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बीएसए ने बिना मान्यता के चल रहे 16 स्कूल कराए बंद
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ग्रेटर नोएडा। जिले में कई वर्षों से बिना मान्यता के चल रहे स्कूलों पर आखिरकार शिक्षा विभाग की नींद टूटी और निरीक्षण का जिम्मा स्वयं बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) एश्वर्य लक्ष्मी ने उठाते हुए 16 स्कूलों को बंद करा दिया। बुधवार सुबह अचानक शासन से आए आदेश के बाद बेसिक शिक्षा विभाग हरकत में आया। इस दौरान जिले के चारों शिक्षा खंडों में कार्रवाई की गई। इन स्कूलों में लगभग 1500 बच्चे पढ़ रहे थे। स्कूलों को सख्त हिदायत दी गई है कि यदि दोबारा इन्हें खोला तो एक लाख रुपये जुर्माना लगेगा और और रिपोर्ट भी दर्ज कराई जाएगी।
दरअसल, जिले में बड़ी संख्या में बिना मान्यता के स्कूल चल रहे हैं। कई बार कार्रवाई के बाद भी विभागीय लापरवाही के कारण यह स्कूल दोबारा खुल जाते हैं। काफी दिनों से आ रही लगातार शिकायतों और उच्च अधिकारियों के निर्देशों के बाद भी इन पर लगाम नहीं लग पा रही थी। वहीं, शासन से लगातार इन पर कार्रवाई के लिए भी लिखा जा रहा था, लेकिन अधिकारियों की ओर से समय पर कोई कार्रवाई नहीं करने से संख्या लगातार बढ़ती जा रही थी। शासन से आए आदेश के बाद बीएसए ने नोएडा (बिसरख ब्लॉक क्षेत्र) के स्कूलों का निरीक्षण किया तो मान्यता के कागजात ही नहीं मिले। कुल 16 स्कूलों पर कार्रवाई में नोएडा के 10 स्कूल शामिल रहे, जबकि एक दनकौर ब्लॉक, दो दादरी ब्लॉक और तीन स्कूल जेवर ब्लॉक के थे।
जिले में 200 से अधिक स्कूल हैं
जिले में करीब 200 स्कूल बिना मान्यता के चल रहे हैं। इनमें 70 फीसदी स्कूल नोएडा क्षेत्र में हैं जिनमें नर्सरी से लेकर कक्षा आठ तक बच्चे पढ़ते हैं। कुछ स्कूल तो 10वीं-12वीं तक की पढ़ाई कराते हैं, जबकि परीक्षा फार्म जुगाड़ से भरवाकर दूसरे मान्यता प्राप्त स्कूलों से परीक्षा दिलाते हैं। कई बार फार्म स्वीकृत नहीं होने की स्थिति में बच्चों का भविष्य खराब हो जाता है। पहले भी कई ऐसे मामले सामने आए हैं। ट्रांसफर सर्टिफिकेट के नाम पर भी ऐसे स्कूल अभिभावकों को परेशान करते हैं और बच्चों का भविष्य दांव पर लग जाता है।
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निर्देशों के बाद भी नहीं की बीईओ ने जांच
बेसिक शिक्षा विभाग से जिले के चारों ब्लॉकों में मौजूद ब्लॉक एजूकेशन अधिकारियों (बीईओ) को क्षेत्र का निरीक्षण कर बिना मान्यता प्राप्त स्कूलों की जानकारी और कार्रवाई करने का निर्देश दिए थे। एक माह बीतने के बाद भी चारों ब्लॉकों के बीईओ ने कोई भी जवाब नहीं दिया। इससे साफ है कि ऐसे अधिकारियों की ओर से ऐसे स्कूलों को शरण दी जा रही थी और आखिरकार बेसिक शिक्षा अधिकारी को स्वयं उतरकर कमान स्वयं भी संभालनी पड़ी।
आसपास के परिषदीय स्कूलों में होगा दाखिला
