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बुकिंग के तीन माह बाद ही एसोसिएशन बना सकेंगे खरीदार
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ग्रेटर नोएडा (नवीन कुमार)। उत्तर प्रदेश भूसंपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) ने रियल एस्टेट सेक्टर की परियोजनाओं में अपार्टमेंट ऑनर्स एसोसिएशन (एओए) के गठन और रखरखाव करने के लिए दिशा-निर्देश तैयार किया है। संस्तुति के लिए दिशा-निर्देश प्रदेश सरकार के पास भेजा गया है। वहीं से प्रदेश में गाइडलाइन लागू होंगी। दिशा-निर्देश के एक नियम के तहत बुकिंग के तीन माह बाद ही खरीदार एसोसिएशन बना सकेंगे।
परियोजनाओं में एसोसिएशन ऑफ अलॉटीज, रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन और अपार्टमेंट ऑनर्स एसोसिएशन के गठन पर काफी विवाद रहता है। साथ ही रखरखाव से संबंधित भी काफी झगड़े होते हैं। खरीदारों की इस परेशानी को देखकर यूपी रेरा ने अगस्त, 2020 में गाइडलाइन तैयार की थी। जिस पर खरीदार, एसोसिएशन और बिल्डरों से 21 दिन में आपत्ति या सुझाव मांगी गई थी।
इस वर्ष 12 जनवरी को बिल्डरों और 20 जनवरी को खरीदारों के साथ बैठक की थी। जहां दिशा-निर्देशों पर विस्तृत चर्चा की गई और उनके सुझावों पर अमल किया गया। 5 फरवरी को 56वीं बैठक में यूपी रेरा ने दिशा-निर्देशों को मंजूरी दे दी। अफसरों ने बताया कि फाइल प्रदेश सरकार के पास भेजी गई है। संस्तुति देने के बाद प्रदेश सरकार ही एओए के गठन और रखरखाव की गाइडलाइन जारी करेगी।
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दिशा-निर्देश के तहत अब खरीदार बुकिंग के तीन माह बाद ही एसोसिएशन ऑफ एलॉटीज का गठन कर सकते हैं। इसके लिए प्रोजेक्ट के खरीदारों का बहुमत होना जरूरी होगा। यह एसोसिएशन बाद में सोसाइटी में रखरखाव की जिम्मेदारी भी संभाल सकती है। साथ ही प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य पर भी निगरानी रखेगी। वहीं, कब्जा मिलने के बाद भी एओए के गठन के नियमों की स्थिति स्पष्ट की है।
अभी तक होती है नियमों की अनदेखी
एओए का गठन और रखरखाव में अभी तक यूपी अपार्टमेंट एक्ट की अनदेखी होती है। बिल्डर पालन नहीं करते है, लेकिन सरकार की तरफ से पहली बार अलग से एक गाइडलाइन जारी होगी। इसके बाद बिल्डर मनमानी नहीं कर सकेंगे। काम पूरा करने से पहले की हैंडओवर करने की चालाकी नहीं दिखा सकेंगे।
एक साल तक रखरखाव की जिम्मेदारी बिल्डर की
दिशा-निर्देश में यूपी रेरा ने साफ किया है कि एक साल का मेंटेनेंस शुल्क फ्लैट की कीमत में शामिल होता है। ऐसे में सोसाइटी के रखरखाव की जिम्मेदारी एक साल तक बिल्डर की होगी। पूर्णता प्रमाणपत्र मिलने के बाद यह व्यवस्था लागू होगी। अगर एक साल में एओए का गठन नहीं होता है तो फिर बिल्डर दूसरे साल में रखरखाव शुल्क में 10 प्रतिशत की वृद्धि कर सकता है। वहीं एओए का पंजीकरण बिल्डर को कराना होगा।
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परियोजनाओं में एसोसिएशन ऑफ अलॉटीज, रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन और अपार्टमेंट ऑनर्स एसोसिएशन के गठन पर काफी विवाद रहता है। साथ ही रखरखाव से संबंधित भी काफी झगड़े होते हैं। खरीदारों की इस परेशानी को देखकर यूपी रेरा ने अगस्त, 2020 में गाइडलाइन तैयार की थी। जिस पर खरीदार, एसोसिएशन और बिल्डरों से 21 दिन में आपत्ति या सुझाव मांगी गई थी।
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इस वर्ष 12 जनवरी को बिल्डरों और 20 जनवरी को खरीदारों के साथ बैठक की थी। जहां दिशा-निर्देशों पर विस्तृत चर्चा की गई और उनके सुझावों पर अमल किया गया। 5 फरवरी को 56वीं बैठक में यूपी रेरा ने दिशा-निर्देशों को मंजूरी दे दी। अफसरों ने बताया कि फाइल प्रदेश सरकार के पास भेजी गई है। संस्तुति देने के बाद प्रदेश सरकार ही एओए के गठन और रखरखाव की गाइडलाइन जारी करेगी।
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दिशा-निर्देश के तहत अब खरीदार बुकिंग के तीन माह बाद ही एसोसिएशन ऑफ एलॉटीज का गठन कर सकते हैं। इसके लिए प्रोजेक्ट के खरीदारों का बहुमत होना जरूरी होगा। यह एसोसिएशन बाद में सोसाइटी में रखरखाव की जिम्मेदारी भी संभाल सकती है। साथ ही प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य पर भी निगरानी रखेगी। वहीं, कब्जा मिलने के बाद भी एओए के गठन के नियमों की स्थिति स्पष्ट की है।
अभी तक होती है नियमों की अनदेखी
एओए का गठन और रखरखाव में अभी तक यूपी अपार्टमेंट एक्ट की अनदेखी होती है। बिल्डर पालन नहीं करते है, लेकिन सरकार की तरफ से पहली बार अलग से एक गाइडलाइन जारी होगी। इसके बाद बिल्डर मनमानी नहीं कर सकेंगे। काम पूरा करने से पहले की हैंडओवर करने की चालाकी नहीं दिखा सकेंगे।
एक साल तक रखरखाव की जिम्मेदारी बिल्डर की
दिशा-निर्देश में यूपी रेरा ने साफ किया है कि एक साल का मेंटेनेंस शुल्क फ्लैट की कीमत में शामिल होता है। ऐसे में सोसाइटी के रखरखाव की जिम्मेदारी एक साल तक बिल्डर की होगी। पूर्णता प्रमाणपत्र मिलने के बाद यह व्यवस्था लागू होगी। अगर एक साल में एओए का गठन नहीं होता है तो फिर बिल्डर दूसरे साल में रखरखाव शुल्क में 10 प्रतिशत की वृद्धि कर सकता है। वहीं एओए का पंजीकरण बिल्डर को कराना होगा।