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नोएडा: जिंदा बच्ची को मृत बताकर डिब्बे में किया पैक
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लोकनायक अस्पताल की लापरवाही, पुलिस के हस्तक्षेप से बची जान
बच्ची के घर पर कर ली थी दफनाने की तैयारी
पैकेट खोला तो बच्ची को हाथ हिलाते देखकर चौका परिवार
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। लोकनायक अस्पताल की बड़ी लापरवाही सामने आई है। आरोप है कि यहां नवजात को मृत बताकर डॉक्टरों ने उसे डिब्बे में पैक कर परिवार को सौंप दिया। परिवार घर पहुंचकर डिब्बा खोला तो बच्ची हाथ हिला रही थी, जिसे देख पूरा परिवार चौक गया और तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचा, लेकिन डॉक्टरों ने उसे जिंदा मानने से ही मना कर दिया। विवाद बढ़ा तो परिवार ने पुलिस को फोन किया। काफी नोकझोंक के बाद पुलिस के दबाव में बच्ची को अस्पताल की नर्सरी में वेंटिलेटर पर रखा गया है। फिलहाल बच्ची की हालत स्थिर बनी हुई है। उधर, अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। कमेटी को 48 घंटे में रिपोर्ट देनी है।
नवजात के पिता अब्दुल मलिक ने बताया कि उसकी गर्भवती पत्नी अरुणा आसफ अली अस्पताल में भर्ती थी, यहां उसके शरीर से पानी और खून का रिसाव हो रहा था, जिसे देख डॉक्टरों ने उसे लोकनायक अस्पताल में रेफर कर दिया। उन्होंने कहा कि वह 17 फरवरी को पत्नी को लेकर लोकनायक अस्पताल आ गए। यहां पत्नी ने रविवार शाम एक बच्ची को जन्म दिया। डॉक्टरों ने नवजात को मृत घोषित कर डिब्बा लाने को कहा, लेकिन पत्नी ने कहा कि बच्ची जिंदा है और हाथ हिला रही है, लेकिन उसकी बात नहीं मानी और परिवार के सदस्य को अंदर बुलाया। बाद में एक डिब्बा मंगवाया और नवजात को पैक कर थमा दिया। पिता ने कहा कि जब वह नवजात को लेकर घर पहुंचे और डिब्बा खोला तो बच्ची हाथ हिला रही थी। अब्दुल ने कहा कि वह उसी समय बच्ची को लेकर अस्पताल की नर्सरी में पहुंचे लेकिन डॉक्टरों ने भर्ती करने से मना कर दिया। काफी नोकझोंक के बाद पुलिस के दबाव में नवजात को भर्ती किया गया है।
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नवजात को घर नहीं भेजा
लोकनायक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुरेश कुमार ने कहा कि जन्म के समय नवजात का वजन 490 ग्राम था। छह माह में जन्मे नवजात के शरीर में शुरुआती समय में कोई हरकत नहीं दिखी। बच्चे को घर नहीं भेजा गया, वह पूरे समय अस्पताल में ही रहा। जब बच्चे के शरीर में हरकत देखी गई तो उसे तुरंत नर्सरी में वेंटिलेटर पर भर्ती किया गया है। फिलहाल उसकी हालत स्थिर है।
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तीन सदस्यीय कमेटी करेगी जांच
डॉ. सुरेश कुमार ने कहा कि अस्पताल में हुई लापरवाही की जांच के लिए तीन सदस्य कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी दो दिन में जांच कर रिपोर्ट सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर दोषी संबंधित स्वास्थ्य कर्मी पर कार्रवाई हो सकती है। बता दें कि इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की जांच कर रहा है।
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घंटाें डिब्बे में पैक रही बच्ची
नवजात के पिता का आरोप है कि उसकी बच्ची घंटों डिब्बे में पैक रही। डॉक्टरों के कहने पर रविवार शाम करीब साढ़े पांच बजे नवजात को डिब्बे में पैक किया गया। करीब 10-12 मिनट तक वह अस्पताल परिसर में ही रही। उसे बाद बच्ची को लेकर घर मुस्तफाबाद गए। यहां से लाने और ले जाने में करीब दो-तीन घंटे बच्ची डिब्बे में ही रही।
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कर ली थी दफनाने की तैयारी
पिता अब्दुल की माने तो डॉक्टरों से सूचना मिलने के बाद घर पर मातम छा गया था। घर पर परिवार वाले जुटने लगे थे और बच्ची को दफनाने की तैयारी भी हो गई थी। घर पहुंचने पर जब एक बार बच्ची का चेहरा देखने के लिए डिब्बा खोला तो उसके हाथ हिलते हुए दिखे, बच्ची को जिंदा देख सभी जान में जान आई।
