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Noida News: नोएडा में तीन प्रदेश के 350 डॉक्टरों को मिलेगी ट्रेनिंग
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नोएडा में तीन प्रदेश के 350 डॉक्टरों को मिलेगी ट्रेनिंग
-केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने किया उद्घाटन, कहा-थैलेसीमिया से बड़ी आबादी प्रभावित
- पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के डॉक्टर ट्रेनिंग में होंगे शामिल
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-30 स्थित चाइल्ड पीजीआई में बीटा थैलेसीमिया व हिमोग्लोबिनोपैथी पर तीन प्रदेशों के 350 डॉक्टरों को ट्रेनिंग दी जाएगी। इसी कड़ी में मंगलवार से 52 डॉक्टर का दो दिवसीय ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू हो गया। इस दौरान मरीजों की स्क्रीनिंग और इलाज के बारे में बताया जा रहा है। इन डॉक्टरों की जिम्मेदारी है कि वो अपने क्षेत्रों के डॉक्टर को ट्रेनिंग दें।
तीन साल चलने वाले इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य कर्मियों व आशा के लिए वेबिनार आयोजित होंगे। इसमें उनको थैलेसीमिया बीमारी के लक्षण समझाए जाएंगे। केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया और कहा कि बीटा थैलेसीमिया, सिकल सेल रोग और अन्य रक्त विकार देश की आबादी को बड़े पैमाने पर प्रभावित करते हैं। अब एनएचएम मध्य प्रदेश और पीजीआईसीएच नोएडा सहित इको इंडिया की पहल थैलेसीमिया और संबंधित बीमारियों से लड़ने वाले रोगियों के लिए प्रभावी रहेगी। प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य आलोक कुमार ने कहा थैलेसीमिया बच्चों व आदिवासी समुदाय में ज्यादा पाया जाता है। इसके लिए जागरूकता की जरूरत है। प्रदेश के मेडिकल कॉलेज में बिल्डिंग के साथ-साथ गुणवत्ता वाले डॉक्टरों की भी जरूरत है। यहां पीजीआईसीएच के निदेशक प्राफेसर अरुण कुमार सिंह भी मौजूद रहे।
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गर्भावस्था में कराएं थैलेसीमिया टेस्ट
डॉक्टरों ने महिला रोग विशेषज्ञों से अपील की कि वो गर्भावस्था में तीन महीने से पहले महिला व उसके पति का थैलेसीमिया टेस्ट जरूर कराएं। थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चे के लिए जीवन बहुत मुश्किल रहता है। वहीं आदिवासी समुदाय और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग थैलेसीमिया से प्रभावित हैं। यह ट्रेनिंग प्रोग्राम उनके लिए फायदेमंद रहेगा।
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-केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने किया उद्घाटन, कहा-थैलेसीमिया से बड़ी आबादी प्रभावित
- पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के डॉक्टर ट्रेनिंग में होंगे शामिल
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-30 स्थित चाइल्ड पीजीआई में बीटा थैलेसीमिया व हिमोग्लोबिनोपैथी पर तीन प्रदेशों के 350 डॉक्टरों को ट्रेनिंग दी जाएगी। इसी कड़ी में मंगलवार से 52 डॉक्टर का दो दिवसीय ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू हो गया। इस दौरान मरीजों की स्क्रीनिंग और इलाज के बारे में बताया जा रहा है। इन डॉक्टरों की जिम्मेदारी है कि वो अपने क्षेत्रों के डॉक्टर को ट्रेनिंग दें।
तीन साल चलने वाले इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य कर्मियों व आशा के लिए वेबिनार आयोजित होंगे। इसमें उनको थैलेसीमिया बीमारी के लक्षण समझाए जाएंगे। केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया और कहा कि बीटा थैलेसीमिया, सिकल सेल रोग और अन्य रक्त विकार देश की आबादी को बड़े पैमाने पर प्रभावित करते हैं। अब एनएचएम मध्य प्रदेश और पीजीआईसीएच नोएडा सहित इको इंडिया की पहल थैलेसीमिया और संबंधित बीमारियों से लड़ने वाले रोगियों के लिए प्रभावी रहेगी। प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य आलोक कुमार ने कहा थैलेसीमिया बच्चों व आदिवासी समुदाय में ज्यादा पाया जाता है। इसके लिए जागरूकता की जरूरत है। प्रदेश के मेडिकल कॉलेज में बिल्डिंग के साथ-साथ गुणवत्ता वाले डॉक्टरों की भी जरूरत है। यहां पीजीआईसीएच के निदेशक प्राफेसर अरुण कुमार सिंह भी मौजूद रहे।
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गर्भावस्था में कराएं थैलेसीमिया टेस्ट
डॉक्टरों ने महिला रोग विशेषज्ञों से अपील की कि वो गर्भावस्था में तीन महीने से पहले महिला व उसके पति का थैलेसीमिया टेस्ट जरूर कराएं। थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चे के लिए जीवन बहुत मुश्किल रहता है। वहीं आदिवासी समुदाय और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग थैलेसीमिया से प्रभावित हैं। यह ट्रेनिंग प्रोग्राम उनके लिए फायदेमंद रहेगा।