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शिक्षा के साथ पर्यावरण को भी बढ़ावा दे रहे बसरुद्दीन

Sat, 16 Jan 2021 11:09 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 16 Jan 2021 11:09 PM IST
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basuriddin is promoting environment also with education
बसरुद्दीन, हेड मास्टर - फोटो : Mewat
शिक्षा के साथ पर्यावरण को भी बढ़ावा दे रहे बसरुद्दीन
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नूंह। राजस्थान स्थित भरतपुर जिले के गांव डमावली निवासी अध्यापक बसरुद्दीन जिले में शिक्षा के साथ पर्यावरण को भी बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। सालाहेड़ी गांव के राजकीय मिडिल स्कूल में कार्यरत हेड मास्टर बसरुद्दीन छुट्टी के बाद छात्रों को निशुल्क पढ़ा भी रहे हैं। बसरुद्दीन अब तक जिस भी स्कूल में रहे हैं, उनके स्कूल का परीक्षा परिणाम 100 फीसदी रहा है। उन्होंने सालाहेड़ी स्कूल में 7 सितंबर 2019 को कार्यभार संभाला था। इस दौरान स्कूल में 725 विद्यार्थी थे, जबकि अब 1125 छात्र हो गए हैं। इस स्कूल में महंगे पेड़-पौधों की हरियाली जिले के अन्य सरकारी स्कूलों के लिए एक मिसाल है। इससे पहले सिरौली और टपकन गांवों के स्कूलों को भी जिले में अच्छा बेहतर बनाने में बसरुद्दीन की अहम भूमिका रही है। उनके द्वारा अध्ययनरत छात्र आज उच्च पदों पर आसीन हैं तो कई विदेशों में भी नौकरी कर रहे हैं। स्कूल समय से आधा घंटा पहले आना और छुट्टी के बाद बोर्ड की कक्षाओं के छात्रों को पढ़ाना उनकी दिनचर्या में शामिल है। बसरुद्दीन अभी भी कई स्कूलों में जाकर ग्रामीणों, स्कूल स्टाफ और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर स्कूल के विकास के लिए रणनीति बनाते रहते हैं। बसरुद्दीन कई बार जिला स्तर पर सम्मानित हो चुके हैं। उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और राज्यपाल एआर किदवई भी सम्मानित कर चुके हैं। वहीं, राज्य एवं राष्ट्र स्तर पर 5 सितंबर 2018 को पुरस्कार भी हासिल कर चुके हैं। बसरुद्दीन को राष्ट्रीय शिक्षक दिवस पर उप राष्ट्रपति वैंकेया नायडू ने पुरस्कृत किया था।
गरीबी से मिली सीख
बसरुद्दीन ने यादों को ताजा कर बताया कि उन्होंने बचपन में गरीबी को देखा है। उनके पिता पहाड़ों पर पत्थर तोड़कर मजदूरी करते थे। पिता के हालातों को ध्यान में रखकर उन्होंने कड़ी मेहनत कर नौकरी पाई और आज गरीब छात्रों को छुट्टी के बाद भी निशुल्क पढ़ाते हैं, ताकि अन्य किसी को ऐसे हालात न देखने पड़ें।
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खेलों पर भी देेते हैं ध्यान
शिक्षा और पर्यावरण के साथ बसरुद्दीन खेलों पर भी पूरा ध्यान देते हैं। शाम को वे स्कूल परिसर में ही छात्रों को कबड्डी और कुश्ती आदि का अभ्यास कराते हैं। टपकन स्कूल से करीब आधा दर्जन छात्रों ने खेल में प्रदेश स्तर पर अपना लोहा मनवाया था।
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