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बच्ची के घर पर कर ली थी दफनाने की तैयारी
पैकेट खोला तो बच्ची को हाथ हिलाते देखकर चौका परिवार
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। लोकनायक अस्पताल की बड़ी लापरवाही सामने आई है। आरोप है कि यहां नवजात को मृत बताकर डॉक्टरों ने उसे डिब्बे में पैक कर परिवार को सौंप दिया। परिवार घर पहुंचकर डिब्बा खोला तो बच्ची हाथ हिला रही थी, जिसे देख पूरा परिवार चौक गया और तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचा, लेकिन डॉक्टरों ने उसे जिंदा मानने से ही मना कर दिया। विवाद बढ़ा तो परिवार ने पुलिस को फोन किया। काफी नोकझोंक के बाद पुलिस के दबाव में बच्ची को अस्पताल की नर्सरी में वेंटिलेटर पर रखा गया है। फिलहाल बच्ची की हालत स्थिर बनी हुई है। उधर, अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। कमेटी को 48 घंटे में रिपोर्ट देनी है।
नवजात के पिता अब्दुल मलिक ने बताया कि उसकी गर्भवती पत्नी अरुणा आसफ अली अस्पताल में भर्ती थी, यहां उसके शरीर से पानी और खून का रिसाव हो रहा था, जिसे देख डॉक्टरों ने उसे लोकनायक अस्पताल में रेफर कर दिया। उन्होंने कहा कि वह 17 फरवरी को पत्नी को लेकर लोकनायक अस्पताल आ गए। यहां पत्नी ने रविवार शाम एक बच्ची को जन्म दिया। डॉक्टरों ने नवजात को मृत घोषित कर डिब्बा लाने को कहा, लेकिन पत्नी ने कहा कि बच्ची जिंदा है और हाथ हिला रही है, लेकिन उसकी बात नहीं मानी और परिवार के सदस्य को अंदर बुलाया। बाद में एक डिब्बा मंगवाया और नवजात को पैक कर थमा दिया। पिता ने कहा कि जब वह नवजात को लेकर घर पहुंचे और डिब्बा खोला तो बच्ची हाथ हिला रही थी। अब्दुल ने कहा कि वह उसी समय बच्ची को लेकर अस्पताल की नर्सरी में पहुंचे लेकिन डॉक्टरों ने भर्ती करने से मना कर दिया। काफी नोकझोंक के बाद पुलिस के दबाव में नवजात को भर्ती किया गया है।
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नवजात को घर नहीं भेजा
लोकनायक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुरेश कुमार ने कहा कि जन्म के समय नवजात का वजन 490 ग्राम था। छह माह में जन्मे नवजात के शरीर में शुरुआती समय में कोई हरकत नहीं दिखी। बच्चे को घर नहीं भेजा गया, वह पूरे समय अस्पताल में ही रहा। जब बच्चे के शरीर में हरकत देखी गई तो उसे तुरंत नर्सरी में वेंटिलेटर पर भर्ती किया गया है। फिलहाल उसकी हालत स्थिर है।
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तीन सदस्यीय कमेटी करेगी जांच
डॉ. सुरेश कुमार ने कहा कि अस्पताल में हुई लापरवाही की जांच के लिए तीन सदस्य कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी दो दिन में जांच कर रिपोर्ट सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर दोषी संबंधित स्वास्थ्य कर्मी पर कार्रवाई हो सकती है। बता दें कि इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की जांच कर रहा है।
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घंटाें डिब्बे में पैक रही बच्ची
नवजात के पिता का आरोप है कि उसकी बच्ची घंटों डिब्बे में पैक रही। डॉक्टरों के कहने पर रविवार शाम करीब साढ़े पांच बजे नवजात को डिब्बे में पैक किया गया। करीब 10-12 मिनट तक वह अस्पताल परिसर में ही रही। उसे बाद बच्ची को लेकर घर मुस्तफाबाद गए। यहां से लाने और ले जाने में करीब दो-तीन घंटे बच्ची डिब्बे में ही रही।
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कर ली थी दफनाने की तैयारी
पिता अब्दुल की माने तो डॉक्टरों से सूचना मिलने के बाद घर पर मातम छा गया था। घर पर परिवार वाले जुटने लगे थे और बच्ची को दफनाने की तैयारी भी हो गई थी। घर पहुंचने पर जब एक बार बच्ची का चेहरा देखने के लिए डिब्बा खोला तो उसके हाथ हिलते हुए दिखे, बच्ची को जिंदा देख सभी जान में जान आई।