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पीएचडी प्रोग्राम के नियमों पर आईआईएम और सरकार में टकराव
Updated Sat, 15 Dec 2018 06:35 AM IST
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पीएचडी प्रोग्राम के नियमों पर आईआईएम और सरकार में टकराव
- आईआईएम प्रबंधन ने केंद्र से कोर्स फीस पर लगने वाले टैक्स को हटाने की रखी मांग
सीमा शर्मा
नई दिल्ली। पीएचडी प्रोग्राम के नियमों को लेकर आईआईएम (भारतीय प्रबंध संस्थान) और केंद्र सरकार के बीच टकराव बढ़ गया है। आईआईएम प्रबंधन डायरेक्ट पीएचडी प्रोग्राम में सीजीपीए आठ की बजाय छह से दाखिला करना चाहता है। इसके अलावा पीएचडी प्रोग्राम में दाखिले की योग्यता स्नातकोत्तर की बजाय स्नातक रखने की मांग की है। खास बात यह है कि जीएसटी के चलते अब राज्य सरकार आईआईएम प्रबंधन से कई कोर्स की फीस पर टैक्स वसूल रही है। आईआईएम प्रबंधन वित्त मंत्रालय से कोर्स फीस को टैक्स से बाहर करने की मांग कर रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, आईआईएम प्रबंधन और मानव संसाधन विकास मंत्रालय की बृहस्पतिवार को बैठक हुई। जिसमें आईआईएम प्रबंधन ने डायरेक्ट पीएचडी प्रोग्राम के नियमों पर अपनी आपत्ति दर्ज की। प्रबंधन का तर्क है कि आईआईएम बिल के बाद दिक्कत शुरू हुई है। आईआईएम प्रबंधन का कहना था कि नए नियमों के तहत डायरेक्ट पीएचडी प्रोग्राम में सीजीपीए आठ व स्नातकोत्तर प्रोग्राम अनिवार्य किया गया है। जबकि आईआईएम चाहता है कि फेलोशिप प्रोग्राम (डायरेक्ट पीएचडी का पूर्व में नाम) की तर्ज पर दाखिले की योग्यता सीजीपीए छह और स्नातक प्रोग्राम होनी चाहिए। दरअसल, आईआईएम में आईआईटी से बीटेक पासआउट डायरेक्ट पीएचडी करने पहुंचते हैं। बीटेक साल की होती है। उस लिहाज से छात्र के पास चार साल का अनुभव रहता है।
सरकार का कहना है कि आईआईएम बिल के बाद आईआईएम को भी आईआईटी की तर्ज पर नियमों को मानना अनिवार्य है। क्योंकि यहां पर डायरेक्ट पीएचडी में दाखिले की योग्यता सीजीपीए आठ व स्नातकोत्तर डिप्लोमा या डिग्री होनी जरूरी है। हालांकि, बैठक में मंत्रालय ने आईआईएम की मांग को अभी नहीं माना है। जबकि आईआईएम प्रबंधन अपनी मांग पूरी करवाना चाहता है।
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- वित्त मंत्रालय से दखल की मांग
सूत्रों के मुताबिक, आईआईएम प्रबंधन कुछ कोर्स फीस पर लगने वाले टैक्स से परेशान है। आईआईएम अहमदाबाद ने इस मुद्दे पर सरकार को पहले चिट्ठी भी लिखी थी। बैठक में आईआईएम प्रबंधन का कहना था कि जीएसटी आने के बाद एंट्री 66 और एंट्री 67 के चलते राज्य सरकार कोर्स फीस पर टैक्स लगा रही है। राज्य सरकार कोचिंग इंस्टीट्यूट की तर्ज पर कोर्स फीस पर टैक्स के पैसे आईआईएम प्रबंधन से वसूल रही है। यदि आईआईएम बिल के बाद आईआईटी समेत अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों की तर्ज पर शिक्षण संस्थान हैं तो फिर टैक्स क्यों भरें? आईआईएम प्रबंधन की मांग है कि इस मामले में वित्त मंत्रालय उचित दिशा-निर्देश जारी करते हुए टैक्स से बाहर निकाले।
