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‘बाहुबली’ पर था बदमाशों को कारें उपलब्ध कराने का आरोप
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नोएडा (संजय शिशौदिया)। विधायक महेंद्र भाटी हत्याकांड के मामले में सीबीआई ने चार्जशीट में कुल आठ लोगों को आरोपी बनाया था। सीबीआई ने डीपी यादव को इस हत्याकांड का साजिशकर्ता मानते हुए आईपीसी की धारा-120बी का आरोपी बनाया था। आरोप था कि महेंद्र की हत्या के लिए जिन कारों में बदमाश आए थे, वह उन्हें डीपी यादव ने उपलब्ध कराई थीं। सीबीआई ने चार्जशीट में बताया था कि महेंद्र की हत्या के बाद इन गाड़ियों को जला दिया गया था।
मामले की जांच पहले स्थानीय पुलिस कर रही थी, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के बाद वर्ष 1993 में विवेचना सीबीआई को सौंपी गई। डीपी यादव के प्रभाव को देखते और पीड़ित पक्ष द्वारा उत्तर प्रदेश में निष्पक्ष जांच प्रभावित करने के अंदेशे के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2000 में मामले की जांच सीबीआई देहरादून को सौंप दी। जांच के बाद सीबीआई की ओर से दाखिल चार्जशीट में डीपी यादव, कुख्यात बदमाश पाल सिंह, प्रनीत भाटी, करन यादव, तेजपाल भाटी, जयपाल सिंह गुर्जर, महाराज सिंह और औलाद अली को शामिल किया गया था। इनमें से सुनवाई के दौरान ही तेजपाल भाटी, जयपाल सिंह गुर्जर, महाराज सिंह और औलाद अली की अलग-अलग समय के अंतराल में मौत हो चुकी है।
फरवरी 2015 को सीबीआई कोर्ट ने ठहराया था दोषी
सीबीआई की ओर से कोर्ट में 41 गवाह पेश किए गए थे। गवाही को आधार मानते हुए देहरादून सीबीआई कोर्ट ने 28 फरवरी, 2015 को डीपी यादव समेत सभी आरोपियों को दोषी ठहराया। बाद में कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुना दी। इसके बाद इस मामले में नैनीताल हाईकोर्ट में अपील की गई। बुधवार को नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरएस चौहान और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने डीपी यादव के खिलाफ पर्याप्त सबूत और ठोस साक्ष्य न होने पर बरी कर दिया। डीपी यादव और करन यादव फिलहाल पैरोल पर हैं। जबकि प्रनीत और पाल सिंह जेल में ही सजा काट रहे हैं।
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डीपी यादव ने जारी किया वीडियो
नैनीताल हाईकोर्ट का फैसला आने के साथ ही डीपी यादव ने वीडियो सोशल मीडिया पर जारी किया। इसमें उन्होंने कहा है कि ‘जिंदगी के इन भावुक क्षणों को उन सभी शुभचिंतकों को समर्पित करता हूं, जो मुश्किल घड़ी में मेरे साथ खडे़ रहे। ईश्वर पर और देश की न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है, पूरा भरोसा रहेगा।’
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मामले की जांच पहले स्थानीय पुलिस कर रही थी, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के बाद वर्ष 1993 में विवेचना सीबीआई को सौंपी गई। डीपी यादव के प्रभाव को देखते और पीड़ित पक्ष द्वारा उत्तर प्रदेश में निष्पक्ष जांच प्रभावित करने के अंदेशे के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2000 में मामले की जांच सीबीआई देहरादून को सौंप दी। जांच के बाद सीबीआई की ओर से दाखिल चार्जशीट में डीपी यादव, कुख्यात बदमाश पाल सिंह, प्रनीत भाटी, करन यादव, तेजपाल भाटी, जयपाल सिंह गुर्जर, महाराज सिंह और औलाद अली को शामिल किया गया था। इनमें से सुनवाई के दौरान ही तेजपाल भाटी, जयपाल सिंह गुर्जर, महाराज सिंह और औलाद अली की अलग-अलग समय के अंतराल में मौत हो चुकी है।
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फरवरी 2015 को सीबीआई कोर्ट ने ठहराया था दोषी
सीबीआई की ओर से कोर्ट में 41 गवाह पेश किए गए थे। गवाही को आधार मानते हुए देहरादून सीबीआई कोर्ट ने 28 फरवरी, 2015 को डीपी यादव समेत सभी आरोपियों को दोषी ठहराया। बाद में कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुना दी। इसके बाद इस मामले में नैनीताल हाईकोर्ट में अपील की गई। बुधवार को नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरएस चौहान और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने डीपी यादव के खिलाफ पर्याप्त सबूत और ठोस साक्ष्य न होने पर बरी कर दिया। डीपी यादव और करन यादव फिलहाल पैरोल पर हैं। जबकि प्रनीत और पाल सिंह जेल में ही सजा काट रहे हैं।
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डीपी यादव ने जारी किया वीडियो
नैनीताल हाईकोर्ट का फैसला आने के साथ ही डीपी यादव ने वीडियो सोशल मीडिया पर जारी किया। इसमें उन्होंने कहा है कि ‘जिंदगी के इन भावुक क्षणों को उन सभी शुभचिंतकों को समर्पित करता हूं, जो मुश्किल घड़ी में मेरे साथ खडे़ रहे। ईश्वर पर और देश की न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है, पूरा भरोसा रहेगा।’