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फिरोजपुर झिरका थाना क्षेत्र में आठ साल में हुईं 189 मौतें
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फिरोजपुर झिरका थाना क्षेत्र में आठ साल में हुईं 189 मौतें
यूनुस अलवी
पुन्हाना। जिले की दिल्ली-अलवर रोड पिछले आठ साल में न जाने कितने लोगों की मौत की गवाह बन चुकी है। केवल फिरोजपुर झिरका थाना क्षेत्र में दुर्घटनाओं में 189 लोगों की जान जा चुकी है जबकि 578 लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके है। यह जानकारी पुलिस विभाग ने आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा मांगी गई जानकारी में दी। लंबे समय से नूंह से राजस्थान बॉर्डर तक फोर लेन बनाने की मांग की जा रही है।
आरटीआई कार्यकर्ता हैदर अली ने बताया कि दिल्ली-अलवर रोड पर आए दिन हादसों से जाने जा रही है। पिछले दस साल में 200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। फिरोजपुर झिरका थाना क्षेत्र में वर्ष 2010 से 2018 तक सड़क हादसे में मारे गए लोगों और घायलों की आरटीआई के तहत जानकारी मांगी गई थी। विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2010 में 20 मौतें व 80 घायल, 2011 में 14 मौतें व 172 घायल, 2012 में 16 मौतें व 47 घायल, 2013 में 27 मौतें व 30 घायल, 2014 में 18 मौतें व 34 घायल, 2015 में 19 मौतें व 52 घायल, 2016 में 21 मौतें व 52 घायल, 2017 में 28 मौतें व 68 घायल और 2018 में 26 मौतें व 26 लोग घायल हुए। अगर दिल्ली-अलवर रोड पर नूंह जिले के फिरोजपुर झिरका, नगीना, नूंह और रोजका मेव थानों में हादसों का आंकड़ा निकाला जाए, तो संख्या कई हजार होती है। ऐसे में जब तक सरकार इस सड़क को फोर लेन नहीं बनाती है, तब तक आए दिन मौतें होती रहेंगी।
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यूनुस अलवी
पुन्हाना। जिले की दिल्ली-अलवर रोड पिछले आठ साल में न जाने कितने लोगों की मौत की गवाह बन चुकी है। केवल फिरोजपुर झिरका थाना क्षेत्र में दुर्घटनाओं में 189 लोगों की जान जा चुकी है जबकि 578 लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके है। यह जानकारी पुलिस विभाग ने आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा मांगी गई जानकारी में दी। लंबे समय से नूंह से राजस्थान बॉर्डर तक फोर लेन बनाने की मांग की जा रही है।
आरटीआई कार्यकर्ता हैदर अली ने बताया कि दिल्ली-अलवर रोड पर आए दिन हादसों से जाने जा रही है। पिछले दस साल में 200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। फिरोजपुर झिरका थाना क्षेत्र में वर्ष 2010 से 2018 तक सड़क हादसे में मारे गए लोगों और घायलों की आरटीआई के तहत जानकारी मांगी गई थी। विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2010 में 20 मौतें व 80 घायल, 2011 में 14 मौतें व 172 घायल, 2012 में 16 मौतें व 47 घायल, 2013 में 27 मौतें व 30 घायल, 2014 में 18 मौतें व 34 घायल, 2015 में 19 मौतें व 52 घायल, 2016 में 21 मौतें व 52 घायल, 2017 में 28 मौतें व 68 घायल और 2018 में 26 मौतें व 26 लोग घायल हुए। अगर दिल्ली-अलवर रोड पर नूंह जिले के फिरोजपुर झिरका, नगीना, नूंह और रोजका मेव थानों में हादसों का आंकड़ा निकाला जाए, तो संख्या कई हजार होती है। ऐसे में जब तक सरकार इस सड़क को फोर लेन नहीं बनाती है, तब तक आए दिन मौतें होती रहेंगी।
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