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Noida News: एमबीबीएस भर्ती में घोटाले के आरोप, हाईकोर्ट ने केंद्र व पीजीआई रोहतक से मांगा जवाब

Sat, 04 Oct 2025 02:24 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 04 Oct 2025 02:24 AM IST
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Allegations of scam in MBBS recruitment High Court seeks response from Centre and PGI Rohtak
-अवैध रूप से प्रमाण-पत्र बनवा सीटें आवंटित करने व पूर्व सैनिकों की निर्धारित सीटों को स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों के नाम करने का आरोप
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में एमबीबीएस सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। सीटों के आवंटन में धांधली होने का आरोप लगाकर कुछ अभ्यर्थियों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
याचिकाकर्ता देव धारीवाल व अन्य ने कोर्ट को बताया कि इस वर्ष भी प्रवेश प्रक्रिया में धांधली कर पात्र उम्मीदवारों को बाहर कर दिया गया और सीटों का आवंटन नियमों के विपरीत किया गया।
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याची पक्ष ने बताया कि याचिकाकर्ता विकलांग पूर्व सैनिकों के आश्रित हैं और उन्होंने पूर्व सैनिक कोटे के तहत दाखिले के लिए आवेदन किया था। पर प्रवेश कमेटी ने अवैध रूप से पूर्व सैनिकों की निर्धारित सीटों को स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों के नाम कर दिया। यह पूरी तरह से सरकार की अधिसूचनाओं के विरुद्ध है।
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कोर्ट को बताया गया कि हरियाणा सरकार ने 27 अक्टूबर 2021 और 20 अप्रैल 2022 की अधिसूचना में साफ कर दिया था कि केवल वे सीटें, जो पूर्व सैनिक कोटे से रिक्त रह जाएं, उन्हें स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों को दिया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण-पत्र केवल हरियाणा के मुख्य सचिव की तरफ से ही जारी किया जाना चाहिए। इसके बावजूद प्रवेश कमेटी ने कई संदिग्ध और कथित रूप से झूठे प्रमाण-पत्रों को स्वीकार कर लिया।
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार और पीजीआई रोहतक की प्रवेश कमेटी से विस्तृत जवाब तलब किया है। अदालत ने पूछा है कि नियमों की स्पष्ट व्याख्या होने के बावजूद सीटों का गलत आवंटन क्यों किया गया और फर्जी प्रमाण पत्रों को किस आधार पर स्वीकार किया गया।


अधिकांश आश्रित प्रमाण-पत्र अविश्वसनीय
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि आजादी के 78 वर्ष बाद किसी स्वतंत्रता सेनानी का पोता या पोती 18 वर्ष की आयु का होना संभव नहीं है। ऐसे में प्रस्तुत किए गए अधिकांश आश्रित प्रमाण-पत्र अविश्वसनीय प्रतीत होते हैं। उन्होंने कमेटी पर आरोप लगाया कि वास्तविक पात्र उम्मीदवारों को वंचित कर ऐसे फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सीटें बांटी गईं।


ईडब्ल्यूएस-विकलांग की सीटें सामान्य को दीं
कोर्ट को बताया गया कि प्रवेश कमेटी ने ईडब्ल्यूएस-विकलांग श्रेणी की रिक्त सीटों को भी संबंधित पात्र उम्मीदवारों को देने के बजाय सामान्य ईडब्ल्यूएस आवेदकों को आवंटित कर दिया। इससे कई विकलांग अभ्यर्थी प्रवेश के अधिकार से वंचित रह गए।
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