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बीकॉम पास राजेश के झांसे में डॉक्टर, इंजीनियर और मैनेजर भी आए
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पुलिस की हिरासत में आरोपी।
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बीकॉम पास राजेश के झांसे में डॉक्टर, इंजीनियर और मैनेजर भी आए
नोएडा। हाइपर मार्ट की फ्रेंचाइजी लेने के नाम पर ठगी के पीड़ितों में डॉक्टर, इंजीनियर और मैनेजर भी शामिल हैं। खास बात यह है कि इन्हें झांसे में लेने वाला गिरोह का सरगना राजेश बीकॉम पास है। गिरोह से जुड़ा और कोई आरोपी 12वीं से ज्यादा पढ़ा नहीं है। आरोपी, पीड़ितों को पूरी तरह विश्वास में लेकर ठगी करते थे। उन्होंने सोशल मीडिया और इंटरनेट पर कंपनी का नाम चमकाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए थे। ताकि ऑनलाइन किसी भी प्लेटफार्म पर सर्च करते ही कंपनी का विज्ञापन तुरंत आ जाए और लोग उस पर भरोसा करें। इस काम के लिए आरोपियों ने एक साइट पर भी मोटी रकम खर्च की थी। डीसीपी हरीश चंदर ने बताया कि आरोपी धोखाधड़ी में इतने माहिर थे कि पढ़े-लिखे लोग भी तुरंत उनके झांसे में आ जाते थे। आरोपियों ने सभी कंपनियों के नाम से जीएसटी नंबर भी ले रखे थे। पीड़ितों को फ्रेंचाइजी लेने से पहले कंपनी की पूरी तरह जांच करने की सलाह देते थे। इससे लोगों का विश्वास कंपनी पर बढ़ जाता था।
ऐसे करते थे ठगी
फ्रेंचाइजी लेने वाले और कंपनी के बीच एक कांट्रेक्ट साइन होता था। इसमें स्टोर के लिए जगह फ्रेंचाइजी लेने वाले को मुहैया करानी होती थी। किराया भी उसी को देना होता था। सामान उपलब्ध कराने के साथ डेकोरेशन का काम कंपनी का था। डेकोरेशन के नाम 3 से 5 लाख और सिक्योरिटी मनी के रूप में 20 लाख रुपये तक लिए जाते थे। कुछ रकम सामान के लिए भी जमा कराई जाती थी। कई लोगों का सामान नहीं पहुंचा और स्टोर भी नहीं खुल पाए तो उन्होंने पैसे मांगने शुरू किए। शिकायतों का दौर शुरू होने पर फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
कारों पर लगा रखे थे न्यूज चैनल के स्टीकर
आरोपियों ने अपनी दो कारों पर न्यूज चैनल के स्टीकर लगा रखे थे, ताकि लॉकडाउन में भी बिना किसी परेशानी के आवाजाही कर सकें। पुलिस जांच कर रही है कि आरोपियों ने मीडिया के नाम का गलत फायदा तो नहीं उठाया, या फिर न्यूज चैनल का कर्मचारी भी तो गिरोह में शामिल नहीं है।
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नोएडा। हाइपर मार्ट की फ्रेंचाइजी लेने के नाम पर ठगी के पीड़ितों में डॉक्टर, इंजीनियर और मैनेजर भी शामिल हैं। खास बात यह है कि इन्हें झांसे में लेने वाला गिरोह का सरगना राजेश बीकॉम पास है। गिरोह से जुड़ा और कोई आरोपी 12वीं से ज्यादा पढ़ा नहीं है। आरोपी, पीड़ितों को पूरी तरह विश्वास में लेकर ठगी करते थे। उन्होंने सोशल मीडिया और इंटरनेट पर कंपनी का नाम चमकाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए थे। ताकि ऑनलाइन किसी भी प्लेटफार्म पर सर्च करते ही कंपनी का विज्ञापन तुरंत आ जाए और लोग उस पर भरोसा करें। इस काम के लिए आरोपियों ने एक साइट पर भी मोटी रकम खर्च की थी। डीसीपी हरीश चंदर ने बताया कि आरोपी धोखाधड़ी में इतने माहिर थे कि पढ़े-लिखे लोग भी तुरंत उनके झांसे में आ जाते थे। आरोपियों ने सभी कंपनियों के नाम से जीएसटी नंबर भी ले रखे थे। पीड़ितों को फ्रेंचाइजी लेने से पहले कंपनी की पूरी तरह जांच करने की सलाह देते थे। इससे लोगों का विश्वास कंपनी पर बढ़ जाता था।
ऐसे करते थे ठगी
फ्रेंचाइजी लेने वाले और कंपनी के बीच एक कांट्रेक्ट साइन होता था। इसमें स्टोर के लिए जगह फ्रेंचाइजी लेने वाले को मुहैया करानी होती थी। किराया भी उसी को देना होता था। सामान उपलब्ध कराने के साथ डेकोरेशन का काम कंपनी का था। डेकोरेशन के नाम 3 से 5 लाख और सिक्योरिटी मनी के रूप में 20 लाख रुपये तक लिए जाते थे। कुछ रकम सामान के लिए भी जमा कराई जाती थी। कई लोगों का सामान नहीं पहुंचा और स्टोर भी नहीं खुल पाए तो उन्होंने पैसे मांगने शुरू किए। शिकायतों का दौर शुरू होने पर फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
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कारों पर लगा रखे थे न्यूज चैनल के स्टीकर
आरोपियों ने अपनी दो कारों पर न्यूज चैनल के स्टीकर लगा रखे थे, ताकि लॉकडाउन में भी बिना किसी परेशानी के आवाजाही कर सकें। पुलिस जांच कर रही है कि आरोपियों ने मीडिया के नाम का गलत फायदा तो नहीं उठाया, या फिर न्यूज चैनल का कर्मचारी भी तो गिरोह में शामिल नहीं है।
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