम में इसको शामिल कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। यह बातें यूपी चेस स्पोर्ट्स शतरंज एसोसिएशन के संयुक्त सचिव और गौतमबुद्ध नगर चेस स्पोर्ट्स एसोसिएशन के सचिव अतुल निगम ने कही।
उन्होंने कहा कि शतरंज को लेकर जागरूकता बढ़ाने में अमर उजाला अहम भूमिका निभा रहा है। शतरंज को विषय के तौर पर अब पढ़ाया जाना समय की मांग है। शतरंज खेलने वाले बच्चे की बौद्धिक क्षमता बेहतर हो जाती है। बच्चों के मानसिक विकास में भी शतरंज अहम साबित हो रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में शतरंज के लिए 54 जिलों में एसोसिएशन का गठन हो चुका है। बचे जनपदों में भी कार्य किए जा रहे हैं। इस तरीके की प्रतियोगिता से 50 खिलाड़ियों का भी हर साल राष्ट्रीय स्तर पर चयन हो जाता है तो शतरंज प्रतियोगिता सफल साबित हो जाएगी। जिले में दूसरी बार आयोजित की जा रही प्रतियोगिता के बाद से बच्चों में शतरंज को लेकर रुझान बढ़ा है।
गौतमबुद्ध नगर चेस स्पोर्ट्स एसोसिएशन की उपाध्यक्ष नीरज सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में किशोरों में परीक्षा-दबाव, डिजिटल निर्भरता और मानसिक तनाव गंभीर सामाजिक चुनौती के रूप में उभर रहे हैं। ऐसे में खेल-नीति और शिक्षा-नीति को केवल शारीरिक उपलब्धियों तक सीमित न रखकर मानसिक स्वास्थ्य के सशक्त साधन के रूप में विकसित किया जाना आवश्यक है। शतरंज जैसे बौद्धिक खेल कम संसाधनों में बच्चों की एकाग्रता, भावनात्मक संतुलन और निर्णय-क्षमता को सुदृढ़ करते हैं। यदि नीति-स्तर पर शतरंज को स्कूल शिक्षा प्रणाली में संरचित, अनिवार्य और प्रशिक्षित मॉडल के साथ शामिल किया जाए, तो उत्तर प्रदेश में मानसिक रूप से स्वस्थ, आत्मनिर्भर और जिम्मेदार युवा पीढ़ी का निर्माण संभव है।
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शिक्षकों को भी शतरंज का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए। जब उन्हें शतरंज के कायदे कानूनों की जानकारी होगी तो वह काफी बेहतर कर पाएंगे। अमर उजाला की पहल काफी अच्छी है। चेस इन एजुकेशन पर अब काम किया जा रहा है। जो बेहद जरूरी हो गया है। - ललित कपूर, अंतरराष्ट्रीय आर्बिटर
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। स्कूलों में अमर उजाला की ओर से शतरंज को लेकर की गई पहल खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाएगी। देश का शतरंज में भविष्य उज्ज्वल है। कक्षा पांच तक बच्चों को शतरंज खिलाना और उसके बारे में जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है। अब पाठ्यक्रम में इसको शामिल कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। यह बातें यूपी चेस स्पोर्ट्स शतरंज एसोसिएशन के संयुक्त सचिव और गौतमबुद्ध नगर चेस स्पोर्ट्स एसोसिएशन के सचिव अतुल निगम ने कही।
उन्होंने कहा कि शतरंज को लेकर जागरूकता बढ़ाने में अमर उजाला अहम भूमिका निभा रहा है। शतरंज को विषय के तौर पर अब पढ़ाया जाना समय की मांग है। शतरंज खेलने वाले बच्चे की बौद्धिक क्षमता बेहतर हो जाती है। बच्चों के मानसिक विकास में भी शतरंज अहम साबित हो रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में शतरंज के लिए 54 जिलों में एसोसिएशन का गठन हो चुका है। बचे जनपदों में भी कार्य किए जा रहे हैं। इस तरीके की प्रतियोगिता से 50 खिलाड़ियों का भी हर साल राष्ट्रीय स्तर पर चयन हो जाता है तो शतरंज प्रतियोगिता सफल साबित हो जाएगी। जिले में दूसरी बार आयोजित की जा रही प्रतियोगिता के बाद से बच्चों में शतरंज को लेकर रुझान बढ़ा है।
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गौतमबुद्ध नगर चेस स्पोर्ट्स एसोसिएशन की उपाध्यक्ष नीरज सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में किशोरों में परीक्षा-दबाव, डिजिटल निर्भरता और मानसिक तनाव गंभीर सामाजिक चुनौती के रूप में उभर रहे हैं। ऐसे में खेल-नीति और शिक्षा-नीति को केवल शारीरिक उपलब्धियों तक सीमित न रखकर मानसिक स्वास्थ्य के सशक्त साधन के रूप में विकसित किया जाना आवश्यक है। शतरंज जैसे बौद्धिक खेल कम संसाधनों में बच्चों की एकाग्रता, भावनात्मक संतुलन और निर्णय-क्षमता को सुदृढ़ करते हैं। यदि नीति-स्तर पर शतरंज को स्कूल शिक्षा प्रणाली में संरचित, अनिवार्य और प्रशिक्षित मॉडल के साथ शामिल किया जाए, तो उत्तर प्रदेश में मानसिक रूप से स्वस्थ, आत्मनिर्भर और जिम्मेदार युवा पीढ़ी का निर्माण संभव है।
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शिक्षकों को भी शतरंज का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए। जब उन्हें शतरंज के कायदे कानूनों की जानकारी होगी तो वह काफी बेहतर कर पाएंगे। अमर उजाला की पहल काफी अच्छी है। चेस इन एजुकेशन पर अब काम किया जा रहा है। जो बेहद जरूरी हो गया है। - ललित कपूर, अंतरराष्ट्रीय आर्बिटर