बंद कराए गए 16 स्कूलों में लगभग 70 से लेकर 120 तक विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। माना जा रहा है कि करीब डेढ़ हजार विद्यार्थियों को इन स्कूलों में पढ़ाया जा रहा था। बीएसए ने यहां निकट में चल रहे परिषदीय विद्यालय के शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि इन बच्चों का परिषदीय विद्यालयों में नामांकन कराया जाए, ताकि बच्चों का वर्ष खराब न हो।
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दरअसल, जिले में बड़ी संख्या में बिना मान्यता के स्कूल चल रहे हैं। कई बार कार्रवाई के बाद भी विभागीय लापरवाही के कारण यह स्कूल दोबारा खुल जाते हैं। काफी दिनों से आ रही लगातार शिकायतों और उच्च अधिकारियों के निर्देशों के बाद भी इन पर लगाम नहीं लग पा रही थी। वहीं, शासन से लगातार इन पर कार्रवाई के लिए भी लिखा जा रहा था, लेकिन अधिकारियों की ओर से समय पर कोई कार्रवाई नहीं करने से संख्या लगातार बढ़ती जा रही थी। शासन से आए आदेश के बाद बीएसए ने नोएडा (बिसरख ब्लॉक क्षेत्र) के स्कूलों का निरीक्षण किया तो मान्यता के कागजात ही नहीं मिले। कुल 16 स्कूलों पर कार्रवाई में नोएडा के 10 स्कूल शामिल रहे, जबकि एक दनकौर ब्लॉक, दो दादरी ब्लॉक और तीन स्कूल जेवर ब्लॉक के थे।
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जिले में 200 से अधिक स्कूल हैं
जिले में करीब 200 स्कूल बिना मान्यता के चल रहे हैं। इनमें 70 फीसदी स्कूल नोएडा क्षेत्र में हैं जिनमें नर्सरी से लेकर कक्षा आठ तक बच्चे पढ़ते हैं। कुछ स्कूल तो 10वीं-12वीं तक की पढ़ाई कराते हैं, जबकि परीक्षा फार्म जुगाड़ से भरवाकर दूसरे मान्यता प्राप्त स्कूलों से परीक्षा दिलाते हैं। कई बार फार्म स्वीकृत नहीं होने की स्थिति में बच्चों का भविष्य खराब हो जाता है। पहले भी कई ऐसे मामले सामने आए हैं। ट्रांसफर सर्टिफिकेट के नाम पर भी ऐसे स्कूल अभिभावकों को परेशान करते हैं और बच्चों का भविष्य दांव पर लग जाता है।
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निर्देशों के बाद भी नहीं की बीईओ ने जांच
बेसिक शिक्षा विभाग से जिले के चारों ब्लॉकों में मौजूद ब्लॉक एजूकेशन अधिकारियों (बीईओ) को क्षेत्र का निरीक्षण कर बिना मान्यता प्राप्त स्कूलों की जानकारी और कार्रवाई करने का निर्देश दिए थे। एक माह बीतने के बाद भी चारों ब्लॉकों के बीईओ ने कोई भी जवाब नहीं दिया। इससे साफ है कि ऐसे अधिकारियों की ओर से ऐसे स्कूलों को शरण दी जा रही थी और आखिरकार बेसिक शिक्षा अधिकारी को स्वयं उतरकर कमान स्वयं भी संभालनी पड़ी।
आसपास के परिषदीय स्कूलों में होगा दाखिला
बंद कराए गए 16 स्कूलों में लगभग 70 से लेकर 120 तक विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। माना जा रहा है कि करीब डेढ़ हजार विद्यार्थियों को इन स्कूलों में पढ़ाया जा रहा था। बीएसए ने यहां निकट में चल रहे परिषदीय विद्यालय के शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि इन बच्चों का परिषदीय विद्यालयों में नामांकन कराया जाए, ताकि बच्चों का वर्ष खराब न हो।