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ससुर ने गुर्दा दान कर बचाई बहू की जान
Updated Sat, 17 Jun 2017 05:35 PM IST
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ससुर ने गुर्दा दान कर बचाई बहू की जान
गुर्दे फेल हो जाने की वजह से मौत के मुंह में जा रही ममता यादव (33) को उनके ससुर प्रेम सिंह ने किडनी देकर नई जिंदगी बख्शी। फोर्टिस एस्कॉटस अस्पताल में गुर्दा प्रत्यारोपण के बाद बिलकुल ठीक हुई ममता और गुर्दादान के बाद स्वास्थ्य लाभ कर रहे प्रेम सिंह शुक्रवार को पत्रकारों से रूबरू हुए।
अस्पताल के सीनियर कंसेल्टेंट यूरोलॉजिस्ट डॉ. रितेश मोंगा और यूरोलॉजिस्ट डॉ. संजय अग्रवाल ने बताया कि ममता दिसंबर 2016 में एक दुलर्भ बीमारी से पीड़ित होकर अस्पताल में भर्ती हुई थीं। इसमें मरीज के शरीर की रोग प्रतिरोधी कणिकाएं इतनी बढ़ जाती हैं कि मरीज के फेफड़े, गुर्दे आदि आंतरिक अंग बुरी तरह प्रभावित होने लगते हैं। उनकी हालत इतनी खराब हो गई थी कि उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा था। बीमारी में उनके गुर्दे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे कि उन्हें हीमोडायलिसिस पर रखना पड़ा। रोग प्रतिरोधी कणिकाओं को संभालने के लिए उनका लंबा इलाज चला। हालात यह हो गए कि हर सप्ताह उन्हें हीमोडायलिसिस कराना पड़ता। डॉक्टरों ने गुर्दा प्रत्यारोपण की सलाह दी। सरकारी नियम के मुताबिक दानदाता परिवार का करीबी होना चाहिए। ममता के माता पिता को मधुमेह है इसलिए उनका गुर्दा नहीं लिया गया। कुछ दिन पहले ससुर प्रेम सिंह ने खुद ही बहू को गुर्दा दान देने की पेशकश की। जांच में दोनों को ब्लडगु्रप और बहुत से फैक्टर पॉजिटिव पाए गए। उन्होंने गुर्दादान दिया। डॉ. रितेश मोंगा, नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. वरुण वर्मा, डॉ. संजय अग्रवाल की टीम ने सफल प्रत्यारोपण किया। 56 वर्षीय प्रेम सिंह ने कहा कि बहू और बेटी एक समान हैं मैने बेटी और उसका परिवार बचाने के लिए गुर्दा दान दिया, उसकी जिंदगी बचने पर आत्मिक संतोष महसूस कर रहा हूं।
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गुर्दे फेल हो जाने की वजह से मौत के मुंह में जा रही ममता यादव (33) को उनके ससुर प्रेम सिंह ने किडनी देकर नई जिंदगी बख्शी। फोर्टिस एस्कॉटस अस्पताल में गुर्दा प्रत्यारोपण के बाद बिलकुल ठीक हुई ममता और गुर्दादान के बाद स्वास्थ्य लाभ कर रहे प्रेम सिंह शुक्रवार को पत्रकारों से रूबरू हुए।
अस्पताल के सीनियर कंसेल्टेंट यूरोलॉजिस्ट डॉ. रितेश मोंगा और यूरोलॉजिस्ट डॉ. संजय अग्रवाल ने बताया कि ममता दिसंबर 2016 में एक दुलर्भ बीमारी से पीड़ित होकर अस्पताल में भर्ती हुई थीं। इसमें मरीज के शरीर की रोग प्रतिरोधी कणिकाएं इतनी बढ़ जाती हैं कि मरीज के फेफड़े, गुर्दे आदि आंतरिक अंग बुरी तरह प्रभावित होने लगते हैं। उनकी हालत इतनी खराब हो गई थी कि उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा था। बीमारी में उनके गुर्दे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे कि उन्हें हीमोडायलिसिस पर रखना पड़ा। रोग प्रतिरोधी कणिकाओं को संभालने के लिए उनका लंबा इलाज चला। हालात यह हो गए कि हर सप्ताह उन्हें हीमोडायलिसिस कराना पड़ता। डॉक्टरों ने गुर्दा प्रत्यारोपण की सलाह दी। सरकारी नियम के मुताबिक दानदाता परिवार का करीबी होना चाहिए। ममता के माता पिता को मधुमेह है इसलिए उनका गुर्दा नहीं लिया गया। कुछ दिन पहले ससुर प्रेम सिंह ने खुद ही बहू को गुर्दा दान देने की पेशकश की। जांच में दोनों को ब्लडगु्रप और बहुत से फैक्टर पॉजिटिव पाए गए। उन्होंने गुर्दादान दिया। डॉ. रितेश मोंगा, नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. वरुण वर्मा, डॉ. संजय अग्रवाल की टीम ने सफल प्रत्यारोपण किया। 56 वर्षीय प्रेम सिंह ने कहा कि बहू और बेटी एक समान हैं मैने बेटी और उसका परिवार बचाने के लिए गुर्दा दान दिया, उसकी जिंदगी बचने पर आत्मिक संतोष महसूस कर रहा हूं।
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