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रिश्वत
Updated Mon, 20 Aug 2018 07:20 PM IST
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डॉक्टर और लिपिक रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े
-नागरिक अस्पताल में विजिलेंस टीम की कार्रवाई
-घायल व्यक्ति की झूठी मेडिकल रिपोर्ट देने के नाम पर मांगे थे 10 हजार रुपये
अमर उजाला ब्यूरो
पलवल। झगड़े के एक मामले में मेडिकल जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा बनाए गए बोर्ड में शामिल एक डॉक्टर व लिपिक को सोमवार को विजिलेंस टीम ने 10 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को विजिलेंस टीम अपने साथ फरीदाबाद विजिलेंस थाने ले गई। डॉक्टर व लिपिक झूठी मेडिकल रिपोर्ट बनाने की एवज में रिश्वत ले रहे थे।
हथीन के गांव गुराक्षर में 25 मई को सहाबुद्दीन नामक व्यक्ति के साथ गांव के ही शरीफ, रसीक व शमशु ने मारपीट की थी। हमले में सहाबुद्दीन के सिर में चोट आई थी। उसे अस्पताल ले जाया गया तो ड्यूटी पर तैनात डॉ. रुचि दीक्षित ने मेडिकल जांच के दौरान उसके सिर में चोट नहीं दर्शाई। बाद में सहाबुद्दीन को दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल के ट्रोमा सेंटर में भर्ती कराया गया। वहां की मेडिकल रिपोर्ट में सिर में चोट दर्शाई गई। इस मामले में सहाबुद्दीन ने 26 जुलाई को सीएम विंडो पर डॉ. रुचि दीक्षित पर आरोपियों से पैसे लेकर सिर में चोट न दर्शाने की शिकायत की थी। इस शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग को फिर से जिला नागरिक अस्पताल के तीन डाक्टरों के पैनल का एक बोर्ड बनाकर मेडिकल कराने के आदेश दिए गए थे।
डाक्टरों का पैनल बनाने के आदेश मिलते ही सिविल सर्जन डॅा. प्रदीप शर्मा ने डॅा. यतेंद्र, डॉ. मनीष व डॉ.. नरेंद्र मलिक का बोर्ड गठित कर दिया। अब इस बोर्ड को सहाबुद्दीन की फिर से मेडिकल जांच करनी थी। जांच के लिए सहाबुद्दीन को बुलाया गया तो बोर्ड में शामिल डॉ. नरेंद्र मलिक ने 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की। इस बात की शिकायत सहाबुद्दीन ने विजिलेंस को कर दी। शिकायत की पुष्टि के बाद विजिलेंस के डीएसपी जयवीर राठी ठीम गठित कर पलवल आ गए और सोमवार को सहाबुद्दीन को विशेष रसायन लगे 10 हजार रुपये देकर डॉ. मलिक के पास सिविल अस्पताल भेजा। सहाबुद्दीन ने अस्पताल में जाकर रुपये डॉ. नरेंद्र मलिक को देने चाहे तो उन्होंने लिपिक लोकेंद्र रावत को दिलवा दिए तथा बाद में उससे लेकर अपने पर्स में रख लिए। रुपये लेते ही विजिलेंस की टीम ने छापा मारकर डा. नरेंद्र मलिक व लिपिक लोकेंद्र रावत को पकड़ कर उनके हाथ धुलवाए तो रंग उभर आया। इसके बाद टीम ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
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विजिलेंस के छापे की सूचना से अफरातफरी
जैसे ही सरकारी विभागों में यह सूचना आई कि विजिलेंस टीम ने किसी डाक्टर को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है तो सरकारी विभाग में अफरातफरी मच गई। भ्रष्टाचार की शिकायतों को झेल रहे पटवार घर से तो पटवारी ही गायब हो गए। वहीं कई अन्य सरकारी विभागों के भी अफसर भी नदारद हो गए।
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-नागरिक अस्पताल में विजिलेंस टीम की कार्रवाई
-घायल व्यक्ति की झूठी मेडिकल रिपोर्ट देने के नाम पर मांगे थे 10 हजार रुपये
अमर उजाला ब्यूरो
पलवल। झगड़े के एक मामले में मेडिकल जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा बनाए गए बोर्ड में शामिल एक डॉक्टर व लिपिक को सोमवार को विजिलेंस टीम ने 10 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को विजिलेंस टीम अपने साथ फरीदाबाद विजिलेंस थाने ले गई। डॉक्टर व लिपिक झूठी मेडिकल रिपोर्ट बनाने की एवज में रिश्वत ले रहे थे।
हथीन के गांव गुराक्षर में 25 मई को सहाबुद्दीन नामक व्यक्ति के साथ गांव के ही शरीफ, रसीक व शमशु ने मारपीट की थी। हमले में सहाबुद्दीन के सिर में चोट आई थी। उसे अस्पताल ले जाया गया तो ड्यूटी पर तैनात डॉ. रुचि दीक्षित ने मेडिकल जांच के दौरान उसके सिर में चोट नहीं दर्शाई। बाद में सहाबुद्दीन को दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल के ट्रोमा सेंटर में भर्ती कराया गया। वहां की मेडिकल रिपोर्ट में सिर में चोट दर्शाई गई। इस मामले में सहाबुद्दीन ने 26 जुलाई को सीएम विंडो पर डॉ. रुचि दीक्षित पर आरोपियों से पैसे लेकर सिर में चोट न दर्शाने की शिकायत की थी। इस शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग को फिर से जिला नागरिक अस्पताल के तीन डाक्टरों के पैनल का एक बोर्ड बनाकर मेडिकल कराने के आदेश दिए गए थे।
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डाक्टरों का पैनल बनाने के आदेश मिलते ही सिविल सर्जन डॅा. प्रदीप शर्मा ने डॅा. यतेंद्र, डॉ. मनीष व डॉ.. नरेंद्र मलिक का बोर्ड गठित कर दिया। अब इस बोर्ड को सहाबुद्दीन की फिर से मेडिकल जांच करनी थी। जांच के लिए सहाबुद्दीन को बुलाया गया तो बोर्ड में शामिल डॉ. नरेंद्र मलिक ने 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की। इस बात की शिकायत सहाबुद्दीन ने विजिलेंस को कर दी। शिकायत की पुष्टि के बाद विजिलेंस के डीएसपी जयवीर राठी ठीम गठित कर पलवल आ गए और सोमवार को सहाबुद्दीन को विशेष रसायन लगे 10 हजार रुपये देकर डॉ. मलिक के पास सिविल अस्पताल भेजा। सहाबुद्दीन ने अस्पताल में जाकर रुपये डॉ. नरेंद्र मलिक को देने चाहे तो उन्होंने लिपिक लोकेंद्र रावत को दिलवा दिए तथा बाद में उससे लेकर अपने पर्स में रख लिए। रुपये लेते ही विजिलेंस की टीम ने छापा मारकर डा. नरेंद्र मलिक व लिपिक लोकेंद्र रावत को पकड़ कर उनके हाथ धुलवाए तो रंग उभर आया। इसके बाद टीम ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
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विजिलेंस के छापे की सूचना से अफरातफरी
जैसे ही सरकारी विभागों में यह सूचना आई कि विजिलेंस टीम ने किसी डाक्टर को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है तो सरकारी विभाग में अफरातफरी मच गई। भ्रष्टाचार की शिकायतों को झेल रहे पटवार घर से तो पटवारी ही गायब हो गए। वहीं कई अन्य सरकारी विभागों के भी अफसर भी नदारद हो गए।