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इन तीन मामलों में फंस रहे 78 प्राधिकरणकर्मी, कार्रवाई जल्द
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तीन मामलों में फंसे 78 प्राधिकरण कर्मी, कार्रवाई जल्द
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में भू उपयोग के बदलाव, गलत तरीके से नियुक्ति और यादव सिंह के बेटे सनी यादव के अनुपस्थित रहने के मामलों में शीघ्र कार्रवाई हो सकती है। प्राधिकरण ने तीनों ही मामलों की जांच कर खामियों को उजागर करते हुए रिपोर्ट शासन के पास भेज दी है। इन मामलों में कुल 78 प्राधिकरण कर्मी फंस रहे हैं। शासन से सूचना मिली है कि इन मामलों में दोषियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई होगी।
गलत तरीके से भू उपयोग बदलने का मामला
बसपा शासनकाल में ग्रेटर नोएडा वेस्ट में उद्योग लगाने के लिए अर्जेंसी जमीन ली गई। उसका भू उपयोग (लैंडयूज) बदलकर बिल्डरों को आवंटित कर दी गई। करीब 4000 एकड़ भूमि इसी तरह से बिल्डरों को दे दी गई। लैंडयूज बदलने के लिए एक कमेटी बनाई गई थी। उस कमेटी में 19 प्राधिकरण कर्मी थे। इनमें प्रबंधक से लेकर एसीईओ तक के अफसर शामिल थे। बिल्डरों को जमीन देने की वजह से ही किसान कोर्ट गए। लंबे समय तक विवाद चला जिससे रिहायशी प्रोजेक्ट फंस गए। बहुत से फ्लैट खरीदारों की गाढ़ी कमाई फंसी हुई है। शासन के निर्देश पर इन जमीनों का गलत तरीके से लैंडयूज बदलने की जांच प्राधिकरण के एसीईओ कर रहे थे। जांच पूरी कर रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। रिपोर्ट में लैंडयूज बदलने में खामी मिली हैं, जिससे 19 प्राधिकरण कर्मियों पर कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
नियुक्ति मामले में 58 प्राधिकरण कर्मी फंसेंगे
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में 2002 से 2011 के बीच कई कर्मचारियों की तैनाती की गई। इन नियुक्तियों में अपने चहेतों को नौकरी दिलाने के लिए शैक्षिक योग्यता में ढील दी गई। बाहरी राज्यों के आरक्षण प्रमाणपत्र लेकर नियुक्ति कर दी गई। संविदा वाले पदों पर भी स्थायी नियुक्ति की गई। यह मामला हाईकोर्ट तक गया। कोर्ट ने शासन को, फिर शासन ने ग्रेनो प्राधिकरण को जांच करने को कहा। प्राधिकरण ने इसकी भी जांच कर शासन को भेजी है। इसमें भी खामी को उजागर करते हुए 58 प्राधिकरण कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
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सन्नी यादव के अनुपस्थित रहने पर कार्रवाई जल्द
सनी यादव ने बसपा शासनकाल में 2008-09 में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में बतौर मैनेजर ज्वाइन किया था। तब से वह मैनेजर पद पर था। यादव सिंह प्रकरण के दौरान लंबे समय से बिना बताए वह दफ्तर से गायब रहा। कई और आरोप भी लगे जिसकी विभागीय जांच भी प्राधिकरण कर रहा था। यह जांच भी पूरी हो गई है। इसमें भी सनी यादव के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
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ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में भू उपयोग के बदलाव, गलत तरीके से नियुक्ति और यादव सिंह के बेटे सनी यादव के अनुपस्थित रहने के मामलों में शीघ्र कार्रवाई हो सकती है। प्राधिकरण ने तीनों ही मामलों की जांच कर खामियों को उजागर करते हुए रिपोर्ट शासन के पास भेज दी है। इन मामलों में कुल 78 प्राधिकरण कर्मी फंस रहे हैं। शासन से सूचना मिली है कि इन मामलों में दोषियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई होगी।
गलत तरीके से भू उपयोग बदलने का मामला
बसपा शासनकाल में ग्रेटर नोएडा वेस्ट में उद्योग लगाने के लिए अर्जेंसी जमीन ली गई। उसका भू उपयोग (लैंडयूज) बदलकर बिल्डरों को आवंटित कर दी गई। करीब 4000 एकड़ भूमि इसी तरह से बिल्डरों को दे दी गई। लैंडयूज बदलने के लिए एक कमेटी बनाई गई थी। उस कमेटी में 19 प्राधिकरण कर्मी थे। इनमें प्रबंधक से लेकर एसीईओ तक के अफसर शामिल थे। बिल्डरों को जमीन देने की वजह से ही किसान कोर्ट गए। लंबे समय तक विवाद चला जिससे रिहायशी प्रोजेक्ट फंस गए। बहुत से फ्लैट खरीदारों की गाढ़ी कमाई फंसी हुई है। शासन के निर्देश पर इन जमीनों का गलत तरीके से लैंडयूज बदलने की जांच प्राधिकरण के एसीईओ कर रहे थे। जांच पूरी कर रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। रिपोर्ट में लैंडयूज बदलने में खामी मिली हैं, जिससे 19 प्राधिकरण कर्मियों पर कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
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नियुक्ति मामले में 58 प्राधिकरण कर्मी फंसेंगे
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में 2002 से 2011 के बीच कई कर्मचारियों की तैनाती की गई। इन नियुक्तियों में अपने चहेतों को नौकरी दिलाने के लिए शैक्षिक योग्यता में ढील दी गई। बाहरी राज्यों के आरक्षण प्रमाणपत्र लेकर नियुक्ति कर दी गई। संविदा वाले पदों पर भी स्थायी नियुक्ति की गई। यह मामला हाईकोर्ट तक गया। कोर्ट ने शासन को, फिर शासन ने ग्रेनो प्राधिकरण को जांच करने को कहा। प्राधिकरण ने इसकी भी जांच कर शासन को भेजी है। इसमें भी खामी को उजागर करते हुए 58 प्राधिकरण कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
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सन्नी यादव के अनुपस्थित रहने पर कार्रवाई जल्द
सनी यादव ने बसपा शासनकाल में 2008-09 में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में बतौर मैनेजर ज्वाइन किया था। तब से वह मैनेजर पद पर था। यादव सिंह प्रकरण के दौरान लंबे समय से बिना बताए वह दफ्तर से गायब रहा। कई और आरोप भी लगे जिसकी विभागीय जांच भी प्राधिकरण कर रहा था। यह जांच भी पूरी हो गई है। इसमें भी सनी यादव के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है।