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- आईआईएम प्रबंधन ने केंद्र से कोर्स फीस पर लगने वाले टैक्स को हटाने की रखी मांग
सीमा शर्मा
नई दिल्ली। पीएचडी प्रोग्राम के नियमों को लेकर आईआईएम (भारतीय प्रबंध संस्थान) और केंद्र सरकार के बीच टकराव बढ़ गया है। आईआईएम प्रबंधन डायरेक्ट पीएचडी प्रोग्राम में सीजीपीए आठ की बजाय छह से दाखिला करना चाहता है। इसके अलावा पीएचडी प्रोग्राम में दाखिले की योग्यता स्नातकोत्तर की बजाय स्नातक रखने की मांग की है। खास बात यह है कि जीएसटी के चलते अब राज्य सरकार आईआईएम प्रबंधन से कई कोर्स की फीस पर टैक्स वसूल रही है। आईआईएम प्रबंधन वित्त मंत्रालय से कोर्स फीस को टैक्स से बाहर करने की मांग कर रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, आईआईएम प्रबंधन और मानव संसाधन विकास मंत्रालय की बृहस्पतिवार को बैठक हुई। जिसमें आईआईएम प्रबंधन ने डायरेक्ट पीएचडी प्रोग्राम के नियमों पर अपनी आपत्ति दर्ज की। प्रबंधन का तर्क है कि आईआईएम बिल के बाद दिक्कत शुरू हुई है। आईआईएम प्रबंधन का कहना था कि नए नियमों के तहत डायरेक्ट पीएचडी प्रोग्राम में सीजीपीए आठ व स्नातकोत्तर प्रोग्राम अनिवार्य किया गया है। जबकि आईआईएम चाहता है कि फेलोशिप प्रोग्राम (डायरेक्ट पीएचडी का पूर्व में नाम) की तर्ज पर दाखिले की योग्यता सीजीपीए छह और स्नातक प्रोग्राम होनी चाहिए। दरअसल, आईआईएम में आईआईटी से बीटेक पासआउट डायरेक्ट पीएचडी करने पहुंचते हैं। बीटेक साल की होती है। उस लिहाज से छात्र के पास चार साल का अनुभव रहता है।
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सरकार का कहना है कि आईआईएम बिल के बाद आईआईएम को भी आईआईटी की तर्ज पर नियमों को मानना अनिवार्य है। क्योंकि यहां पर डायरेक्ट पीएचडी में दाखिले की योग्यता सीजीपीए आठ व स्नातकोत्तर डिप्लोमा या डिग्री होनी जरूरी है। हालांकि, बैठक में मंत्रालय ने आईआईएम की मांग को अभी नहीं माना है। जबकि आईआईएम प्रबंधन अपनी मांग पूरी करवाना चाहता है।
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- वित्त मंत्रालय से दखल की मांग
सूत्रों के मुताबिक, आईआईएम प्रबंधन कुछ कोर्स फीस पर लगने वाले टैक्स से परेशान है। आईआईएम अहमदाबाद ने इस मुद्दे पर सरकार को पहले चिट्ठी भी लिखी थी। बैठक में आईआईएम प्रबंधन का कहना था कि जीएसटी आने के बाद एंट्री 66 और एंट्री 67 के चलते राज्य सरकार कोर्स फीस पर टैक्स लगा रही है। राज्य सरकार कोचिंग इंस्टीट्यूट की तर्ज पर कोर्स फीस पर टैक्स के पैसे आईआईएम प्रबंधन से वसूल रही है। यदि आईआईएम बिल के बाद आईआईटी समेत अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों की तर्ज पर शिक्षण संस्थान हैं तो फिर टैक्स क्यों भरें? आईआईएम प्रबंधन की मांग है कि इस मामले में वित्त मंत्रालय उचित दिशा-निर्देश जारी करते हुए टैक्स से बाहर निकाले।