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अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म के 3 आरोपी बरी
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अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म के 3 आरोपी बरी
ग्रेटर नोएडा। जिला अदालत ने अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म और दुष्कर्म के तीन अलग-अलग मामलों में तीन आरोपियों को बरी कर दिया है। पीड़ित महिला और लड़कियों के बयान पर कोर्ट ने यह आदेश दिया है। एक मामले में कोर्ट ने महिला को पक्षद्रोही करार दिया है।
अगस्त, 2017 में नोएडा के रायपुर निवासी रोहित के खिलाफ थाना एक्सप्रेसवे में एक लड़की के अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया गया था। उस समय लड़की को नाबालिग बताया गया था। पुलिस ने जांच कर रोहित के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान लड़की व उसके परिजनों ने उसे बालिग बताया और अपहरण की बात से मुकर गए। कोर्ट में लड़की ने कहा कि वह घर से नाराज होकर चली गई थी। उसका अपहरण नहीं हुआ था। सुनवाई के बाद कोर्ट ने रोहित को बरी कर दिया। वहीं, गाजियाबाद के लोनी निवासी संजीव के खिलाफ नोएडा के फेज-2 थाने में एक युवती ने दुष्कर्म व धमकी देने का मामला दर्ज कराया था। दोनों नोएडा की एक कंपनी में काम करते थे। आरोप था कि संजीव ने कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ पिलाकर उनके साथ दुष्कर्म किया। आरोप था कि संजीव ने शादी का झांसा देकर कई बार दुष्कर्म किया। लड़की ने कोर्ट में आरोपों से इनकार कर दिया। अदालत ने संजीव को बरी कर जेल से रिहा करने का आदेश दिया है। उधर, अक्तूबर, 2017 में दनकौर के अट्टा-फतेहपुर निवासी असलम व उसके साथियों पर दनकौर कोतवाली में सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया था। महिला का आरोप था कि असलम उसका परिचित है। उसने लिफ्ट देने के बहाने उसे कार में बैठाया और नशीला पदार्थ पिला दिया। इसके बाद ग्रेटर नोएडा के एक मकान में लेकर जाकर अपने दो साथियों के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। जांच में पुलिस ने असलम के दो साथियों को क्लीन चिट दे दी थी। जबकि, कोर्ट में महिला ने कहा कि उसके साथ दुष्कर्म नहीं हुआ। वह अनपढ़ है। किसी ने कागज पर अंगूठा लगवाकर तहरीर दी थी। फास्ट ट्रैक कोर्ट-1 के एडिशनल सेशन जज विनीत चौधरी की अदालत ने महिला को पक्षद्रोही घोषित कर असलम को आरोपों से बरी कर दिया।
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ग्रेटर नोएडा। जिला अदालत ने अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म और दुष्कर्म के तीन अलग-अलग मामलों में तीन आरोपियों को बरी कर दिया है। पीड़ित महिला और लड़कियों के बयान पर कोर्ट ने यह आदेश दिया है। एक मामले में कोर्ट ने महिला को पक्षद्रोही करार दिया है।
अगस्त, 2017 में नोएडा के रायपुर निवासी रोहित के खिलाफ थाना एक्सप्रेसवे में एक लड़की के अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया गया था। उस समय लड़की को नाबालिग बताया गया था। पुलिस ने जांच कर रोहित के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान लड़की व उसके परिजनों ने उसे बालिग बताया और अपहरण की बात से मुकर गए। कोर्ट में लड़की ने कहा कि वह घर से नाराज होकर चली गई थी। उसका अपहरण नहीं हुआ था। सुनवाई के बाद कोर्ट ने रोहित को बरी कर दिया। वहीं, गाजियाबाद के लोनी निवासी संजीव के खिलाफ नोएडा के फेज-2 थाने में एक युवती ने दुष्कर्म व धमकी देने का मामला दर्ज कराया था। दोनों नोएडा की एक कंपनी में काम करते थे। आरोप था कि संजीव ने कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ पिलाकर उनके साथ दुष्कर्म किया। आरोप था कि संजीव ने शादी का झांसा देकर कई बार दुष्कर्म किया। लड़की ने कोर्ट में आरोपों से इनकार कर दिया। अदालत ने संजीव को बरी कर जेल से रिहा करने का आदेश दिया है। उधर, अक्तूबर, 2017 में दनकौर के अट्टा-फतेहपुर निवासी असलम व उसके साथियों पर दनकौर कोतवाली में सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया था। महिला का आरोप था कि असलम उसका परिचित है। उसने लिफ्ट देने के बहाने उसे कार में बैठाया और नशीला पदार्थ पिला दिया। इसके बाद ग्रेटर नोएडा के एक मकान में लेकर जाकर अपने दो साथियों के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। जांच में पुलिस ने असलम के दो साथियों को क्लीन चिट दे दी थी। जबकि, कोर्ट में महिला ने कहा कि उसके साथ दुष्कर्म नहीं हुआ। वह अनपढ़ है। किसी ने कागज पर अंगूठा लगवाकर तहरीर दी थी। फास्ट ट्रैक कोर्ट-1 के एडिशनल सेशन जज विनीत चौधरी की अदालत ने महिला को पक्षद्रोही घोषित कर असलम को आरोपों से बरी कर दिया।
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