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21वीं सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण,
Updated Sat, 28 Jul 2018 02:28 AM IST
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21वीं सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण, नजारे में बादलों ने डाला खलल
- 9 जून, 2123 में बनेगा फिर ऐसा खगोलीय संयोग
- रात 11:44 बजे से भारत में कुछ जगह देखा गया
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़/नई दिल्ली। इस सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण शुक्रवार की रात हुआ। पूर्ण चंद्र ग्रहण करीब 1 घंटे 43 मिनट तक रहा। वैसे, चंद्र ग्रहण का कुल वक्त 6 घंटे 14 मिनट का रहा। देशभर के साथ पूरे ट्राइसिटी में लोग चंद्र ग्रहण को देखने के लिए उत्सुक रहे लेकिन बादलों के कारण इस चंद्र ग्रहण को नहीं देखा जा सका। हालांकि, कुछ जगहों पर रात 11:44 बजे से लोगों ने खगोलीय घटना का भरपूर लुत्फ लिया। चंडीगढ़ में भी चंद्र ग्रहण को देखने के लिए कई जगह विशेष इंतजाम किए गए थे। पीयू के फिजिक्स डिपार्टमेंट में लगाए गए विशेष टेलीस्कोप से चंद्र ग्रहण देखने के लिए स्टूडेंट्स और आम लोग रात एक बजे तक डटे रहे लेकिन आसमान में बादल छाए रहने के कारण लोगों को मायूसी ही हाथ लगी। इसके अलावा ट्राइसिटी के अन्य हिस्सों में भी चंद्र ग्रहण न दिखने से लोग मायूस नजर आए। पूर्ण चंद्र ग्रहण रात करीब 1 बजे शुरू हुआ।
रात 1:15 बजे चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में आ गया। यह स्थिति रात 2:43 बजे तक रही। इस दौरान चांद पूरी तरह से लाल दिखाई दिया, जिसे ब्लड मून कहा जाता है। चंद्र ग्रहण सुबह 4:48 बजे तक रहा। अब 9 जून, 2123 में इतना लंबा चंद्र ग्रहण देखने को मिलेगा। चंद्रमा और पृथ्वी के अपनी-अपनी धुरी में सबसे दूर होने के कारण यह सबसे लंबा चंद्र ग्रहण है।
यह है चंद्र ग्रहण :
विज्ञान की भाषा में कहें तो चंद्र ग्रहण उस खगोलीय स्थिति को कहते हैं, जब चंद्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी छाया में आ जाता है। ऐसा तब होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा लगभग एक सीधी रेखा में आते हैं।
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चांद के नजदीक ही दिखा मंगल भी
शुक्रवार-शनिवार की रात चंद्रग्रहण के नजदीक ही मंगल ग्रह भी दिखाई दिया। चंद्र ग्रहण के समय मंगल ग्रह कुछ ज्यादा ही बड़ा और चमकदार दिखाई दे रहा था। दरअसल, इस दौरान मंगल ग्रह पृथ्वी से महज 5.7 करोड़ कमी दूरी पर सूर्य की कक्षा में चक्कर लगा रहा था। खगोलशास्त्रियों के मुताबिक, यह दुर्लभ संयोग था। लाल ग्रह के काफी नजदीक होने के कारण चांद का रंग भी हल्का नारंगी दिखाई दे रहा था। दूरबीन से देखने पर चांद भी लाल दिखाई दे रहा था।
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- 9 जून, 2123 में बनेगा फिर ऐसा खगोलीय संयोग
- रात 11:44 बजे से भारत में कुछ जगह देखा गया
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़/नई दिल्ली। इस सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण शुक्रवार की रात हुआ। पूर्ण चंद्र ग्रहण करीब 1 घंटे 43 मिनट तक रहा। वैसे, चंद्र ग्रहण का कुल वक्त 6 घंटे 14 मिनट का रहा। देशभर के साथ पूरे ट्राइसिटी में लोग चंद्र ग्रहण को देखने के लिए उत्सुक रहे लेकिन बादलों के कारण इस चंद्र ग्रहण को नहीं देखा जा सका। हालांकि, कुछ जगहों पर रात 11:44 बजे से लोगों ने खगोलीय घटना का भरपूर लुत्फ लिया। चंडीगढ़ में भी चंद्र ग्रहण को देखने के लिए कई जगह विशेष इंतजाम किए गए थे। पीयू के फिजिक्स डिपार्टमेंट में लगाए गए विशेष टेलीस्कोप से चंद्र ग्रहण देखने के लिए स्टूडेंट्स और आम लोग रात एक बजे तक डटे रहे लेकिन आसमान में बादल छाए रहने के कारण लोगों को मायूसी ही हाथ लगी। इसके अलावा ट्राइसिटी के अन्य हिस्सों में भी चंद्र ग्रहण न दिखने से लोग मायूस नजर आए। पूर्ण चंद्र ग्रहण रात करीब 1 बजे शुरू हुआ।
रात 1:15 बजे चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में आ गया। यह स्थिति रात 2:43 बजे तक रही। इस दौरान चांद पूरी तरह से लाल दिखाई दिया, जिसे ब्लड मून कहा जाता है। चंद्र ग्रहण सुबह 4:48 बजे तक रहा। अब 9 जून, 2123 में इतना लंबा चंद्र ग्रहण देखने को मिलेगा। चंद्रमा और पृथ्वी के अपनी-अपनी धुरी में सबसे दूर होने के कारण यह सबसे लंबा चंद्र ग्रहण है।
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यह है चंद्र ग्रहण :
विज्ञान की भाषा में कहें तो चंद्र ग्रहण उस खगोलीय स्थिति को कहते हैं, जब चंद्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी छाया में आ जाता है। ऐसा तब होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा लगभग एक सीधी रेखा में आते हैं।
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चांद के नजदीक ही दिखा मंगल भी
शुक्रवार-शनिवार की रात चंद्रग्रहण के नजदीक ही मंगल ग्रह भी दिखाई दिया। चंद्र ग्रहण के समय मंगल ग्रह कुछ ज्यादा ही बड़ा और चमकदार दिखाई दे रहा था। दरअसल, इस दौरान मंगल ग्रह पृथ्वी से महज 5.7 करोड़ कमी दूरी पर सूर्य की कक्षा में चक्कर लगा रहा था। खगोलशास्त्रियों के मुताबिक, यह दुर्लभ संयोग था। लाल ग्रह के काफी नजदीक होने के कारण चांद का रंग भी हल्का नारंगी दिखाई दे रहा था। दूरबीन से देखने पर चांद भी लाल दिखाई दे रहा था।